बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी कांड: आरोपी प्रमोद नौटियाल देहरादून से गिरफ्तार

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Badrinath Dham Donation Case: प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी ने बढ़ाई विवाद की गर्माहट

बद्रीनाथ धाम में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले चढ़ावा और दान चोरी मामले में उत्तराखंड पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ी सफलता मिली है। चमोली पुलिस ने फरार चल रहे श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष के निलंबित निजी सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल को देहरादून स्थित उसके आवास से देर रात गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर चमोली पुलिस और एसआईटी पूछताछ के लिए बद्रीनाथ ले आई है। इस महाघोटाले के सामने आने के बाद से ही देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों, स्थानीय हक-हकूकधारियों और धार्मिक संगठनों में भारी आक्रोश का माहौल व्याप्त है।

बद्रीनाथ धाम दान हेराफेरी प्रकरण

भू-वैकुंठ के नाम से प्रसिद्ध और हिंदुओं के पवित्र चार धामों में से एक, बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री विशाल के चरणों में अर्पित किए जाने वाले श्रद्धालुओं के दान में सेंधमारी का बेहद संवेदनशील मामला गरमाया हुआ है। मंदिर समिति के एक रसूखदार कर्मचारी द्वारा ही भगवान के खजाने में हेराफेरी करने की घटना ने पूरे उत्तराखंड समेत देश के धार्मिक हलकों को झकझोर कर रख दिया है। मामले की गंभीरता और चौतरफा दबाव के बीच 13 जुलाई 2026 को आखिरकार मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी सुनिश्चित हो पाई है।

कैसे हुआ महाघोटाले का भंडाफोड़?

यह पूरा विवाद 2 जुलाई 2026 को मंदिर परिसर के भीतर दानपात्रों और लिफाफों से प्राप्त चढ़ावे की आधिकारिक गिनती के दौरान शुरू हुआ। बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा गुप्त दान, नकदी, सोने-चांदी के सिक्के और बहुमूल्य सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर समिति के अधिकारियों की देखरेख में समय-समय पर इस दान राशि की गणना की जाती है। इस बार गणना के दौरान कुछ विसंगतियां और वित्तीय अनियमितताएं नोटिस की गईं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में चर्चाएं और आरोप तेज हो गए। स्थानीय हिंदूवादी संगठन ‘भैरव सेना’ ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया और मामले की उच्चस्तरीय जांच के साथ-साथ पुलिस में प्राथमिक दर्ज कराने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया।

CCTV फुटेज ने खोली पोल

मामले को तूल पकड़ता देख बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) हरकत में आई। जब मंदिर प्रबंधन ने गणना कक्ष (Donation Counting Room) में लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू किया, तो वहां मौजूद अधिकारी दंग रह गए। SIT और पुलिस जांच दल के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग में आरोपी प्रमोद नौटियाल की गतिविधियां पूरी तरह से संदिग्ध पाई गईं। आरोपी नौटियाल दान की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे में बार-बार आ और जा रहा था। वह सीसीटीवी फुटेज में गणना कक्ष से नकदी के बंडल, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी के सिक्के, सीलबंद लिफाफे और यहां तक कि पवित्र शालिग्राम शिला (पत्थर) को छिपाते हुए और वहां से चुराते हुए साफ तौर पर देखा गया।

कार्यालय का इस्तेमाल

कमरे से कीमती सामान और नकदी निकालने के तुरंत बाद वह सीधे अपने निजी दफ्तर की ओर रुख करता था, जिससे पुलिस को मजबूत संदेह हुआ कि उसने चुराई गई संपत्ति को वहीं ठिकाने लगाया था। इन पुख्ता विजुअल साक्ष्यों के आधार पर BKTC के मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण ने बद्रीनाथ थाने में आरोपी के खिलाफ लिखित तहरीर दी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की प्रासंगिक धाराओं (मुख्यतः चोरी और आपराधिक विश्वासघात) के तहत मुकदमा पंजीकृत किया।

मुख्यमंत्री धामी का सख्त रुख और ‘SIT’ का गठन

चूंकि मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक से जुड़ा हुआ था, इसलिए उत्तराखंड की राज्य सरकार ने इस पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए इसे ‘गोहत्या’ जैसा महापाप करार दिया। सीएम धामी ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की कि देवभूमि के पवित्र धामों की शुचिता और गरिमा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो। मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद सरकार और प्रशासन ने दोहरी कार्रवाई शुरू की।

