भारतीय रेल का शाही गौरव: अल्ट्रा-लग्जरी प्रेसिडेंट स्पेशल से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक सफर

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राष्ट्रपति स्पेशल ट्रेन: एक ट्रेन आगे, एक पीछे.. और साथ में अल्ट्रा-लग्जरी प्राइवेट सलून! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की शानदार यात्रा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘प्रेसिडेंट स्पेशल’ ट्रेन से ऐतिहासिक सफर तय किया है, जिसमें एयर-कंडीशंड बेडरूम, लिविंग-कम-डाइनिंग रूम और किचन जैसी अत्याधुनिक अल्ट्रा-लग्जरी सलून सुविधाएं मौजूद थीं। देश की प्रथम नागरिक ने खराब मौसम के पूर्वानुमान के कारण हवाई यात्रा की जगह रेल मार्ग को चुना और 4 अगस्त 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर से बरहमपुर तक लगभग 170 किलोमीटर का सफर तय किया। इस विशेष यात्रा के लिए नई दिल्ली से विशेष 10 कोच वाली ‘प्रेसिडेंट स्पेशल’ ट्रेन मंगवाई गई थी, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद हाई-टेक और अभेद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस थी।

भारतीय रेल का शाही गौरव: अल्ट्रा-लग्जरी ‘प्रेसिडेंट स्पेशल’ से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक सफर

भारतीय रेल के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने गृह राज्य ओडिशा के तीन दिवसीय दौरे के दौरान ‘प्रेसिडेंट स्पेशल’ ट्रेन (President’s Special Train) से यात्रा कर न केवल संवैधानिक गरिमा को नई ऊंचाई दी, बल्कि भारतीय रेलवे की अद्वितीय परिचालन क्षमता का प्रदर्शन भी किया। मॉनसून की भारी बारिश और खराब मौसम की आशंका को देखते हुए राष्ट्रपति के काफिले के लिए अंतिम समय पर हवाई सफर के बजाय रेल मार्ग का चयन किया गया। भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से रवाना होकर यह विशेष ट्रेन लगभग 2 घंटे 10 मिनट में 170 किलोमीटर की दूरी तय कर बरहमपुर (ब्रह्मपुर) रेलवे स्टेशन पहुंची। इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति के साथ ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी सह-यात्री के रूप में मौजूद रहे। बरहमपुर पहुंचने वाली वह देश की पहली आसीन राष्ट्रपति बन गई हैं।

पहियों पर चलता फिरता राजमहल: कैसी हैं अल्ट्रा-लग्जरी सलून सुविधाएं?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस विशेष यात्रा के लिए जो विशेष रेक दिल्ली से विशेष तौर पर भुवनेश्वर भेजा गया था, वह किसी फाइव-स्टार लग्जरी होटल या शाही महल से कम नहीं है। इस ट्रेन के भीतर आधुनिक सुख-सुविधाओं और भारतीय संस्कृति के अद्भुत समन्वय वाले ‘प्राइवेट सलून’ (विशेष लग्जरी कोच) जोड़े गए थे।

शाही प्रेसिडेंशियल सुइट

इस निजी सुइट को अति-प्रतिष्ठित मेहमानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें भव्य सिल्क और मखमल के पर्दों के साथ आलीशान कालीन बिछाए गए हैं। सुइट के मुख्य हिस्से में दो विशाल एयर-कंडीशंड बेडरूम, एक अटैच्ड वॉशरूम और एक एक्सक्लूसिव लिविंग रूम है। मास्टर बेडरूम में आरामदायक डबल बेड और अंतरराष्ट्रीय मानकों के सैनिटरी फिटिंग्स वाले आधुनिक बाथरूम हैं।

लिविंग-कम-डाइनिंग लाउंज

सलून के भीतर एक बड़ा लाउंज एरिया है जहां बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। इसमें सोफा सेट, नक्काशीदार लकड़ी की मेज और उत्कृष्ट कलाकृतियां लगाई गई हैं। इसके साथ ही एक शाही डाइनिंग टेबल है, जहां राष्ट्रपति और उनके वीआईपी मेहमानों के लिए भोजन परोसने की व्यवस्था है।

अत्याधुनिक निजी किचन

ट्रेन के भीतर एक अत्याधुनिक पैंट्री और निजी किचन की सुविधा है। यहां फाइव-स्टार शेफ द्वारा राष्ट्रपति की पसंद और स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप ताजा भोजन तैयार किया जाता है। भोजन परोसने के लिए बेहतरीन चीनी मिट्टी (बोन चाइना) के बर्तनों और चांदी के चम्मचों का उपयोग किया जाता है।

पैनोरमिक विंडोज़ (बड़ी खिड़कियां)

ट्रेन में यात्रा के दौरान बाहर के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने के लिए विशेष रूप से बड़ी कांच की खिड़कियां लगाई गई हैं। इससे सफर के दौरान ओडिशा की हरी-भरी वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य का शानदार नजारा दिखाई देता है।

