छात्रों पर लाठीचार्ज: राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार को किया घेराबंदी

The CSR Journal Magazine
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों के संसद चलो अभियान के दौरान लाठीचार्ज की घटना ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना के बाद सरकार को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया है। दोनों नेताओं ने NEET परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और छात्रों के उत्पीड़न पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी की सरकार सबसे युवा-विरोधी बन चुकी है, जो शिक्षा मंत्री का इस्तीफा तक नहीं मांग सकती।”

राहुल का करारा जवाब

राहुल गांधी ने लिखा कि पिछले समय में 152 पेपर लीक हुए हैं और 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन छात्रों को जो दंड मिला है, वह पूरी तरह से अनुचित है। राहुल ने लाठीचार्ज के संबंध में कहा, “जब इन बच्चों ने शिक्षा के मद्दों पर सवाल उठाया, तो उन्हें लाठियों का सामना करना पड़ा।” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह सिर्फ छात्रों को नाकाम नहीं कर रही, बल्कि उन पर सीधा हमला कर रही है।

अखिलेश यादव का प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर तीखा हमला करते हुए कहा कि छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा, “यह सरकार NEET परीक्षा कराने में असफल रही है, जिसमें बीजेपी के लोग शामिल हैं।” अखिलेश ने एक ट्वीट में लिखा, “निराशा के समय आंख का पानी जब समुंदर बन जाता है, तब इंकलाब आता है।” इस तरह की प्रतिक्रिया ने विपक्षी नेताओं के बीच एकता को प्रकट किया है।

शशि थरूर ने साधा निशाना

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी लाठीचार्ज की निंदा की। उन्होंने कहा, “इस तरह की कार्रवाई बहुत दुखद है। जब विरोध शांतिपूर्ण हो रहा हो, तो लाठीचार्ज का क्या औचित्य है?” थरूर ने सरकार से अपील की कि उन्हें संसद में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की आवश्यकता है।

विपक्ष की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं

विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि संसद में मुद्दों पर चर्चा नहीं होने से जनता की आवाज़ दबाई जा रही है। शशि थरूर ने कहा कि सरकार को अपनी “बड़ी मेजोरिटी” का इस्तेमाल कर संसद में छात्रों की आवाज़ सुननी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि जब सरकार खुद चर्चा से भागती है, तो इससे संकट पैदा होता है।

छात्रों के अधिकारों का सवाल

लाठीचार्ज की इस घटना ने छात्रों के अधिकारों पर सवाल खड़ा कर दिया है। विपक्षी प्रतिक्रिया का यह सिलसिला दर्शाता है कि छात्र संगठनों की आवाज़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बहस का विषय यह है कि सरकार के खिलाफ उठ रहे सवालों का जवाब कैसे दिया जाएगा। इस मुद्दे ने राजनीतिक तनाव और बढ़ा दिया है, जो आने वाले समय में और भी गहराई पकड़ सकता है।

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