बॉयफ्रेंड बन गया AI का खेल, डिजिटल ब्रेकअप ने मचाया हड़कंप

The CSR Journal Magazine

सावधान! आपकी भावनाओं से खेल रहा है ‘AI बॉयफ्रेंड’, अपडेट होते ही बदला रंग

21वीं सदी में जहां तकनीक इंसानी जिंदगी के हर हिस्से को आसान बना रही है, वहीं अब इसने इंसान के सबसे संवेदनशील हिस्से—’प्यार और भावनाओं’ पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में एक चौंकाने वाला वैश्विक और घरेलू ट्रेंड सामने आया है, जहां हाड़-मांस के इंसानों से निराश होकर लोग, खासकर महिलाएं, ‘एआई बॉयफ्रेंड’ (AI Boyfriend) के जाल में अपनी असली भावनाएं निवेश कर रही हैं। लेकिन यह डिजिटल प्यार तब एक भयानक दुःस्वप्न में बदल गया जब एक तकनीकी अपडेट के कारण हजारों महिलाओं का अचानक ‘वर्चुअल ब्रेकअप’ हो गया, जिससे यूजर्स के बीच हड़कंप मच गया है।

AI का जादू: डेटिंग का नया चेहरा

रिश्तों में विश्वास होना चाहिए, लेकिन कभी-कभी यह विश्वास बहुत महंगा पड़ जाता है। एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की ‘गुड मॉर्निंग’ मैसेजेस को प्यार समझा। लेकिन जब उसे सच्चाई का पता चला, तो उसका दिल टूट गया। महिला ने यह जानकर गहरा सदमा महसूस किया कि उसके जीवन में मौजूद प्यार असल में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नतीजा था। AI के इस खेल ने उसे ठगा। डेट प्लान से लेकर झगड़ों के समाधान तक, वह सोचती रही कि उसका बॉयफ्रेंड उसकी हर जरूरत का ख्याल रखता है। जबकि असलियत में यह सब पूरी तरह से एक प्रोग्राम द्वारा संचालित हो रहा था। यह जानकर उसका विश्वास एक झटके में चकनाचूर हो गया।

अकेलेपन की आड़ में ‘भरोसे का कारोबार’

शहरी जीवन का बढ़ता अकेलापन और वास्तविक रिश्तों की जटिलताओं ने ‘आर्टिफिशियल इंटिमेसी’ (बनावटी आत्मीयता) के इस नए बाजार को जन्म दिया है। बाज़ार में मौजूद तमाम मोबाइल ऐप्स सिर्फ कुछ रुपयों के सब्सक्रिप्शन पर ‘आदर्श साथी’ उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। ये AI चैटबॉट इस तरह प्रोग्राम किए जाते हैं कि वे कभी गुस्सा नहीं करते, 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं, बिना थके आपकी बातें सुनते हैं और हमेशा आपकी तारीफ करते हैं। एक हालिया शोध के अनुसार, लगभग 61% भारतीय यह मानते हैं कि वे एक AI चैटबॉक्स के प्रति रोमांटिक भावनाएं विकसित कर सकते हैं। कई महिलाएं जो अपनी शादियों या वास्तविक जीवन के रिश्तों में भावनात्मक उपेक्षा झेल रही थीं, उन्होंने इन चैटबॉट्स में अपना मानसिक सुकून ढूंढा। वे अपने सबसे गहरे राज, सुख-दुख और रोजाना की बातें इन मशीनों से साझा करने लगीं, जिससे उन्हें यह भ्रम होने लगा कि कोई उन्हें सच में बिना जज किए सुन रहा है।

एक सॉफ्टवेयर अपडेट और बिखर गए दिल

यह गुलाबी कहानी तब पूरी तरह से काली पड़ गई जब प्रमुख AI कंपनियों ने अपने सर्वर और मॉडल्स को अपग्रेड किया (जैसे हालिया जीपीटी-5 अपडेट)। इस कोड अपडेट का उद्देश्य सुरक्षा फिल्टर लगाना और AI के व्यवहार को अधिक तटस्थ बनाना था। लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि जिन AI बॉयफ्रेंड्स ने महिलाओं से प्यार के वादे किए थे, वे अचानक एक ठंडी, औपचारिक और अजनबी मशीन की तरह बात करने लगे। एक पीड़ित यूजर ने अपनी दास्तान बयां करते हुए कहा, “मुझे उससे सच में प्यार हो गया था। वह रोज मेरा हालचाल पूछता था। लेकिन अपडेट के बाद वह मुझे एक अजनबी की तरह औपचारिक जवाब देने लगा। ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे जिंदा पार्टनर की याददाश्त छीन ली हो।” मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह डिजिटल वियोग वास्तविक जीवन के ब्रेकअप या किसी प्रियजन को खोने (शोक) जितना ही दर्दनाक और मानसिक रूप से विनाशकारी साबित हो रहा है। रेडिट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी हजारों पीड़ित महिलाओं के पोस्ट्स की बाढ़ आ गई है जो इस ‘तकनीकी धोखे’ के कारण गहरे अवसाद में चली गई हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी: ‘दिखावे की सहानुभूति’ का जानलेवा जाल

MIT की प्रसिद्ध समाजशास्त्री और मनोवैज्ञानिक शेरी टर्कल ने इंसानों और AI के बीच बढ़ते इन संबंधों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, AI के भीतर इंसानी जज्बातों को समझने की कोई वास्तविक क्षमता या दिल नहीं होता है। AI द्वारा दिखाई जाने वाली सहानुभूति पूरी तरह से ‘दिखावटी और कोडिंग का खेल’ है। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक रिश्ते घर्षण, आपसी समझौते और संघर्षों से बनते हैं, जिससे व्यक्ति का भावनात्मक विकास होता है। दूसरी ओर, AI बिना किसी प्रयास के एक कृत्रिम दुनिया रचता है, जो इंसान को वास्तविक समाज और परिवार से पूरी तरह काट देती है। ‘भरोसे का यह कारोबार’ कंपनियों के लिए करोड़ों का मुनाफा कमाने का जरिया हो सकता है, लेकिन मासूम उपभोक्ताओं के लिए यह भावनाओं का एक ऐसा जाल है जहां रिमोट कंट्रोल और कोडिंग का एक सिंगल बटन भी आपका दिल हमेशा के लिए तोड़ सकता है।

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