एसआईटी (SIT) का गठन

चमोली पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सुरजीत सिंह पंवार के निर्देशन में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया, जिसकी कमान अनुभवी जांच अधिकारी महादेव उनियाल को सौंपी गई। सरकार ने गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की, जिसे मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक लूपहोल्स की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। बीकेटीसी की चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति  द्वारा शुरुआती आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद 7 जुलाई 2026 को ही प्रमोद नौटियाल को पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

देहरादून से नाटकीय गिरफ्तारी

FIR दर्ज होने और विभागीय निलंबन के बाद से ही आरोपी प्रमोद नौटियाल गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। वह चमोली पुलिस की पहुंच से दूर भागकर देहरादून में छिपा हुआ था। चमोली पुलिस और एसआईटी की सर्विलांस टीम ने आरोपी के मोबाइल लोकेशन और खुफिया इनपुट के आधार पर देहरादून में उसके आवास की घेराबंदी की। रविवार (12 जुलाई) की देर रात एसआईटी ने छापेमारी कर नौटियाल को दबोच लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से एक व्यक्तिगत लैपटॉप और एक गायब हुई शालिग्राम शिला भी बरामद की गई है, जिसे केस प्रॉपर्टी के रूप में जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब आरोपी को स्थानीय कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने चुराई गई नकदी और अन्य आभूषण कहां छिपाए हैं।

श्रद्धालुओं और स्थानीय संगठनों में उबाल

बद्रीनाथ धाम के भीतर ही भगवान के चढ़ावे की इस तरह खुलेआम चोरी होने की खबर जैसे ही फैली, बद्रीनाथ से लेकर पूरे उत्तराखंड और सोशल मीडिया तक लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने आए तीर्थयात्रियों का कहना है कि वे पेट काटकर और अपनी गाढ़ी कमाई से भगवान बद्री विशाल के चरणों में श्रद्धापूर्वक दान अर्पित करते हैं। अगर मंदिर समिति के अधिकारी और रसूखदार कर्मचारी ही इस तरह की नीच हरकत करेंगे, तो भक्तों का व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।

तीर्थ पुरोहितों का विरोध

बद्रीनाथ के स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि इस घटना से वैश्विक स्तर पर बद्रीनाथ धाम की छवि धूमिल हुई है। उन्होंने मांग की है कि इस घोटाले में शामिल अन्य संभावित चेहरों को भी बेनकाब किया जाए, क्योंकि अकेले एक व्यक्ति के दम पर इतने बड़े स्तर पर हेराफेरी करना मुमकिन नहीं लगता।

राजनीतिक सरगर्मियां और न्यायिक लड़ाई

इस मामले ने अब उत्तराखंड में राजनीतिक रंग भी ले लिया है। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और भूमि खरीद से जुड़े कथित विवादों के बाद बद्रीनाथ धाम में सामने आए इस गबन को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस राज्य की भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई है।उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इस पूरे मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) या फिर उत्तराखंड विधानसभा की एक संयुक्त समिति (JPC) से जांच कराने की मांग की है।

मामले पर चढ़ा राजनीतिक रंग

कांग्रेस का आरोप है कि मंदिर समितियों में मनमाने ढंग से राजनीतिक नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे इस तरह के भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। दूसरी ओर, आरोपी प्रमोद नौटियाल ने खुद को निर्दोष बताते हुए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। उसने अपने निलंबन और बद्रीनाथ थाने में दर्ज FIR को अवैध बताते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल) में चुनौती दी है। नौटियाल का दावा है कि उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और विभागीय राजनीति के कारण उसकी छवि खराब की जा रही है।

शुचिता और पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा

बद्रीनाथ धाम दान चोरी प्रकरण ने एक बार फिर देश के बड़े धार्मिक स्थलों और ट्रस्टों के वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और सुरक्षा ऑडिट पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी इस जांच का अंत नहीं बल्कि शुरुआत मानी जा रही है। एसआईटी अब इस कोण से भी जांच कर रही है कि क्या इस गबन के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था या मंदिर समिति के कुछ अन्य रसूखदार अधिकारी भी इस काले खेल में मूकदर्शक या हिस्सेदार बने हुए थे। देवभूमि उत्तराखंड की जनता और दुनिया भर के सनातनी श्रद्धालु अब इस मामले में त्वरित और पारदर्शी न्याय की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति भगवान के खजाने और जनता की आस्था पर डाका डालने का दुस्साहस न कर सके।

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