CBSE OSM विवाद: चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता हटाए गए, सरकार की बड़ी कार्रवाई

The CSR Journal Magazine

OSM विवाद: सरकार का बड़ा फैसला, CBSC अध्यक्ष और सचिव का तबादला

केंद्र सरकार ने सीबीएसई (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद पर बड़ा एक्शन लेते हुए बोर्ड के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। यह कदम कक्षा 12वीं के मूल्यांकन और डिजिटल पोर्टल में आई गंभीर गड़बड़ियों के बाद देश भर में उपजे आक्रोश के बाद उठाया गया है।

शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन पर गंभीर सवाल उठे

इस साल, सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लागू किया। इस प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों की कॉपियाँ स्कैन करके कंप्यूटर या टैबलेट पर मूल्यांकन किया जाता है। इससे पारदर्शिता का दावा किया गया था, लेकिन परीक्षाफल आने के बाद से छात्रों और अभिभावकों ने इसे लेकर कई शिकायतें की। एक ओर जहां तकनीकी सुधारों का स्वागत हुआ, वहीं दूसरी ओर परिणामों में खामियों ने सभी को चिंतित कर दिया।

क्या है पूरा OSM विवाद?

सीबीएसई ने इस साल मूल्यांकन को डिजिटल करने के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम लागू किया था। इसके बाद कक्षा 12वीं के छात्रों के अंकों में भारी विसंगतियां और विसंगत त्रुटियां देखी गईं। छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि पोर्टल पर धुंधली उत्तर पुस्तिकाएं (Blurred Answer Sheets), पन्नों का गायब होना और नंबरों की टोटलिंग में भारी मिसमैच जैसी गंभीर समस्याएं थीं।

पोर्टल में तकनीकी खामियाँ

एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता ने पोर्टल में तकनीकी कमियों (Vulnerabilities) का दावा किया था, जिसके बाद वेंडर कंपनी (Coempt Edu Teck) पर जुर्माना लगाने की तैयारी भी चल रही थी। हाल ही में यह भी सामने आया था कि सीबीएसई ने स्कूलों को एक सोशल मीडिया टूलकिट भेजकर इस विफल सिस्टम के पक्ष में जबरन सकारात्मक माहौल बनाने का दबाव डाला था।

CBSC चेयरमैन और सचिव की जिम्मेदारी में बदलाव

इस विवाद के चलते सरकार ने सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव का तत्काल तबादला कर दिया है। इस कदम को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय छात्रों की उनकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। OSM सिस्टम को लेकर निराशा के कारण यह तबादला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन

इसके अलावा, OSM विवाद की सभी पहलुओं की गहन जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है। यह समिति उन सभी कारकों का अध्ययन करेगी, जिन्होंने इस प्रणाली को लागू करने में समस्याएँ उत्पन्न की। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समिति न केवल तकनीकी खामियों का पता लगाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसे सुधारों को लागू करने के लिए ठोस सुझाव भी देगी।

छात्रों और अभिभावकों की चिंताएँ बढ़ीं

परीक्षा परिणाम में विसंगतियों के कारण छात्रों और उनके अभिभावकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई छात्र गलत अंक दिए जाने की शिकायत कर रहे हैं, जो उनके भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। इस हालात के चलते छात्र संगठनों ने भी आवाज उठाई है और सरकार से उचित कार्रवाई की मांग की है।

OSM सिस्टम पर विचार विमर्श

OSM सिस्टम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्या यह प्रणाली वास्तव में छात्रों के लिए फायदेमंद है? विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी दृष्टिकोण से OSM एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू करना आवश्यक है। छात्रों की मेहनत और भविष्य को खतरे में डालने वाले किसी भी सिस्टम को सुधारना अति आवश्यक है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए छात्रों को निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

आगामी बदलावों का इंतजार

अब सभी की निगाहें इस नई उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट पर हैं, जो आगे किसी नये सिस्टम या सुधार के संबंध में दिशा-निर्देश तय कर सकती है। छात्र और अभिभावक दोनों ही उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। इस विवाद ने न केवल शिक्षा प्रणाली को चुनौती दी है, बल्कि डिजिटल प्रणालियों पर सवाल भी उठाए हैं।

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