अयोध्या दान विवाद: राम मंदिर ट्रस्ट में सरकार की भूमिका और चढ़ावा चोरी का सच

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अयोध्या में चढ़ावा चोरी बवाल: समझें राम मंदिर ट्रस्ट में सरकार की भूमिका

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और मूल्यवान वस्तुओं की कथित चोरी के मामले पर गहरा विवाद छिड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रहा है। मंदिर के खातों, भूमि सौदों और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है।

चढ़ावे की चोरी से उठे सवाल

राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना 2020 में हुई थी और यह एक स्वतंत्र न्यास है। हाल ही में, चढ़ावे की चोरी की खबरों ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही, वहीं यूपी सरकार की स्पेशल टास्क फोर्स (SIT) भी जांच में जुट गई है। अब सवाल यह है कि सरकार ट्रस्ट के संचालन में कितना हस्तक्षेप कर सकती है? राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना सुप्रीम कोर्ट के अधिनियम पर हुई थी, जिससे यह स्पष्ट है कि इसके संचालन में सरकार की भूमिका सीमित हो सकती है।

₹200 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी

शुरुआती अनुमानों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, दान पात्रों (हुंडी) से नकदी, सोने-चांदी के सिक्कों और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई अन्य मूल्यवान वस्तुओं की चोरी का यह आंकड़ा लगभग 200 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। शुरुआती जांच में यह भी दावा किया गया कि दान पेटियों से प्रतिदिन औसतन 25 से 27 लाख रुपये की नकदी और मूल्यवान धातुएं बिना रिकॉर्ड में आए गायब की जा रही थीं।

अब तक की नकद जब्ती (Cash Recovery)

SIT की छापेमारी और पूछताछ के आधार पर मुख्य आरोपियों के पास से अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की नकद राशि बरामद की जा चुकी है। जांच के शुरुआती दौर में मुख्य आरोपियों में से एक (लवकुश मिश्रा) के घर पर जब छापेमारी की गई, तो घर के भीतर और गोबर के ढेर में छुपाकर रखे गए लगभग 10 से 12 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। पुलिस और जांच एजेंसियों ने संदिग्धों के पास से नगदी के अलावा एक लग्जरी कार और 3 आईफोन (iPhones) भी जब्त किए हैं।

बेनामी संपत्ति और अचानक अमीरी का खुलासा

जांच टीम के सामने सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब मंदिर में नोट गिनने वाले 50 से अधिक कर्मचारी संदेह के घेरे में आए। करीब 18,000 से 22,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने अयोध्या और आसपास के इलाकों में ₹40 लाख से लेकर ₹1.5 करोड़ तक की संपत्तियां और जमीनें खरीद ली थीं। ट्रस्ट के महासचिव के पूर्व ड्राइवर और मंदिर कर्मचारी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर हुई हालिया छापेमारी में भारी मात्रा में सोना और बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं, जिसने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

क्या है राम मंदिर ट्रस्ट?

5 फरवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की गई। इसका मुख्यालय ग्रेटर कैलाश, दिल्ली में है और इसका कार्य मंदिर के निर्माण तथा संचालन से संबंधित निर्णय लेना है। इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक बार कहा था कि यह एक स्वतंत्र न्यास है। ट्रस्ट में 15 सदस्य हैं, जिसमें महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष और चंपत राय को महासचिव बनाया गया है। इसके साथ ही एक दलित सदस्य और केंद्र तथा राज्य सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

ट्रस्ट के नियम और संचालन

राम मंदिर ट्रस्ट का संचालन 15 सदस्यीय कमेटी द्वारा किया जाता है, जिसका उद्देश्य मंदिर के विकास के लिए धन जुटाना है। सदस्य को कोई सैलरी नहीं दी जाती, हालांकि यात्रा के खर्च की व्यवस्था की गई है। मंदिर की अचल संपत्ति को भी ट्रस्ट के सदस्य नहीं बेच सकते हैं, और हर साल दान की बैलेंस शीट तैयार की जाती है। इन नियमों के अनुसार, ट्रस्ट की स्वायत्ता बनी हुई है।

सरकार की दखल की संभावना

राम मंदिर ट्रस्ट एक स्वायत्त संस्था है, जिसके फैसले लेने का अधिकार उसके पास है। उत्तर प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार का ट्रस्ट के दैनिक वित्तीय मामलों या खर्चों पर सीधा नियंत्रण नहीं होता है। ट्रस्ट अपने वित्तीय निर्णयों के लिए स्वतंत्र है। ट्रस्ट की संरचना में भारत सरकार के प्रतिनिधि (जैसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव) और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि (जैसे अयोध्या के जिलाधिकारी) पदेन सदस्य (Ex-officio Members) के रूप में शामिल होते हैं। यह प्रतिनिधित्व केवल समन्वय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है, वित्तीय हस्तक्षेप के लिए नहीं। हाल ही में चढ़ावे की चोरी से संबंधित खबरें केवल चल संपत्ति के बारे में हैं। अचल संपत्ति पर कोई विवाद नहीं है। अभी तक ट्रस्ट ने केवल SIT से जांच की सिफारिश की है। मामले की गंभीरता के कारण, ट्रस्ट का पहला निर्णय SIS की रिपोर्ट के बाद ही हो सकता है।

