गांव की सरकार में महिलाओं का दबदबा: यूपी-एमपी से लेकर महाराष्ट्र तक की रिपोर्ट

The CSR Journal Magazine
भारत में पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं का नेतृत्व बढ़ाने के लिए सरकार की कोशिशें जारी हैं। 2023-24 से 2025-26 के बीच, 23.83 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ उनके नेतृत्व कौशल में भी सुधार हो रहा है।

क्या है प्रशिक्षण का उद्देश्य

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने ‘पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान’ (RGSA) के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस योजना के अनुसार, अकेले 2025-26 में 9.42 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जाएगा जिससे वे पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस, और विकास योजनाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।

राज्यों में वितरण और भागीदारी, डिजिटल गवर्नेंस में बदलाव

विभिन्न राज्यों में महिला प्रतिनिधियों की प्रशिक्षण संख्या में भी अंतराल है। मध्‍य प्रदेश में 2025-26 में 1,11,555 महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण मिला, जबकि यूपी में यह संख्या 86,982 रही। इससे स्पष्ट होता है कि पंचायत स्तर पर महिला नेतृत्व के लिए राज्य सरकारें कितनी गंभीर हैं। महिलाओं की डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए 2022-23 से 2026-27 तक कुल 1,00,479 महिला पंचायत प्रतिनिधियों को डिजिटल गवर्नेंस की ट्रेनिंग दी गई है। इसमें यूपी में 2025-26 में 7,529 प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण शामिल है। यह डिजिटल बदलाव पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी को भी अहम मानता है।

नई पहल: सशक्त पंचायत नेत्री अभियान

महिला पंचायत नेताओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने ‘सशक्त पंचायत नेत्री अभियान’ की शुरुआत की है। यह अभियान महिलाओं के लिए ग्रामीण शासन से जुड़े ज्ञान और कौशल में वृद्धि पर केन्द्रित है, साथ ही अच्छी कार्य प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित भी किया जाएगा।

ओन सोर्स रेवेन्यू प्रोग्राम का महत्व और महिला नेतृत्व के लिए विशेष मॉड्यूल

महिला प्रतिनिधियों के लिए ‘ओन सोर्स रेवेन्यू’ यानी पंचायत की खुद की कमाई बढ़ाने का प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण है। इसके तहत 2025-26 में देश में 20,404 महिलाएं प्रशिक्षित की गई हैं। इससे यह साफ होता है कि सरकार महिला प्रतिनिधियों को केवल पारंपरिक प्रशासन तक सीमित नहीं रखना चाहती। महिलाओं के नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘चैंपियनिंग ऑफ चेंज- एम्पावरिंग विमेन लीडर्स’ नामक विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किया है। 2026 जुलाई तक इस कार्यक्रम के तहत 1,53,616 महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिसमें सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश की महिलाओं की भागीदारी रही है।

वुमेन फ्रेंडली पंचायत का स्वरूप

महिला नेतृत्व को पंचायतों के विकास में जोड़ने के लिए ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ (SDGs) के स्थानीयकरण के तहत ‘वुमेन फ्रेंडली पंचायत’ की अवधारणा को शामिल किया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा, और सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जाए।

महिला प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण पर खर्च किया गया धन

महिला प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण के लिए अलग से कोई फंड आवंटित नहीं किया गया है, बल्कि RGSA के तहत जारी की गई राशि का उपयोग राज्य अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार करते हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 2,300.79 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, ताकि राज्य अपने विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

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