बंगाल की सियासत में भूचाल: क्या टूटने वाली है ममता की तृणमूल कांग्रेस?

The CSR Journal Magazine

पश्चिम बंगाल में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की आहट: क्या तृणमूल कांग्रेस में फूट का खतरा बढ़ रहा है?

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों में मिली हार और सत्ता से बेदखल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर भारी असंतोष और बगावत का माहौल है, जिसके कारण महाराष्ट्र की शिवसेना की तरह “महाराष्ट्र मॉडल” पर एक नई पार्टी बनने या बड़े बिखराव की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं।

सियासी संकट की ओर बढ़ती ममता की पार्टी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे घमासान को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई हैं। ममता का कहना है कि बीजेपी पार्टी के विधायकों और सांसदों को डराने-धमकाने के साथ ही पैसे का लालच देकर अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल लगातार बदल रहा है, जिससे ममता बनर्जी की TMC को लगातार झटके लग रहे हैं। अब ऐसी चर्चाएँ की जा रही हैं कि क्या ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को हटाकर एक नई तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई जा सकती है।

क्या बंगाल में टूट का सामना कर रहा है TMC?

इस सियासी उथल-पुथल के बीच, दो विधायकों को पार्टी से निकालने की घटना ने फूट की संभावना को और भी बढ़ा दिया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब टीएमसी के विधायकों ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपान साहा ने पार्टी के खिलाफ आवाज उठाई। इस स्थिति को देखते हुए अटकलें लगाई जा रही हैं कि लगभग 50 विधायक TMC से अलग हो सकते हैं। कुछ सांसद भी बागी तेवर दिखाने के संकेत दे रहे हैं।

विधायकों की सामूहिक अनुपस्थिति

ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों का अनुपस्थित रहना सवालों को खड़ा कर रहा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा संगठन को संभालने के लिए बुलाई गई आपातकालीन बैठक में पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही शामिल हुए। लगभग तीन-चौथाई (60 के करीब) विधायकों के दूरी बनाने से पार्टी में विभाजन की आशंकाओं को बल मिला है।

शीर्ष नेताओं का निष्कासन

बढ़ते अंतर्विरोधों के बीच टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो बड़े नेताओं और विधायकों ऋतब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) और संदीपन साहा (Sandipan Saha) को दल से निष्कासित कर दिया है। वरिष्ठ सांसद Sukhendu Sekhar Roy और अन्य प्रवक्ताओं (जैसे रिजू दत्ता और मनोज तिवारी) ने पार्टी के भीतर तानाशाही रवैये, संस्थागत भ्रष्टाचार और चुनावी रणनीतिकार फर्म IPAC के अत्यधिक हस्तक्षेप पर खुलेआम सवाल उठाए हैं।

नेताओं और पार्षदों के इस्तीफे

सांसद काकोली घोष दस्तिदार समेत कई बड़े चेहरों ने संगठनात्मक पदों से दूरी बना ली है, जबकि उत्तर 24 परगना सहित विभिन्न जिलों में 100 से अधिक पार्षदों ने सामूहिक रूप से इस्तीफे दे दिए हैं। पूर्व मंत्री गियासुद्दीन मोल्ला ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ही स्थानीय थाने में डराने-धमकाने की एफआईआर दर्ज करा दी है।

बीजेपी पर लगे गंभीर आरोप

ममता ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो में कहा कि चार विधायकों ने उनके पास पुलिस के डराने-धमकाने की शिकायत की। ममता ने पूछा, “यह किस तरह का लोकतंत्र है?” उनका कहना है कि इस तरह के अत्याचार ने लोकतंत्र की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं।

बैठक में विधायक अनुपस्थिति की चर्चा

पिछले हफ्ते कालीघाट में हुई बैठक में कुल 80 विधायकों में से करीब 60 अनुपस्थित रहे। इसी दौरान कई विधायक अन्य स्थानों पर गपशप करते पाए गए। कुछ विधायकों ने बैठक में शामिल न होने की वजह अपनी तबीयत बताई, लेकिन इस अनुपस्थिति ने उनके पार्टी के प्रति लगाव पर सवाल उठा दिए हैं।

भविष्य की अनिश्चितता

सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC को आने वाले समय में कई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी में बढ़ती असहमति से लग रहा है कि राजनीतिक परिदृश्य और भी जटिल हो सकता है। क्या ममता अपनी पार्टी को इस टूट से बचा पाएंगी, या राजनीति में एक नया ‘महाराष्ट्र मॉडल’ देखने को मिलेगा, यह तो समय ही बताएगा।

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