राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की साख एक बार फिर कटघरे में है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्राध्यापक कृषि विज्ञान भर्ती-2022 परीक्षा में पेपर लीक का बड़ा खुलासा हुआ है। एसओजी जांच में सामने आया कि आयोग के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने कथित तौर पर 60 लाख रुपए लेकर परीक्षा का पेपर बेचा था। मामले के खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया, चयन सूची और अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह मामला भी एसआई भर्ती-2021 की तरह बड़ा विवाद बनता नजर आ रहा है।
60 लाख में बिका परीक्षा का पेपर, कटारा ने कबूला सच
राजस्थान में पेपर लीक मामलों की जांच कर रही एसओजी को प्राध्यापक कृषि विज्ञान भर्ती-2022 परीक्षा में बड़ी सफलता मिली है। पूछताछ में आरपीएससी के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने कथित रूप से स्वीकार किया कि परीक्षा का पेपर 60 लाख रुपए में बेचा गया था। इस खुलासे ने आयोग की गोपनीय परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 पेपर लीक मामले में कटारा का नाम सामने आया था और उसे गिरफ्तार किया गया था। अब कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा का मामला जुड़ने से भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार का दायरा और बड़ा दिखाई दे रहा है।
एसओजी अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसमें कितने अभ्यर्थी शामिल थे।

54 पदों की भर्ती अब विवादों में
आरपीएससी ने प्राध्यापक कृषि विज्ञान भर्ती-2022 परीक्षा का आयोजन 11 अक्टूबर 2022 को किया था। भर्ती 54 पदों के लिए निकाली गई थी। सुबह सामान्य ज्ञान और दोपहर में कृषि विज्ञान विषय का पेपर हुआ था।
आयोग ने 14 जुलाई 2023 को पात्रता जांच सूची जारी की थी, जिसमें 101 अभ्यर्थियों को शामिल किया गया था। इसके बाद 13 दिसंबर 2023 को मुख्य चयन सूची जारी कर 50 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया, जबकि पांच अभ्यर्थियों के परिणाम रोक दिए गए थे। अब पेपर लीक खुलासे के बाद पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि परीक्षा से लेकर चयन सूची तक हर चरण की दोबारा जांच कराई जाए।
फर्जी डिग्रियों का भी खुला मामला
इस भर्ती परीक्षा में केवल पेपर लीक ही नहीं, बल्कि फर्जी डिग्रियों का मामला भी सामने आया है। जांच में पता चला कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने चूरू स्थित ओपीजीएस विश्वविद्यालय से बैक-डेट में जारी मार्कशीट और डिग्रियों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। शिकायत मिलने के बाद एसओजी ने दस्तावेजों की जांच शुरू की थी। अब एजेंसी आयोग से भर्ती से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांग रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं। यदि दस्तावेज फर्जी पाए गए तो चयन रद्द होने के साथ-साथ संबंधित अभ्यर्थियों पर आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।


