चारधाम यात्रा की शुरुआत पर दो श्रद्धालुओं की मृत्यु, एक गिरा, दूसरा बीमार

The CSR Journal Magazine
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के पहले दिन ही दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर चढ़ाई के दौरान महाराष्ट्र से आए 67 वर्षीय उत्साही श्रद्धालु उदम ताम्बे की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके परिवार के अनुसार, उन्हें सांस लेने में गंभीर दिक्कत का सामना करना पड़ा। उन्हें तुरंत जानकीचट्टी के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक डॉ. हरदेव सिंह के अनुसार, मौत का कारण सांस संबंधी बीमारी और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी माना जा रहा है।

घोड़े से गिरी महिला श्रद्धालु

दूसरी घटना यमुनोत्री पैदल मार्ग पर हुई, जहां 40 वर्षीय प्रतिमा मिश्रा अपने पति के साथ यात्रा पर निकली थीं। इंदौर से आईं प्रतिमा, 19 कैंची के पास घोड़े से गिर गईं, जिससे उन्हें सिर में गंभीर चोट आई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया। पति धर्मेन्द्र मिश्रा के साथ यात्रा पर आईं प्रतिमा ने इस यात्रा के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जानकारी के अनुसार, उन्हें भी जानकीचट्टी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।

यात्रा के लिए प्रशासन की सलाह

चारधाम यात्रा के शुरू होने के बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं को विशेष सलाह दी है। एसएचओ सुभाष चंद ने कहा कि ऊंचाई पर जाने से पहले स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं, खासकर ऐसे लोग जो सांस, दमा या हृदय रोग से पीड़ित हैं। प्रशासन ने यह भी सुझाव दिया कि यात्रा के दौरान जल्दी न करें और बीच-बीच में आराम लें, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। श्रद्धालुओं को अपना स्वास्थ्य विशेष रूप से ध्यान में रखने की अपील की गई है।

चारधाम यात्रा का महत्त्व

चारधाम यात्रा भारतीय श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट जैसे चर्चित स्थल, श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र हैं। चारधाम यात्रा की शुरुआत पर 2,000 से अधिक यात्रियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 20 अप्रैल 2026 को खोले गए थे। इससे पहले, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट पिछले साल बंद हुए थे।

जानिए केदारनाथ और बद्रीनाथ का समय

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि के अवसर पर तय की गई थी। वहीं, बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजे भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इस बार यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को पहले से ज्यादा सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यात्रा के दौरान सड़क की स्थिति और मौसम की जानकारी पर ध्यान देने का सुझाव दिया गया है।

ध्यान रखें सावधानियां

श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। ऊंचाई के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों से बचने के लिए आवश्यक रूप से आराम करें। प्रशासन का मानना है कि अगर श्रद्धालुगण अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे तो ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सकता है। चारधाम यात्रा का माहौल भक्ति और श्रद्धा से भरा

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