PM मोदी ने अनुच्छेद 370 हटने की 7वीं वर्षगांठ पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया याद

The CSR Journal Magazine

कश्मीर की यात्रा का एक नया अध्याय: PM मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाने की 7वीं वर्षगांठ मनाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से अनुच्छेद 370 और 35(A) को हटाए जाने की 7वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है और इसे दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा में एक “निर्णायक और नया अध्याय” करार दिया है। बुधवार, 5 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी अपने एक विशेष संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को लिए गए इस युगांतकारी फैसले के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के आम नागरिकों के जीवन में व्यापक और सकारात्मक बदलाव आए हैं। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) और खेलों में आए अभूतपूर्व उछाल को इस ऐतिहासिक निर्णय की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

यह वर्षगांठ इसलिए भी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह वर्ष देश के महान सपूत और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का वर्ष भी है। पीएम मोदी ने भावुक होकर याद किया कि डॉ. मुखर्जी ने दशकों पहले राष्ट्रीय एकता और ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान और एक निशान’ का जो सपना देखा था, उसे 5 अगस्त 2019 को पूर्ण ऐतिहासिक सिद्धि मिली।

कश्मीर की विकास यात्रा के मुख्य स्तंभ और बदलाव

पिछले सात वर्षों (2019-2026) के दौरान जम्मू-कश्मीर ने आतंकवाद और अलगाववाद के काले दौर से निकलकर शांति और समृद्धि की ओर एक लंबा सफर तय किया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों और प्रधानमंत्री के वक्तव्य के अनुसार, घाटी में आए बदलावों को मुख्य रूप से निम्नलिखित स्तंभों के माध्यम से समझा जा सकता है।

संवैधानिक अधिकारों का पूर्ण विस्तार और सामाजिक न्याय

अनुच्छेद 370 के प्रभावी होने के दौरान भारत के कई प्रगतिशील कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे। पिछले सात वर्षों में भारतीय संविधान के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वहां सामाजिक न्याय की नई बयार बही है।

महिलाओं को अधिकार

घाटी की जिन बेटियों को राज्य से बाहर शादी करने पर पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित कर दिया जाता था, उन्हें अब पूर्ण कानूनी और संपत्ति अधिकार मिल चुके हैं।

वंचित समुदायों का सशक्तिकरण

दशकों से वहां रह रहे वाल्मीकि, दलित, गोरखा और पश्चिमी पाकिस्‍तानी शरणार्थियों को पहली बार नागरिकता, डोमिसाइल और मुख्यधारा की नौकरियों के समान संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुए हैं।

केंद्रीय कानूनों का क्रियान्वयन

बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, शिक्षा का अधिकार (RTE) और भूमि सुधार जैसे महत्वपूर्ण केंद्रीय कानून अब वहां पूरी तरह प्रभावी हैं।

आतंकवाद में रिकॉर्ड गिरावट और सुरक्षा ग्रिड का सुदृढ़ीकरण

सुरक्षा के मोर्चे पर जम्मू-कश्मीर ने एक बड़ी छलांग लगाई है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, 2018 की तुलना में घाटी में आतंकवादी घटनाओं में लगभग 95% की भारी कमी आई है। वर्ष 2018 में जहां आतंकी घटनाओं का आंकड़ा 228 था, वहीं 2025-2026 तक यह सिमटकर दहाई के आंकड़े (सिर्फ 12 मामलों) तक पहुंच गया। घाटी में अब पहले की तरह पत्थरबाजी, हड़ताल और पाकिस्तान प्रायोजित अलगाववादी बंद पूरी तरह से इतिहास बन चुके हैं। आज इस 7वीं वर्षगांठ के मौके पर भी पूरी घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद रखा गया है, और नेशनल हाईवे समेत सीमावर्ती इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा ग्रिड (Multi-layered security grid) मुस्तैद है।

बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी का महा-अभियान

घाटी को देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में जोड़े रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विकास हुआ है। ‘सोनमर्ग टनल’ जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज (चेनाब ब्रिज) ने कश्मीर की भौगोलिक दूरियों को मिटा दिया है।

स्मार्ट सिटी और वैश्विक पहचान

श्रीनगर को वैश्विक पटल पर बड़ी पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा श्रीनगर को UNESCO क्रिएटिव सिटी और वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे यहां के पारंपरिक हस्तशिल्प और कालीन उद्योग को वैश्विक बाजार मिला है।

पर्यटन और आर्थिक समृद्धि का नया रिकॉर्ड

शांति बहाली का सीधा असर जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी ‘पर्यटन’ पर पड़ा है।वर्ष 2024 में जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड 2.3 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने अपनी आमद दर्ज कराई थी। वर्ष 2026 में भी धार्मिक पर्यटन अपने चरम पर है, जहां माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए 50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा पूरी की। डल  झील के किनारे सांस्कृतिक आकर्षणों का विकास किया गया है और G-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के बाद वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है।

राजनीतिक हलचल: जश्न और विरोध के सुर

एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार इस दिन को ‘एकता दिवस’ और विकास के महापर्व के रूप में मना रही है, वहीं घाटी की स्थानीय राजनीति में इसके विरोध के सुर भी सुनाई दे रहे हैं। श्रीनगर के जवाहर नगर स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री अशोक कौल और युवा कार्यकर्ताओं ने केक काटकर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। युवा कार्यकर्ताओं द्वारा पंथा चौक से लाल चौक तक एक विशाल बाइक रैली निकालने की योजना भी बनाई गई थी। भाजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि अनुच्छेद 370 बीते दौर की बात हो चुकी है और इसके हटने से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प पूरा हुआ है।

स्थानीय दलों का विरोध

इसके विपरीत, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला तथा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस दिन विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर रॉबर्ट फ्रॉस्ट की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां साझा करते हुए कहा, “सात साल बीत गए हैं, लेकिन हम इन परिस्थितियों को न तो भूले हैं और न ही हमने इन्हें दिल से स्वीकार किया है। हम जम्मू-कश्मीर के छीने गए अधिकारों और पहचान की बहाली के लिए संवैधानिक रूप से लड़ते रहेंगे।”

पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग

नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य विपक्षी दलों ने मांग की है कि केंद्र सरकार संसद में किए गए अपने वादे को जल्द से जल्द पूरा करे और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (Restoration of Statehood) बहाल करे।

“विकसित भारत” का नया संकल्प

इस 7वीं वर्षगांठ के मौके पर देश के कई विचारकों और मुख्यमंत्रियों ने भी बधाई दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारतीय संप्रभुता का “स्वर्ण दिवस” बताते हुए कहा कि पिछले सात वर्षों में कश्मीर ने अस्थिरता से विकास की ओर एक ऐतिहासिक यात्रा तय की है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संबोधन के अंत में इस बात को दोहराया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रत्येक नागरिक के सपनों को पंख देने के लिए प्रतिबद्ध है।

विकसित भारत @2047 का महा-संकल्प

सरकार का लक्ष्य केवल शांति बनाए रखना नहीं, बल्कि कश्मीर के युवाओं को शिक्षा, खेलों और स्टार्ट-अप के माध्यम से देश के ‘विकसित भारत @2047‘ के महा-संकल्प में सबसे अग्रणी भागीदार बनाना है। निश्चित रूप से, सात साल पहले लिया गया यह संवैधानिक फैसला आज धरातल पर कश्मीरी समाज के हर वर्ग—विशेषकर युवाओं, महिलाओं और वंचितों के जीवन को संवार रहा है, जो यह साबित करता है कि कश्मीर अब अलगाव के अंधेरे को पीछे छोड़कर विकास के नए उजाले की ओर बढ़ चुका है।

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