मंदिर में चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा

अयोध्या के रामलला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले भारी दान (प्रतिदिन करीब 25 से 27 लाख रुपये नकद) को संभालने के लिए एक विस्तृत प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है। वर्तमान में मंदिर में चढ़ावे की गिनती, उसकी सुरक्षा और बैंक तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था निम्नलिखित चरणों में काम करती है-
दान पात्र और संग्रहण (Collection)14 स्थानों पर दान पात्र: राम जन्मभूमि परिसर में गर्भगृह और दर्शन मार्ग सहित कुल 14 अलग-अलग स्थानों पर बड़े दान पात्र (हुंडी) रखे गए हैं।
गोपनीय कक्ष में स्थानांतरण: इन पात्रों से मिलने वाली नकद राशि और मूल्यवान धातुओं (सोना-चांदी) को कड़े पहरे में परिसर के भीतर ही बने एक अत्यंत सुरक्षित “गोपनीय कक्ष” (Confidential Room) में ले जाया जाता है। सुरक्षा कारणों से इस कमरे की सही लोकेशन गुप्त रखी जाती है।

गिनती और निगरानी टीम

चढ़ावे की गिनती और सत्यापन के लिए कुल 50 लोगों की एक संयुक्त टीम तैनात रहती है, जिन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है-
24 नोट गिनने वाले कर्मचारी: इन्हें ट्रस्ट द्वारा अनुबंधित एक निजी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किया जाता है, जो करेंसी नोटों की गिनती और बंडल बनाने का काम करते हैं।
12 ट्रस्ट के कर्मचारी: ये कर्मचारी निजी एजेंसी के स्टाफ पर सीधी नज़र रखते हैं और पूरी गिनती प्रक्रिया की निगरानी करते हैं।
14 अधिकारी और ऑडिटर: इसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारी और टीसीएस (TCS) की ऑडिट टीमों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो वित्तीय मिलान और आंकड़ों के सत्यापन की अंतिम जिम्मेदारी संभालते हैं।

सुरक्षा और बैंक में जमा करने की व्यवस्था

परिसर की त्रिस्तरीय सुरक्षा: पूरे 70 एकड़ के श्री रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा त्रिस्तरीय है। आंतरिक घेरे की कमान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पास है, जबकि बाहरी घेरे में यूपी पुलिस, पीएसी (PAC), विशेष सुरक्षा बल (SSF) और निजी सुरक्षाकर्मी (SIS) तैनात रहते हैं।
सील्ड कंटेनर्स और परिवहन: गिनती पूरी होने के बाद पूरी नकदी को आधिकारिक पर्यवेक्षण में बैंक के विशेष सीलबंद बक्सों या कंटेनरों में पैक किया जाता है।
SBI द्वारा अंतिम सत्यापन: हर सुबह इस सीलबंद नकदी को कड़ी सुरक्षा के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्थानीय शाखा में भेजा जाता है। बैंक अपनी मशीनों से दोबारा जांच करने के बाद इस राशि को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के मुख्य दान खाते में डिजिटल रूप से जमा (क्रेडिट) कर देता है।

SIT की जांच में सामने आई कमियां

हालिया चोरी के विवाद के बाद विशेष जांच दल (SIT) और ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने वर्तमान व्यवस्था में कुछ गंभीर खामियां पाई हैं। एसआईटी ने पाया कि मंदिर में कई कर्मचारियों को लिखित आदेश के बजाय केवल मौखिक निर्देशों पर वित्तीय जिम्मेदारियां दी गई थीं, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हुआ। सीसीटीवी कैमरों की कवरेज, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और दान पात्रों से गोपनीय कमरे तक नकदी ले जाने के दौरान सुरक्षा निगरानी (Vigilance) उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं थी।

चोरी के मामले में सरकार का हस्तक्षेप

जब चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे, तो खुद राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया। इस जांच दल में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) एस. किरण और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। SIT केवल नकद और आभूषणों की चोरी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में खरीदी गई जमीनों और निर्माण सामग्री की खरीद की भी जांच कर रही है। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को सौंप रही है।

धर्म संकट का सवाल

सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसे धार्मिक मुद्दे के रूप में देखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार धार्मिक न्यासों में दखल देने से बचना चाहिए। हालांकि, कुप्रबंधन की स्थिति में कुछ समय के लिए हस्तक्षेप किया जा सकता है। इस मामले में, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा पर भी आरोप हैं, जो प्राण प्रतिष्ठा के यजमान रह चुके हैं। प्राण प्रतिष्ठा का मतलब होता है कि मूर्ति की पूजा और देखरेख की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होती है।

मंदिर प्रबंधन में आगामी सुधार और प्रशासनिक बदलाव

एसआईटी की जांच और सिफारिशों के आधार पर मंदिर के वित्तीय प्रबंधन, चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। SIT ने ट्रस्ट की आंतरिक कमियों को दूर करने के लिए एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की सिफारिश की है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस प्रकार, सरकार ट्रस्ट के दैनिक कामकाज या पैसों का प्रबंधन नहीं करती है। हालांकि, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, आपराधिक मामलों की जांच और प्रशासनिक सुधारों में सरकार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक है।

राममंदिर में लागू होगा तिरुपति मॉडल

आगामी सुधार (तिरुपति की तर्ज पर तैयारी)इन कमियों को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट अब तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के दान प्रबंधन मॉडल को लागू करने की तैयारी में हैं। इसके तहत जल्द ही सीसीटीवी की लाइव-स्ट्रीमिंग, बिना जेब और बिना कॉलर वाले विशेष कपड़ों (Kurta-Pyjamas) में कर्मचारियों की एंट्री और पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल व पारदर्शी बनाने के कदम उठाए जा रहे हैं।

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