रील्स के दौर में शॉर्टकट से बचें युवा-पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन

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पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन; कहा– ‘रील्स’ के दौर में शॉर्टकट से बचें युवा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रेरणादायी आत्मकथा ‘Triumph of the Indian Republic: My Life,My Struggles’ (भारतीय गणराज्य की विजय: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष) का आधिकारिक रूप से विमोचन किया। राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह के दौरान इस पुस्तक को देश को समर्पित किया गया। इस विशेष अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) को जीवन में कभी भी शॉर्टकट न अपनाने की सख्त और व्यावहारिक सलाह दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया और रील संस्कृति के इस दौर में आगाह करते हुए कहा कि “शॉर्टकट आपको छोटा कर देगा” (Shortcuts will cut you short), इसलिए युवाओं को दूसरों के वास्तविक जीवन के संघर्षों और आत्मकथाओं से सीख लेनी चाहिए।

कार्यक्रम मे उपस्थित गणमान्य

रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित यह आत्मकथा पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कानपुर देहात के एक छोटे से गांव से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद ‘राष्ट्रपति भवन’ तक पहुँचने के असाधारण और कठिन सफर को समेटे हुए है। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश, कई केंद्रीय मंत्री और गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।

‘रील’ के दौर में ‘शॉर्टकट’ से बढ़ सकते हैं नुकसान: प्रधानमंत्री की चेतावनी

विज्ञान भवन में एकत्रित जनसमूह और देश के युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा ध्यान आज की डिजिटल संस्कृति और युवाओं की जीवनशैली पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय ‘रील्स’ और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का है, जो युवाओं को अक्सर एक आभासी और आसान दुनिया की ओर ले जाते हैं। उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर लिखी जाने वाली एक पुरानी और बेहद सटीक चेतावनी को याद करते हुए युवाओं से कहा:”आज के शॉर्टकट वाले दौर में हमें रेलवे स्टेशनों पर लिखी एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि ‘शॉर्टकट आपको छोटा कर देगा’ (Shortcuts will cut you short)। यदि आप जीवन में वास्तव में कुछ बड़ा और स्थायी हासिल करना चाहते हैं, तो संघर्षों का कोई विकल्प नहीं है। सोशल मीडिया की रील्स आपको तात्कालिक संतुष्टि तो दे सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक सफलता केवल कड़े परिश्रम और दृढ़ संकल्प से ही आती है।”

पीएम ने की अपील

प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे सतही डिजिटल कंटेंट से परे हटकर महापुरुषों और सफल व्यक्तित्वों की आत्मकथाओं को पढ़ें। उन्होंने कहा कि यदि युवा किसी के जीवन को करीब से जानना चाहते हैं, तो उन्हें उनकी ऑटोबायोग्राफी पढ़नी चाहिए ताकि वे उस दौर, उन परिस्थितियों और चुनौतियों को समझ सकें जिससे गुजरकर कोई व्यक्ति महान बनता है।

कोविंद का संघर्ष: ‘भारतीय लोकतंत्र की सामूहिक विजय’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुस्तक के शीर्षक ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक’ (भारतीय गणराज्य की विजय) की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भले ही इस पुस्तक में वर्णित संघर्ष रामनाथ कोविंद जी के निजी जीवन के हैं, लेकिन इन संघर्षों के बाद जो ऐतिहासिक सफलता मिली, वह वास्तव में भारत के लोकतंत्र और हमारे गणराज्य की सामूहिक विजय है। मोदी ने भावुक होते हुए कहा:”कोविंद जी का जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत के संविधान और लोकतंत्र में कितनी ताकत है। यह देश की लोकतांत्रिक प्रणालियों की खूबी है कि एक अत्यंत साधारण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी अपनी योग्यता, सिद्धांतों और कड़े परिश्रम के बल पर देश के 14वें राष्ट्रपति के पद को सुशोभित कर सकता है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि रामनाथ कोविंद की यह आत्मकथा आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक बेहद मूल्यवान और ऐतिहासिक धरोहर (Legacy) साबित होगी, जिससे आने वाली कई पीढ़ियां मार्गदर्शन प्राप्त करेंगी।

