डिजिटल जूमर्स: बदल रहे हैं Gen Z के जीने और सैलरी खर्च करने के तरीके

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कहां गायब हो रही है Gen Z की सैलरी? वो 5 खर्चे जो आपको भी हैरान कर देंगे!

वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी, जिसे हम ‘Gen Z’ या ‘जूमर्स‘ के नाम से जानते हैं, अब वैश्विक कार्यबल (workforce) का एक बड़ा और प्रभावशाली हिस्सा बन चुकी है। जैसे-जैसे इस पीढ़ी के हाथों में नियमित वेतन और क्रय शक्ति आ रही है, वैसे-वैसे पारंपरिक उपभोक्ता बाजार के नियम और वित्तीय प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। जहां पुरानी पीढ़ियों (जैसे बेबी बूमर्स या जेन एक्स) का मुख्य ध्यान घर खरीदने, कार लेने और पारंपरिक बचत योजनाओं में निवेश करने पर होता था, वहीं Gen Z का दृष्टिकोण पूरी तरह से भिन्न है। आज की इस युवा पीढ़ी की सैलरी का एक बड़ा हिस्सा सब्सक्रिप्शन सेवाओं, अत्याधुनिक तकनीक, स्वास्थ्य (वेलनेस) और सामाजिक जीवन (एक्सपीरियंस इकोनॉमी) पर खर्च हो रहा है। यह बदलाव केवल एक अस्थायी ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने के आधुनिक और पूरी तरह से डिजिटल हो चुके नजरिए को दर्शाता है।

सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी (Subscription Economy) का जाल

Gen Z के वित्तीय व्यवहार का अध्ययन करें तो ‘स्वामित्व’ (Ownership) के स्थान पर ‘पहुंच’ (Access) की प्राथमिकता सबसे ऊपर नजर आती है। इस पीढ़ी के लिए किसी चीज को स्थायी रूप से खरीदने के बजाय उसकी सेवा को किराये पर या सब्सक्रिप्शन पर लेना अधिक सुविधाजनक और व्यावहारिक है। इसी सोच ने ‘सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी’ को जन्म दिया है। एक कामकाजी जेन जेड युवा के मासिक बजट को देखने पर पता चलता है कि उसका एक निश्चित और बड़ा हिस्सा विभिन्न डिजिटल और भौतिक सब्सक्रिप्शन में चला जाता है। मनोरंजन के लिए नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, डिज़नी प्लस और स्पॉटिफ़ाई; पेशेवर और शैक्षिक कार्यों के लिए ChatGPT प्लस, एडोब क्लाउड या LinkedIn  प्रीमियम; और दैनिक जीवन की सुविधाओं के लिए जोमैटो गोल्ड, स्विगी वन या अमेज़न फ्रेश जैसे सब्सक्रिप्शन उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त, अब फिटनेस (जिम या योगा ऐप्स), स्किनकेयर बॉक्स और यहां तक कि कपड़ों के लिए भी सब्सक्रिप्शन मॉडल लोकप्रिय हो रहे हैं। हालांकि व्यक्तिगत रूप से ये सब्सक्रिप्शन छोटे और किफायती लगते हैं, लेकिन सामूहिक रूप से ये हर महीने सैलरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (लगभग 10 से 15 प्रतिशत) सोख लेते हैं। इस पीढ़ी के लिए यह खर्च फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और मानसिक मनोरंजन के लिए एक आवश्यक निवेश है।

तकनीक: जीवनशैली और पहचान का विस्तार

Gen Z इतिहास की पहली ऐसी पीढ़ी है जो पूरी तरह से इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साये में पली-बढ़ी है। इसलिए, उनके लिए तकनीक केवल एक उपकरण (tool) नहीं है, बल्कि उनके जीवन, काम और सामाजिक पहचान का एक अभिन्न विस्तार है। अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा वे नए गैजेट्स खरीदने और उन्हें अपग्रेड करने में लगाते हैं। नवीनतम स्मार्टफोन, शोर-निवारक (Noise-canceling) ईयरबड्स, स्मार्टवॉच, टैबलेट और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन उनकी बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं। इसके अलावा, वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड वर्किंग कल्चर के कारण एक बेहतरीन होम-ऑफिस सेटअप या गेमिंग कंसोल पर खर्च करना भी आम हो गया है। तकनीक पर होने वाला यह खर्च केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं है; विभिन्न इन-ऐप खरीदारी (in-app purchases), क्लाउड स्टोरेज स्पेस (जैसे आईक्लाउड या गूगल वन) और प्रीमियम सॉफ्टवेयर टूल्स पर भी ये युवा खुलकर खर्च करते हैं। तकनीक के बिना उनके जीवन की कल्पना करना असंभव है, और यही कारण है कि सैलरी आते ही तकनीक से जुड़े खर्च उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होते हैं।

