‘800 रुपए का एक अंडा!’ बिहार के शशि रंजन ने हंस पालन से कमाए लाखों

The CSR Journal Magazine

800 रुपये का एक अंडा! बिहार का ये किसान अपने अनोखे बिजनेस से कमा रहा लाखों

बिहार के दरभंगा जिले के जाले ब्लॉक के रहने वाले शशि रंजन कुमार ठाकुर ने पारंपरिक खेती से हटकर राजहंस (Swan) पालन के जरिए कमाई का एक शानदार और अनोखा मॉडल तैयार किया है। कोरोना महामारी के दौरान सूरत (गुजरात) की नौकरी छूटने के बाद गांव लौटे शशि रंजन ने यह कदम उठाया और आज वे इसके जरिए लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं

शशि रंजन की यात्रा

बिहार के शशि रंजन ने अपने अनोखे व्यवसाय से सबको चौंका दिया है। वे हंस पालन के जरिए लाखों रुपये कमा रहे हैं। आमतौर पर अनजान इस व्यवसाय ने उन्हें एक नया मुकाम हासिल करने में मदद की है। शशि का कहना है कि हंस पालन उनके लिए बहुत लाभकारी साबित हुआ।

कम लागत में अधिक लाभ

हंस पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बहुत कम लागत में शुरू किया जा सकता है। शशि रंजन का कहना है कि अगर गांव में तालाब, पोखर या कोई छोटा जलाशय हो, तो हंसों को आसानी से पाला जा सकता है। यह हंस ज्यादातर घास, कीड़े-मकोड़े और छोटी मछलियों का सेवन करते हैं। इससे उनके खाने पर खर्च बहुत कम आता है।

800 रुपये का अंडा

शशि रंजन के फार्म में उत्पादित राजहंस का एक अंडा ₹800 तक में बिकता है. यह कीमत बाजार में उच्च गुणवत्ता के अंडों के लिए होती है। उनका मानना है कि इस व्यवसाय में और भी संभावनाएँ हैं। अनुभव से पता चलता है कि हंसों की अंडे देने की क्षमता भी लॉन्ग टर्म में बेहतर हो सकती है। इस फार्म से राजहंस का एक जोड़ा (नर और मादा) ₹5,000 तक की कीमत पर बेचा जाता है।

मछली और हंस पालन का सफल मॉडल

उन्होंने अपने तालाब में मछली पालन के साथ राजहंस पालन को जोड़ा है। तालाब में तैरने वाले हंसों को अलग से ज्यादा फीड देने की जरूरत नहीं पड़ती। तालाब के प्राकृतिक स्त्रोत और संतुलित आहार से इनका खर्च बेहद कम रहता है। यह एक स्वच्छ और पूरी तरह से प्राकृतिक वातावरण पर आधारित फार्मिंग मॉडल है।

स्थानिक स्रोतों का लाभ

बिहार में रहने के कारण शशि को स्थानीय संसाधनों का भरपूर लाभ मिलता है। तालाबों से पानी और आसपास की हरियाली से हंसों को प्राकृतिक भोजन मिल जाता है। इससे शशि को दोनों ही खर्चों में कमी आती है और उनके हंस स्वस्थ रहते हैं।

व्यापार की संभावनाएँ

हंस पालन करने के बाद शशि ने अपनी आय में वृद्धि देखी है। वे इसे एक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुभव से अन्य किसान भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। ऐसे में यह व्यवसाय एक नई उम्मीद बनकर उभरा है।

कृषि में नया आयाम

हंस पालन ने बिहार के ग्रामीण कृषि क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित किया है। यह किसी भी किसान के लिए एक कम जोखिम वाला, लेकिन लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। शशि रंजन जैसे किसान इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रहे हैं।

समुदाय में बदलाव लाना

शशि का कहना है कि यदि अन्य किसान भी हंस पालन करना शुरू कर दें, तो यह उनके समुदाय में बदलाव ला सकता है। लोग अच्छी आय के साथ-साथ प्राकृतिक तरीके से अपने जीवन यापन को बेहतर कर सकते हैं। इससे गाँव की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।

सबक और प्रेरणा

शशि रंजन की कहानी यह साबित करती है कि यदि सही सोच और मेहनत का साथ हो, तो किसी भी व्यवसाय को सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने यह दिखाया है कि हंस पालन न केवल लाभकारी है, बल्कि यह एक स्थायी कृषि व्यवसाय के रूप में भी विकसित हो सकता है।

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