माता-पिता दोनों IAS तो आरक्षण क्यों, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

The CSR Journal Magazine
ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायालय ने साफ किया है कि अगर किसी छात्र के माता-पिता दोनों IAS अधिकारी हैं, तो उन्हें आरक्षण का लाभ क्यों देना चाहिए। अदालत का यह मानना है कि अच्छी नौकरी वाले माता-पिता के बच्चों को आरक्षण से बाहर होना चाहिए।

आरक्षण और सामाजिक गतिशीलता

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और आर्थिक समृद्धि से सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम सभी को समझना होगा। जब एक छात्र के माता-पिता उच्च पद पर हों और अच्छी आय अर्जित कर रहे हों, तो उनके बच्चे का आरक्षण मांगना उचित नहीं है।

ईडब्ल्यूएस बनाम क्रीमी लेयर

जस्टिस नागरत्ना ने ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) की बात भी की। उन्होंने बताया कि ईडब्ल्यूएस के लिए केवल आर्थिक पिछड़ापन मान्य है, जबकि क्रीमी लेयर का मामला सामाजिक पिछड़ापन को भी ध्यान में रखता है। इसलिए, इस मामले में मानदंड को पिछले स्तर से कहीं अधिक उदार होना चाहिए।

सामाजिक संतुलन का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर विचार किया कि यदि माता-पिता सरकारी सेवा में उच्च पदों पर हैं, तो सामाजिक गतिशीलता उस तर्क को कमजोर कर देती है। इसलिए, ऐसे छात्रों को आरक्षण से बाहर करने की आवश्यकता है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संतुलन का होना ज़रूरी है, ताकि जो लोग वास्तव में आवश्यकता में हैं, उन्हें फायदा मिल सके।

बेंच द्वारा उठाए गए सवाल

सुनवाई के अंत में बेंच ने याचिका पर नोटिस जारी किया। यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मुद्दे की गहराई से जांच करने को तैयार है। अदालत का यह दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि आरक्षण की नीति में बदलाव की ज़रूरत हो सकती है, ताकि वास्तविक ज़रूरतमंदों को लाभ मिले।

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