योगी सरकार का भूमाफियाओं पर प्रहार, 2.08 लाख एकड़ जमीन कब्जामुक्त

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ योगी सरकार ने एंटी भूमाफिया अभियान को लगातार तेज किया है। इसके लिए राज्य, मंडल, जिला और तहसील स्तर पर एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टीम अवैध कब्जों की पहचान से लेकर जमीन खाली कराने तक कार्रवाई करती है। शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज कराने और उन पर हुई कार्रवाई की निगरानी के लिए एंटी भू-माफिया पोर्टल भी बनाया गया है। इससे शिकायत मिलने से लेकर उसके निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।

4.34 लाख शिकायतें मिलीं, 99 प्रतिशत से ज्यादा का निस्तारण

राजस्व विभाग के अनुसार एंटी भू-माफिया पोर्टल पर अब तक अवैध कब्जे से जुड़ी 4,34,016 शिकायतें मिली हैं। इनमें से 4,31,697 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। यानी 99 प्रतिशत से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। फिलहाल 2,319 शिकायतें लंबित हैं। सरकार का जोर केवल जमीन को कब्जामुक्त कराने तक सीमित नहीं है। शिकायतों की ऑनलाइन निगरानी और कार्रवाई की स्थिति को ट्रैक करने की व्यवस्था से अभियान में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की गई है।

2 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन हुई कब्जामुक्त

एंटी भूमाफिया अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि 84,005 हेक्टेयर से अधिक जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराना है। यह क्षेत्रफल करीब 2.08 लाख एकड़ के बराबर है। कब्जामुक्त हुई जमीन का इस्तेमाल भविष्य में विकास योजनाओं के लिए किया जा सकता है। सरकारी जमीन का व्यवस्थित लैंडबैंक तैयार होने से उद्योग, बुनियादी ढांचे और दूसरी बड़ी परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

भूमाफियाओं पर मुकदमे से लेकर जेल तक की कार्रवाई

अवैध कब्जों के मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी शिकंजा भी कसा गया है। अभियान के तहत 25,068 राजस्व वाद, 1,168 सिविल वाद और 4,751 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। वहीं 1,413 लोगों को भूमाफिया के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें से 144 भूमाफिया फिलहाल जेल में बंद हैं। अलग-अलग कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई है। इनमें गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई शामिल है।

जमीन मिलेगी तो बढ़ेगा निवेश और रोजगार

अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन को भविष्य में लैंडबैंक के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल औद्योगिक इकाइयों, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्युटिकल परियोजनाओं, लॉजिस्टिक पार्क, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और दूसरी बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है। इससे निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान होने के साथ प्रदेश में नए उद्योग लगाने की राह भी खुल सकती है। जमीन की उपलब्धता बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

भूमाफियाओं पर कार्रवाई का अब दिखेगा असर

योगी सरकार का एंटी भूमाफिया अभियान अब सिर्फ अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई नहीं रह गया है। ऑनलाइन शिकायतों की निगरानी, कानूनी कार्रवाई और कब्जामुक्त जमीन के संभावित इस्तेमाल को जोड़कर इसे विकास से भी जोड़ा जा रहा है। 84 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की उपलब्धता आने वाले समय में प्रदेश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए अहम साबित हो सकती है।

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