मौसम विभाग ने दी बारिश की जानकारी
IMD Monsoon Rainfall Prediction: भारत मौसम विभाग ने इस साल मानसून की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विभाग के अनुसार, इस बार मानसून सामान्य से कम रहने का अनुमान है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके बाद, यह मध्य भारत में 15 से 20 जून के बीच आगे बढ़ेगा। पिछले साल मानसून की शुरूआत 24 मई को हुई थी, जो इस बार करीब एक हफ्ते बाद होने की उम्मीद है।
IMD Monsoon Rainfall Prediction: कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि पिछले 50 सालों के आंकड़ों के आधार पर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 87 सेंटीमीटर है। इस साल की बारिश को सामान्य से कम कैटेगरी में रखा गया है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने बताया कि वर्ष 2021 के मौसम की तुलना में इस बार कुल बारिश 92% रहने का अनुमान है।
एल नीनो का असर
इस साल मानसून की स्थिति पर एल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि एल नीनो की वजह से मानसून में कुछ देरी हो सकती है। हालांकि, अगली सीजन में बारिश में थोड़ी बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। यदि भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) सकारात्मक अवस्था में आ गया, तो इससे बारिश में सुधार हो सकता है।
लॉन्ग पीरियड एवरेज के समीकरण
मौसम विभाग ने लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 1971 से 2020 की अवधि के आधार पर 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया है। इससे स्पष्ट होता है कि अगर किसी साल की बारिश 87 सेंटीमीटर से अधिक होती है, तो उसे सामान्य माना जाता है। अगर बारिश कम होती है, तो उसे कमजोर मानसून समझा जाता है। इस बार बारिश का अनुमान सामान्य से कम रहने के चलते लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।
1972 में मानसून की सबसे देरी
हमेशा से मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें बदलती रही हैं। IMD के आंकड़ों के अनुसार, 1972 में मानसून सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था। इससे पहले, 1918 में यह 11 मई को केरल पहुंच गया था। पिछले 150 वर्षों में मानसून की यह विविधताएं दर्शाती हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्नों में बदलाव आया है।
भावी मौसम के संकेत
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यदि EL Nino की स्थिति बरकरार रहती है, तो इसके कारण मानसून की बारिश में कमी आने की संभावनाएं बन रही हैं। हालांकि, अगस्त से सितंबर के बीच इंडियन महासागर (Indian Ocean) का सकारात्मक प्रभाव बारिश की स्थिति को बेहतर बना सकता है। ऐसे में, भारतवासी इस साल मानसून के बदलते रंगों को देख सकते हैं।
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