लोन रिकवरी को लेकर भ्रम नहीं, कानून की जानकारी है सबसे बड़ी ताकत: ‘न्याय सेतु’ ऐप बताएगा आपके अधिकार
आज के दौर में डिजिटल लोन और पर्सनल फाइनेंस का दायरा तेजी से बढ़ा है। कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन लोन उपलब्ध होने से लोगों की आर्थिक जरूरतें तो पूरी हो रही हैं, लेकिन कई बार किस्त चूकने की स्थिति में रिकवरी एजेंटों के व्यवहार, कानूनी प्रक्रियाओं और अपने अधिकारों को लेकर लोगों में भारी भ्रम भी देखने को मिलता है। ऐसे में भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग (Department of Justice) द्वारा विकसित ‘न्याय सेतु’ (Nyaya Setu) प्लेटफॉर्म नागरिकों को कानून से जुड़ी विश्वसनीय और सरल जानकारी उपलब्ध करा रहा है।
अफवाहों पर न दें ध्यान
हाल ही में जारी जन-जागरूकता संदेश में नागरिकों से अपील की गई है कि वे लोन रिकवरी से जुड़ी अफवाहों या गलत जानकारियों पर भरोसा न करें। यदि कोई रिकवरी एजेंट संपर्क करता है तो सबसे पहले अपने कानूनी अधिकारों को समझें। इसी उद्देश्य से न्याय सेतु ऐप और उससे जुड़ी डिजिटल सेवाओं के माध्यम से लोन, रिकवरी, उपभोक्ता अधिकार और अन्य कानूनी विषयों पर सरल भाषा में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
क्यों जरूरी है कानूनी जानकारी?
अक्सर देखा जाता है कि लोन की किश्त समय पर जमा न होने पर कई लोग घबरा जाते हैं। कुछ मामलों में रिकवरी एजेंटों द्वारा लगातार फोन कॉल, दबाव या अनुचित व्यवहार की शिकायतें भी सामने आती हैं। हालांकि, कानून के तहत उधार लेने वाले व्यक्ति के भी अधिकार हैं और वित्तीय संस्थानों की भी जिम्मेदारियां तय हैं। यदि किसी व्यक्ति को यह जानकारी हो कि उसके साथ किस प्रकार का व्यवहार वैध है और किस प्रकार का नहीं, तो वह अपनी स्थिति को अधिक समझदारी से संभाल सकता है।
न्याय सेतु क्या है?
न्याय सेतु एक डिजिटल कानूनी सहायता पहल है जिसका उद्देश्य आम नागरिकों तक कानूनी जानकारी आसान भाषा में पहुंचाना है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न कानूनी विषयों पर मार्गदर्शन देता है ताकि नागरिक बिना किसी भ्रम के अपने अधिकारों और कानूनी विकल्पों को समझ सकें। प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत जानकारी की आवश्यकता सीमित रखी गई है और कुछ सुविधाओं के लिए स्थान तथा माइक्रोफोन जैसी अनुमति उपयोगकर्ता की सहमति से ली जाती है।
लोन रिकवरी के दौरान क्या हैं आपके अधिकार?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति लोन चुका पाने में अस्थायी कठिनाई का सामना कर रहा है तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा सकता है। उधारकर्ता को सम्मानपूर्वक व्यवहार पाने का अधिकार है। यदि विवाद उत्पन्न होता है तो संबंधित कानूनों और निर्धारित कानूनी मंचों के माध्यम से उसका समाधान किया जा सकता है। बड़े बैंकिंग ऋणों से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) जैसी व्यवस्था भी मौजूद है।
विवाद होने पर कहां मिलेगी मदद?
यदि किसी उपभोक्ता को बैंक, वित्तीय संस्था या सेवा से जुड़ी शिकायत हो तो वह संबंधित शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग कर सकता है। उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था के तहत नागरिकों को जानकारी पाने, शिकायत दर्ज कराने और उचित प्रतितोष प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) भी उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने और मार्गदर्शन देने की सुविधा उपलब्ध कराती है।
कानूनी जागरूकता बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार का उद्देश्य केवल कानून बनाना नहीं बल्कि आम नागरिकों तक उनकी जानकारी पहुंचाना भी है। इसी सोच के तहत न्याय सेतु जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं ताकि लोग अदालत जाने से पहले अपने अधिकारों, प्रक्रियाओं और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी प्राप्त कर सकें। इससे अनावश्यक विवादों और गलतफहमियों को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी कारणवश लोन की किस्त चुकाने में कठिनाई हो रही हो तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था से तुरंत संपर्क कर समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने या किसी मांग को स्वीकार करने से पहले उसके कानूनी पहलुओं को समझना आवश्यक है। ऐसी स्थिति में न्याय सेतु जैसे आधिकारिक कानूनी सूचना प्लेटफॉर्म नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
लोन और रिकवरी के नियम अब आपकी मुट्ठी में
डिजिटल युग में वित्तीय सेवाओं का विस्तार जितनी तेजी से हुआ है, उतनी ही तेजी से कानूनी जागरूकता की आवश्यकता भी बढ़ी है। लोन लेना आसान हो सकता है, लेकिन उससे जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझना भी उतना ही जरूरी है। न्याय सेतु ऐप का उद्देश्य नागरिकों को यही भरोसा देना है कि सही कानूनी जानकारी उनके हाथों में हो, ताकि वे किसी भी परिस्थिति का सामना आत्मविश्वास और कानून की समझ के साथ कर सकें।
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