बंगाल में बदलाव तय? दिलीप घोष का बड़ा दावा!

The CSR Journal Magazine

बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज है, The CSR Journal की टीम ग्राउंड पर उतरकर जनता का मूड टटोलने की कोशिश कर रही है। इस बीच बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा कैंडिडेट दिलीप घोष से खास बातचीत की हमारे कोलकाता संवाददाता उज्वल रॉय ने।

प्रश्न – पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा एक प्रमुख मुद्दा रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि एक दबंग नेता इसके खिलाफ खड़े हुए हैं। आज हमारे साथ हैं दिलीप घोष। उनसे पहला सवाल, इस बार आप इसके खिलाफ कैसे लड़ेंगे?

उत्तर – इस बार हिंसा कम है। हिंसा नहीं होगी तो तृणमूल नहीं रहेगा। चुनाव आयोग चुनौती लेकर चुनाव करा रहा है और केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं। शुरू में धमकी दी गई, डराने की कोशिश हुई। तृणमूल ने मारपीट की। लेकिन आयोग ने कड़े कदम उठाए, जिससे फर्क पड़ा। गुंडे और राज्य की पुलिस वोट को प्रभावित करते हैं, डर का माहौल बनाते हैं। इसे ठीक कर दिया जाए तो सब ठीक हो जाएगा।

प्रश्न – वोट को लेकर आपकी रणनीति क्या है?

उत्तर – मैं इस बार बदलाव चाहता हूँ और बंगाल के लोग इसके लिए तैयार हैं। शांतिपूर्ण चुनाव होगा और तृणमूल हारेगी।

प्रश्न – तृणमूल का कहना है कि उनका संगठन जमीनी स्तर तक मजबूत है, जो बीजेपी के पास नहीं है। तो आप बूथ स्तर तक कैसे लड़ेंगे?

उत्तर – तृणमूल कहाँ है? गुंडों को अंदर कर दो तो तृणमूल खत्म। कुछ ठेकेदार, बिल्डर, पुलिस और गुंडे—यही तृणमूल है। उनके कार्यकर्ता हार के डर से घर में बैठे हैं। पुलिस उन्हें मैदान में आने को कहती है और हमारे कार्यकर्ताओं को काम करने पर धमकाया जाता है। यही उनका चुनाव है। इसलिए इस बार वे सफल नहीं होंगे।

प्रश्न – चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर आपका कितना भरोसा है?

उत्तर – पूरा भरोसा है। चुनाव आयोग पूरे देश में चुनाव कराता है और इस बार बंगाल में चुनौती लेकर काम कर रहा है। लोग खुश हैं। चुनाव आयुक्त को काले झंडे दिखाए गए, “गो बैक” कहा गया, डराने की कोशिश हुई, लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा।

प्रश्न – यह प्रचार किया जा रहा है कि बीजेपी सत्ता में आई तो बंगालियों को उनका प्रिय मछली-भात खाने नहीं दिया जाएगा।

उत्तर – अब राजनीति में मछली भी आ गई? बंगाली तो दाल-भात, मछली-भात खाते हैं। धान उगाने वाले किसान मर रहे हैं। मछली आंध्र प्रदेश से लानी पड़ती है। यहाँ क्यों नहीं हो सकती? आत्मनिर्भर क्यों नहीं हैं? धान का उचित मूल्य क्यों नहीं मिलता? आलू किसान आत्महत्या क्यों करते हैं? पहले इन सवालों के जवाब चाहिए।

प्रश्न – एक और सवाल उठता है कि बीजेपी बंगालियों की पार्टी नहीं है, बाहर से आई है और बंगाली संस्कृति को नहीं जानती।

उत्तर – श्यामा प्रसाद मुखर्जी क्या बाहर से आए थे? दिलीप घोष? हमारे सभी अध्यक्ष और विधायक यहीं के हैं। हम किसी को गुजरात, बिहार या उत्तर प्रदेश से नहीं लाते। वे (तृणमूल) मुस्लिम वोट लेते हैं, मुस्लिमों की बात करते हैं, लेकिन बंगाली मुस्लिम पर भरोसा नहीं करते। जीतने के लिए गुजरात से मुस्लिम उम्मीदवार लाना पड़ा।

प्रश्न – चुनाव परिणाम को लेकर आपकी भविष्यवाणी क्या है?

उत्तर – बीजेपी अकेले सत्ता में आएगी। बदलाव होगा और बंगाल के लोगों के जीवन में परिवर्तन आएगा।

प्रश्न – बंगाल में जीतने के बाद बीजेपी क्या करेगी?

उत्तर – जो पूरे देश में किया है वही करेगी। मुफ्त राशन दे रही है, घर बना रही है, जरूरत की हर चीज दे रही है। सबको शिक्षा, मिड-डे मील, महिलाओं की सुरक्षा—यहाँ तो कुछ भी नहीं है। सब कुछ नए सिरे से होगा, बीजेपी के नेतृत्व में।

हम बात कर रहे थे दिलीप घोष से। उनका कहना है कि जब ईवीएम खुलेंगे तो सरकार बदल जाएगी और राज्य में एक नया सूरज उगेगा।

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