जब भावुक हुए पीएम मोदी: कोविंद जी की मातृ-वियोग की घटना का किया जिक्र

भाषण के दौरान एक अत्यंत भावुक क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनाथ कोविंद के बचपन की एक अत्यंत दुखद और दर्दनाक घटना का उल्लेख किया, जिसका जिक्र कोविंद जी ने अपनी पुस्तक में भी किया है। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने बचपन को याद करते हुए लिखा था कि किस प्रकार गर्मियों के दिनों में उनके कच्चे घर में अचानक आग लग गई थी। उस समय उनकी माता जी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए घर के गृहस्थी के सामान और बच्चों की आवश्यकताओं की चीजें बचाने का प्रयास किया, जिसके कारण वे आग की लपटों की चपेट में आ गईं और उनका असामयिक निधन हो गया।

पीएम मोदी ने याद किया अतीत

इस घटना को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी दिवंगत माता जी को भी याद किया और कहा:”जरा सोचिए, इतनी कम उम्र में ऐसी भीषण त्रासदी का सामना करना, अपनी आंखों के सामने अपनी मां को खो देना कितना आत्मघाती और असहनीय रहा होगा। मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मेरी मां 100 वर्षों से अधिक समय तक जीवित रहीं और मुझे उनका निरंतर आशीर्वाद मिलता रहा, इसके बावजूद आज भी मुझे अपनी मां की कमी बहुत खलती है। कोविंद जी ने तो बचपन में ही इस असहनीय दर्द को झेला। यह एक ऐसा वज्रपात था जो किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ सकता था, लेकिन कोविंद जी ने इन विपरीत और कठिन परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। इन मुश्किलों ने उन्हें और अधिक मजबूत, संवेदनशील और दृढ़ संकल्पी बनाया।”

राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र सेवा में निरंतर सक्रिय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की कर्तव्यनिष्ठा और सादगी की सराहना करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च पद से मुक्त होने के बाद भी वे शांत नहीं बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कोविंद जी आज भी देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक और नीतिगत विषयों पर सक्रियता से काम कर रहे हैं। विशेष रूप से देश के एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुधार ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) की उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष के रूप में वे लगातार देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए जुटे हुए हैं। मोदी ने कहा कि भारत को भविष्य में कोविंद जी जैसे और अधिक युवाओं और व्यक्तित्वों की आवश्यकता है जो विषम परिस्थितियों से कभी न डरें।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संबोधन: “राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का उपकरण है”

विमोचन कार्यक्रम के दौरान पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अत्यंत भावुक नजर आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और समारोह में आए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कोविंद जी ने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के एक बेहद पिछड़े और छोटे से गांव ‘परौख’ से आता हूं। बचपन में हमारा घर कच्चा था, जिसकी छत से बारिश का पानी टपकता था और मेरा पूरा परिवार बारिश थमने का इंतजार करता था।”उन्होंने वर्तमान सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज मुझे यह देखकर अत्यंत संतोष और खुशी होती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से देश के करोड़ों गरीब परिवारों को पक्की छत और पक्के मकान मिले हैं, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति ने दिया शिक्षा पर जोर

कोविंद जी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही वह चाबी है जो जीवन में असीमित संभावनाओं और नए रास्तों के द्वार खोलती है। राजनीति और सार्वजनिक जीवन में अपने सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:”मेरे लिए राजनीति कभी भी महज सत्ता हथियाने का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह देश, समाज और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करने का एक पवित्र उपकरण है। मैंने सदैव राष्ट्र को किसी भी वंश, जाति या समुदाय से ऊपर रखा है और यही मूल्य मेरी इस आत्मकथा की आत्मा हैं।”

गणमान्य अतिथियों ने बांधे तारीफों के पुल

समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दृढ़ संकल्प और सादगी का “जीवंत रेखाचित्र” बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में कोविंद जी ने न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के राजनयिक संबंधों को एक नई ऊंचाई और मजबूती प्रदान की।

पुस्तक अंग्रेजी में उपलब्ध

‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक’ पुस्तक वर्तमान में अंग्रेजी भाषा में पाठकों के लिए उपलब्ध हो चुकी है और प्रकाशकों के अनुसार, अगले महीने तक इसका हिंदी संस्करण भी देश के बुकस्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक आधुनिक भारतीय राजनीति, दलित चेतना के उभार, और एक साधारण नागरिक के शीर्ष पद तक के सफर को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी।

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