स्वास्थ्य और वेलनेस: ‘सेल्फ-केयर’ पर नया ध्यान

पुरानी पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य का मतलब आमतौर पर बीमारी के समय डॉक्टर के पास जाना या अस्पताल का खर्च उठाना होता था। इसके विपरीत, Gen Z के लिए स्वास्थ्य (Health) और वेलनेस (Wellness) एक दैनिक जीवनशैली है। यह पीढ़ी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक जागरूक है, और वे इसे एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखते हैं। इस पीढ़ी के खर्चों में ‘सेल्फ-केयर’ (Self-care) और ‘होलिस्टिक वेलनेस’ (Holistic Wellness) का दबदबा है। जिम की महंगी सदस्यता, कस्टमाइज्ड डाइट प्लान, ऑर्गेनिक और शाकाहारी (Vegan) खाद्य उत्पाद, मानसिक शांति के लिए थेरेपी और काउंसलिंग सत्र, और ध्यान (Meditation) ऐप्स इस पीढ़ी के मासिक बजट का एक बड़ा हिस्सा तय करते हैं। इसके अलावा, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यानी बीमारी को रोकने वाले सप्लीमेंट्स, विटामिन और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स पर भी इनका खर्च बहुत अधिक है। Gen Z का मानना है कि एक तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी माहौल में खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखना सबसे जरूरी है, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी सैलरी का एक चौथाई हिस्सा ही क्यों न खर्च करना पड़े।

सामाजिक जीवन और ‘एक्सपीरियंस इकोनॉमी’

Gen Z की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि वे भौतिक वस्तुओं (मटेरियलिज्म) के बजाय ‘अनुभवों’ (Experiences) को अधिक महत्व देते हैं। वे एक महंगा डिजाइनर बैग खरीदने के बजाय किसी नए देश की यात्रा करने, किसी बड़े संगीत समारोह (Concert) का हिस्सा बनने या किसी खास कैफे में दोस्तों के साथ वक्त बिताने को तरजीह देते हैं। इसे अर्थशास्त्र में ‘एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ कहा जाता है।उनका सामाजिक जीवन अत्यधिक सक्रिय और डिजिटल रूप से प्रदर्शित होने वाला होता है। सप्ताहांत (Weekends) पर नए-नए रेस्तरां और कैफे एक्सप्लोर करना, एस्थेटिक (Aesthetic) जगहों पर जाना, और दोस्तों के साथ सोशल ड्रिंकिंग या डाइनिंग आउट पर उनकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है। इसके अलावा, ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ (FOMO) यानी कुछ छूट जाने का डर भी उनके खर्चों को प्रभावित करता है। सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम, टिकटॉक आदि) पर अपनी जीवनशैली को प्रदर्शित करना और नई जगहों की तस्वीरें साझा करना उनके सामाजिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। संगीत समारोहों, स्टैंड-अप कॉमेडी शो, और ट्रिप्स (सड़क यात्राएं या ट्रेकिंग) पर होने वाला खर्च उनके जीवन को संवारने और खुद को तरोताजा रखने का माध्यम है।

वित्तीय निहितार्थ और भविष्य का परिदृश्य

इस बदलते खर्च के पैटर्न का जेन जेड के दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। पारंपरिक अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह के खर्चों के कारण यह पीढ़ी पर्याप्त बचत नहीं कर पा रही है, जिससे उनके लिए भविष्य में घर खरीदना या सेवानिवृत्ति (Retirement) के लिए फंड जमा करना मुश्किल हो सकता है। ‘इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन’ (तुरंत संतुष्टि) की चाहत कई बार उन्हें बजट से बाहर जाकर खर्च करने पर मजबूर कर देती है, और ‘बाय नाउ, पे लेटर’ (BNPL) तथा क्रेडिट कार्ड के बढ़ते चलन ने इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा दिया है। हालांकि, इसका एक दूसरा सकारात्मक पहलू भी है। Gen Z वित्तीय रूप से पूरी तरह जागरूक है। वे पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाने के बजाय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टोकरेंसी और आंशिक अचल संपत्ति (fractional real estate) जैसे आधुनिक और उच्च रिटर्न वाले साधनों में निवेश करना पसंद करते हैं। वे वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Independence, Retire Early – FIRE) के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं, लेकिन वे वर्तमान जीवन को दांव पर लगाकर भविष्य को सुरक्षित करने के पुराने ढर्रे को नहीं अपनाना चाहते। वे ‘वर्क-लाइफ बैलेंस‘ और वर्तमान में जीने की कला को सर्वोपरि मानते हैं।

सांस्कृतिक आर्थिक बदलाव की पीढ़ी

संक्षेप में कहा जाए तो, Gen Z की सैलरी का बड़ा हिस्सा सब्सक्रिप्शन, तकनीक, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर खर्च होना केवल उनकी तात्कालिक इच्छाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक बदलाव का सूचक है। यह पीढ़ी एक ऐसी दुनिया में जी रही है जो अत्यधिक अनिश्चित, डिजिटल रूप से जुड़ी हुई और मानसिक रूप से तनावपूर्ण है। ऐसे में, तकनीक उनकी कार्यक्षमता बढ़ाती है, सब्सक्रिप्शन उन्हें मनोरंजन और सुविधा देते हैं, वेलनेस उनके मानसिक संतुलन को बनाए रखता है, और सामाजिक जीवन उन्हें खुशियां प्रदान करता है। उपभोक्ता बाजार को अब इस युवा पीढ़ी की प्राथमिकताओं के अनुसार खुद को ढालना होगा, क्योंकि आने वाले समय में यही खर्च करने का नया और वैश्विक मानक बनने वाला है।

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