संसद में सियासी हलचल: शरद पवार और सुप्रिया सुले ने पीएम मोदी से की मुलाकात

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संसद भवन में पीएम मोदी से मिले शरद पवार और सुप्रिया सुले; कृषि संकट और परिसीमन पर चर्चा से सियासी हलचल तेज

नई दिल्ली में जारी संसद के मानसून सत्र के दौरान आज सुबह एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया।  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SCP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। संसद परिसर के बाहर जहां विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ लगातार नारेबाजी और हंगामा कर रहे हैं, वहीं देश के दो धुर विरोधी नेताओं के बीच हुई इस सहज मुलाकात ने देश की राजनीति में नई बहस और अटकलों को जन्म दे दिया है। 

गर्मजोश मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल

मुलाकात की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें दोनों वरिष्ठ नेता बेहद गर्मजोशी के साथ मिलते नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे बढ़कर मराठा क्षत्रप शरद पवार का हाथ थामा और सहारा देकर उन्हें अपने कक्ष के भीतर लेकर गए। बंद कमरे में हुई इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच ठहाके और हंसी-मजाक भी देखने को मिला, जिससे राजनीतिक गलियारों में इस सौहार्दपूर्ण केमिस्ट्री के अलग-अलग मायने निकाले जाने लगे हैं।

कृषि संकट और सिंचाई पर सौंपा ज्ञापन

आधिकारिक तौर पर इस बैठक को एक प्रशासनिक और जनहित से जुड़ी मुलाकात बताया जा रहा है। बैठक के दौरान शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र (ज्ञापन) सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में चल रहे कृषि संकट, किसानों की विभिन्न लंबित समस्याओं और सिंचाई क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जल्द से जल्द मंजूरी देने की मांग की गई है। शरद पवार के करीबियों का कहना है कि वे समय-समय पर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों और महाराष्ट्र के प्रशासनिक संकटों को लेकर प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करते रहे हैं, और यह मुलाकात भी उसी सिलसिले का एक हिस्सा मात्र है।

CJP आंदोलन और NEET विवाद की पृष्ठभूमि

इस मुलाकात का समय राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा गौर करने वाला है। दरअसल, ठीक एक दिन पहले ही मंगलवार (21 जुलाई) को शरद पवार और सुप्रिया सुले दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे. CJP प्रमुख अभिजीत दीपके और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र पिछले कई दिनों से NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर अनशन और प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां पवार ने छात्रों की मांगों को जायज ठहराते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की विपक्ष की मांग का पुरजोर समर्थन किया था। उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर संवेदनशीलता के साथ उचित कदम उठाने का आग्रह भी किया था। इसके तुरंत बाद, अगले ही दिन सुबह सुप्रिया सुले (जो राहुल गांधी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल रही हैं) के साथ पवार का प्रधानमंत्री से मिलना कई तरह की अनौपचारिक चर्चाओं को हवा दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और इस छात्र आंदोलन को लेकर भी अनौपचारिक बातचीत हुई है।

परिसीमन बिल पर सशर्त समर्थन का पेंच

इस हाई-प्रोफाइल बैठक के पीछे एक बड़ा कारण केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले संभावित परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को भी माना जा रहा है। वर्तमान लोकसभा और आगामी राजनीतिक ढांचे को देखते हुए इस बिल पर आम सहमति बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत एनडीए सरकार को इस बिल को पारित कराने के लिए विपक्षी धड़े के क्षेत्रीय क्षत्रपों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है, और शरद पवार की पार्टी के पास इस समय संसद में 8 सांसद हैं।

सुप्रिया सुले की शर्त

हाल ही में सुप्रिया सुले ने इस बिल को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभा सीटों में सभी राज्यों के लिए समान रूप से 50 फीसदी बढ़ोतरी का लिखित आश्वासन और कानूनी गारंटी देती है, तो एनसीपी (SP) इस परिसीमन बिल का सशर्त समर्थन करने के लिए तैयार हो सकती है।  हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा था कि वे इस संबंध में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के साथी दलों के साथ भी विचार-विमर्श करेंगी। ऐसे में राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि इस बैठक में परिसीमन के गणित और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर गहराई से बातचीत हुई है।

रिश्तों का विरोधाभास: निजी आदर बनाम चुनावी तीखापन

नरेंद्र मोदी और शरद पवार के बीच व्यक्तिगत संबंधों में आदर और राजनीति में तीखेपन का विरोधाभास देखने को मिलता है। पीएम मोदी ने जहां 2015 में पवार की प्रशंसा की थी, वहीं चुनावी सभाओं में उन पर ‘नेचुरली करप्ट’ और ‘भटकती आत्मा’ जैसे तंज कसे हैं।  इसके विपरीत, मोदी सरकार ने पवार को पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया है।

क्या बदलेंगे महाराष्ट्र के सियासी समीकरण?

आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, शरद पवार की हालिया मुलाकातों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हालांकि एनसीपी (SP) ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया है, लेकिन इन बैठकों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

राजनीति में ताजगी का संदेश

शरद पवार और पीएम मोदी की इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक कई तरह की अटकलें लगा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उनके बीच के संवाद से देश की राजनीतिक दिशा में बदलाव आ सकता है। पवार की राजनीति में उपस्थिति हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, और इस बार भी उन्होंने अपनी उपस्थिति से कई संदेश दिए हैं।

पार्टी और सरकार के बीच की समीकरण

इस मुलाकात से यह भी समझा जा रहा है कि NCP (SP) पार्टी और केंद्र सरकार के बीच समीकरण कैसे विकसित हो सकते हैं। पवार की रणनीति हमेशा से विपक्ष के साथ साथ सरकार में भी संवाद बनाए रखने पर केंद्रित रही है। उनके और मोदी के बीच की बातचीत से पता चलेगा कि आगे का रास्ता क्या होगा।

आगे की राजनीति पर प्रभाव

शरद पवार की इस मुलाकात के बाद अब सबकी नज़र इस पर है कि उनकी और मोदी की बातचीत का असर आगामी चुनावों में किस प्रकार नजर आएगा। राजनीतिक अवलोकक लगातार इस मुलाकात को लेकर चर्चा कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मुलाकात किसी नई राजनीतिक दिशा की ओर इशारा करती है।

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