Wi-Fi और सैटेलाइट कनेक्टिविटी

राष्ट्रपति चलते-फिरते देश-दुनिया से जुड़ी रहें, इसके लिए ट्रेन में सुरक्षित सैटेलाइट संचार प्रणाली और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था की गई है, ताकि आपातकालीन स्थिति में आधिकारिक कार्य न रुके।

तीन ट्रेनों का बेजोड़ प्रोटोकॉल

प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन का परिचालन आम ट्रेनों की तरह नहीं होता। राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद कड़ा और त्रि-स्तरीय (Multi-tier) सुरक्षा घेरा तैयार किया था।
पायलट एस्कॉर्ट ट्रेन – ट्रैक क्लियर करती हुई आगे चलती है

मुख्य प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन – बीच में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मुख्य सलून कोच

रियर एस्कॉर्ट ट्रेन – सुरक्षा बलों और स्टैंडबाय उपकरणों के साथ पीछे चलती है।

आगे और पीछे सुरक्षा ट्रेनें

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति की मुख्य 10-कोच वाली ट्रेन के आगे एक ‘पायलट एस्कॉर्ट ट्रेन’ चल रही थी, जो ट्रैक की सुरक्षा की जांच करती जा रही थी। ठीक इसी प्रकार, मुख्य ट्रेन के पीछे एक और ‘रियर एस्कॉर्ट ट्रेन’ चल रही थी, जिसमें अतिरिक्त सुरक्षा बल और तकनीकी टीम तैनात थी।

ट्रैक का पूर्ण ब्लॉकेज

जिस समय राष्ट्रपति की ट्रेन ट्रैक पर दौड़ रही थी, उस पूरे रूट (भुवनेश्वर से बरहमपुर) पर किसी भी अन्य यात्री या मालगाड़ी के संचालन की अनुमति नहीं थी। पूरे ट्रैक को पूरी तरह से खाली और ‘लॉक्ड’ रखा गया था। भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 को पूरी तरह खाली कराकर केवल प्रेसिडेंट स्पेशल के लिए आरक्षित किया गया था। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस कमिश्नरेट के सैकड़ों जवानों ने पूरे स्टेशन को छावनी में बदल दिया था।

राष्ट्रपति का ‘ट्रेन प्रेम’ और पुराना इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ट्रेन से यात्रा की है। इससे पहले सितंबर 2025 में उन्होंने दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन तक की यात्रा के लिए विश्व प्रसिद्ध लग्जरी ट्रेन ‘महाराजा एक्सप्रेस’ को ‘प्रेसिडेंट स्पेशल’ के रूप में इस्तेमाल किया था। उस समय भी उन्होंने बांके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए रेल मार्ग चुना था। इसके अलावा, नवंबर 2023 में उन्होंने अपने पैतृक जिले मयूरभंज के बादामपहाड़ रेलवे स्टेशन से तीन नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई थी और स्वयं ट्रेन यात्रा की थी।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत की आजादी के बाद, देश के राष्ट्रपतियों के लिए एक विशेष ‘राष्ट्रपति सैलून’ (Presidential Saloon या ट्विन कार) हुआ करता था, जिसे 1956 में बनाया गया था। इसमें देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर कई राष्ट्रपतियों ने सफर किया। हालांकि, आधुनिक सुरक्षा आवश्यकताओं, हाई-स्पीड ट्रैकों की तकनीकी मांगों और राष्ट्रपति कार्यालय के निर्देश पर वर्ष 2024 में उस पारंपरिक लकड़ी के नक्काशीदार ऐतिहासिक सैलून को सेवामुक्त कर नेशनल रेल म्यूजियम (नई दिल्ली) में आम जनता के देखने के लिए संरक्षित कर दिया गया। अब राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए भारतीय रेलवे की सबसे आधुनिक ICF या IRCTC की अल्ट्रा-लग्जरी महाराजा एक्सप्रेस के रेक को विशेष रूप से तैयार किया जाता है।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्य से जुड़ी यात्रा

बरहमपुर पहुंचने के बाद, राष्ट्रपति मुर्मू का काफिला सड़क मार्ग से गंजम जिले में स्थित प्रसिद्ध तप्तपानी के जंगलों की ओर बढ़ा। तप्तपानी अपने प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों के लिए देश भर में विख्यात है। वहां राष्ट्रपति ने स्थानीय आदिवासी समुदायों की आस्था के प्रमुख केंद्र मां कंधुनी देवी मंदिर और भगवान शिव के प्राचीन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आरती की। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वहां वृक्षारोपण अभियान में भी हिस्सा लिया। सुरक्षा के मद्देनजर गंजम जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को ‘नो-फ्लाइंग’ और ‘नो-ड्रोन’ जोन घोषित किया था। राष्ट्रपति गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज में रात्रि विश्राम करने के बाद पुनः इसी विशेष ट्रेन से भुवनेश्वर लौटेंगी। भारतीय रेलवे के पहियों पर तैरती इस राजशाही व्यवस्था और राष्ट्रपति के इस सादगी व सुरक्षा से भरे सफर की तस्वीरें इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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