राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ा खुलासा: जांच में बढ़ा सस्पेंस और नए नाम सामने

The CSR Journal Magazine
अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अयोध्या पहुंचकर हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और रामलला के दर्शन किए। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय उपस्थित नहीं थे, जिससे चर्चा और भी बढ़ गई है।

अनुकल्प मिश्रा की भूमिका का पर्दाफाश

राम मंदिर में दानराशि की काउंटिंग की जिम्मेदारी संभालने वाले अनुकల్ప मिश्रा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प ने एक रिशतेदारों का नेटवर्क तैयार किया, जिसके माध्यम से दानराशि में हेराफेरी की जाती थी। SIT जांच के पांचवे दिन भी FIR दर्ज नहीं की गई, लेकिन जांच टीम ने 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की है।

दुनिया में उथल-पुथल

चढ़ावा चोरी का खेल प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही शुरू हो गया था। 22 जनवरी 2024 के बाद से पैसे चुराने का सिलसिला तेजी से बढ़ा, जिसमें करोड़ों रुपये की हेराफेरी होने की आशंका जताई जा रही है। पहले तो प्रतिदिन 2-4 लाख रुपये चोरी होते थे, लेकिन बाद में यह रकम कई गुना बढ़ गई। जांच में अनुकल्प मिश्रा का नाम बार-बार उभरकर सामने आ रहा है। इसके पीछे उसकी योजना और नेटवर्क की बातें हो रही हैं।

जांच का केन्द्र अनुकल्प मिश्रा

सूत्रों के अनुसार, एक ट्रस्टी की अनुशंसा पर अनुकल्प मिश्रा को राम मंदिर प्रबंधन में शामिल किया गया। बाद में वह काउंटिंग का काम संभालने लगा और अपने रिश्तेदारों के माध्यम से पूरी व्यवस्था पर नियंत्रण पा लिया। हाल ही में, उसने अपने बहनोई लवकुश की भी नियुक्ति कराई। यह सब मिलकर अनुकल्प ने सिस्टम पर अपनी पकड़ बना ली थी।

चुराने का पर्दाफाश कैसे हुआ?

5 जून को अचानक ट्रस्ट के लोग यात्री सुविधा केंद्र पहुंचे, जहां सुरक्षाकर्मी ने एक नोट गिनने वाले की तलाशी ली। तलाशी में कुछ नकदी मिली, जिसके बाद उससे شدید पूछताछ हुई। पूछताछ में अनुकल्प और लवकुश का नाम सामने आया। जांच के दौरान PFC के बाथरूम से बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद की गई।

जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है

जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण लोगों के नाम सामने आए हैं, जिसमें चंपत राय, गोपाल राव, और अनिल मिश्रा शामिल हैं। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि राम काज में कोई धोखा देने वाला बच नहीं सकता। अब सवाल है कि आगे इस मामले में क्या नया खुलासा होगा। यह निश्चित रूप से अयोध्या के लिए एक गंभीर समय है।

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