अल नीनो का साया: देश में इस वर्ष मानसून रहेगा बेहद कमजोर, IMD ने जारी किया अलर्ट

The CSR Journal Magazine

कम बारिश की उम्मीद, क्या मानसून देगा बड़ा झटका? जानें IMD का अनुमान

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने नवीनतम पूर्वानुमान में इस बात की पुष्टि की है कि इस साल (2026) भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से कम (Below Normal) रहने की संभावना है। IMD के मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान पूरे देश में औसतन 90% बारिश (LPA का 90 प्रतिशत) होने का अनुमान लगाया गया है, जिसे कम बारिश की श्रेणी में रखा जाता है।

एल नीनो का प्रभाव: बारिश पर विपरीत असर

मौसम विभाग (IMD) ने हाल ही में दावा किया है कि इस साल भारत में बारिश की संभावनाएं बेहद कम हैं। उनका अनुमान है कि इस बार 10 सालों में सबसे कम बारिश हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण एल नीनो (El Nino) हो सकता है, जो प्रशांत महासागर में बनने वाली एक मौसमीय स्थिति है। यह स्थिति भारत में मानसून के दौरान बारिश की मात्रा को प्रभावित करती है।

इन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत, इन क्षेत्रों (जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान) के कई हिस्सों में इस बार सामान्य से काफी कम बारिश होने और जुलाई में भी लू (Heatwave) चलने की आशंका जताई गई है। केवल उत्तर-पूर्वी भारत (North-East India) के कुछ इलाकों में मानसून की स्थिति सामान्य बनी रह सकती है।

संभावित आर्थिक और कृषि प्रभाव

कम वर्षा के कारण खरीफ की मुख्य फसलों जैसे धान (चावल), दालें, कपास, मक्का और तिलहन की शुरुआती बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है। देश की लगभग आधी कृषि भूमि सिंचाई के लिए मानसून के पानी पर निर्भर है। बारिश कम होने से किसानों की आय घट सकती है, जिससे बाजार में रोजमर्रा के सामानों (FMCG) और गाड़ियों की मांग कम हो सकती है। उत्पादन घटने से आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ने का जोखिम रहेगा।

हालात से सतर्क: किसानों की चिंता बढ़ी

कम बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वे पहले से ही मौजूदा सूखे के कारण परेशान हैं और अगर बारिश में और कमी आई, तो फसलों की उत्पादकता पर गहरा असर पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र पर इस स्थिति का असर सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

वैज्ञानिकों का अनुमान: लंबी अवधि तक असर

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल एल नीनो का प्रभाव काफी मजबूत हो सकता है और इससे भारत में बारिश की स्थिति अगले साल तक भी प्रभावित हो सकती है। यह दीर्घकालिक प्रभाव विभिन्न मौसमीय घटकों का परिणाम हो सकता है, जिससे किसानों की कृषि योजना पर भी गहरा असर पड़ेगा।

क्या है El Niño

एल नीनो El Niño एक ऐसी स्थिति है जिसमें समुद्र का गर्म पानी प्रशांत महासागर में जमा हो जाता है। इससे मौसम में बदलाव होते हैं, विशेष रूप से दक्षिण एशिया और भारत में। ये मौसमीय परिवर्तन सामान्य मानसून के पैटर्न को उलट सकते हैं, जिससे वर्षा की मात्रा कम हो जाती है।

सामाजिक और आर्थिक असर: बढ़ती चुनौतियाँ

यदि मानसून की बारिश नहीं होती है, तो इसका प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य कीमतों में वृद्धि, जल संकट, और ग्रामीण रोजगार में कमी जैसी समस्याएँ भी उभर सकती हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित संस्थाओं के लिए मुश्किल भरा समय होगा।

किसानों के लिए सलाह

किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की बदलती स्थिति के मुताबिक अपनी फसल की योजना बनाएं। उन्हें पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग करना चाहिए ताकि कम वर्षा के बावजूद वे अच्छी फसल प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, जल संरक्षण और उचित सिंचाई तकनीकों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

भविष्य की तैयारी

जब बारिश की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब किसानों और सरकारी अधिकारियों को योजना बनानी होती है। नए कृषि उपायों और फसल विविधीकरण के जरिए इस चुनौती का सामना किया जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन की इस नई लहर में सभी को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।

वर्तमान स्थिति और प्री-मानसून राहत

भले ही मुख्य मानसून कमजोर रहने का अनुमान है, लेकिन फिलहाल देश के 80 से 90 प्रतिशत हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तेज हवाओं और आंधी के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया है, जिससे भीषण गर्मी और लू से लोगों को थोड़ी राहत मिल रही है।

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