ममता राज का अंत: बंगाल में ढहा TMC का किला, अभिषेक बनर्जी और I-PAC पर फूटा गुस्सा

The CSR Journal Magazine

बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद भ्रष्टाचार और I-PAC पर पार्टी के भीतर उठे विद्रोह के स्वर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटके के साथ हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी की फिसलती पकड़ और चौतरफा आलोचनाओं ने TMC में असंतोष की नई लहर पैदा कर दी है। अब जो नेता और कार्यकर्ता ममता बनर्जी के समर्थक माने जाते थे, वे भी खुलकर सवाल उठा रहे हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा पर गंभीर चोट लगी है।

नवीनतम चुनाव परिणामों से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है, जिसने राज्य में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता थी, जहां भाजपा ने 200 से अधिक सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं, सत्ताधारी TMC सिमटकर सिर्फ 80 सीटों पर रह गई है, जिससे उसे 134 से अधिक सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं।

TMC में गहराता आंतरिक असंतोष और संकट

इस ऐतिहासिक पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर कलह और संगठनात्मक विद्रोह खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं का गुस्सा राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीति बनाने वाली कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) पर फूट रहा है। कई नेता अभिषेक के “घमंडी व्यवहार” को हार का मुख्य कारण बता रहे हैं।

इस्तीफों की झड़ी

हार के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस में बगावत शुरू हो गई। वरिष्ठ नेता अरूप चक्रवर्ती और शांतनु सेन ने अपने प्रवक्ता पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही, कोलकाता नगर निगम में भी संकट गहरा गया है, जहां अरूप चक्रवर्ती और सुषांत घोष जैसे कद्दावर पार्षदों ने अपने प्रशासनिक पदों से त्यागपत्र दे दिया है।

विधायकों और पार्षदों की बगावत

चुनाव नतीजों के बाद सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई अहम बैठकों से कई नवनिर्वाचित विधायक नदारद रहे। उत्तर 24 परगना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में 100 से अधिक टीएमसी पार्षदों के इस्तीफों ने पार्टी को बिखरने की कगार पर खड़ा कर दिया है।

शीर्ष नेताओं में तकरार

लोकसभा में पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपनी ही पार्टी के सांसद और चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिससे आंतरिक गुटबाजी पूरी तरह उजागर हो गई है।

कानूनी कार्रवाई का डर

सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के रसूखदार नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जबरन वसूली और अवैध संपत्ति के मामलों में दिग्गज नेता प्रसेनजीत साहा की गिरफ्तारी इसका ताजा उदाहरण है।

भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई विपक्ष की ताकत

TMC के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद पार्टी की स्थिति और भी कमजोर हुई है। पिछले कुछ समय से पार्टी में ही उठते सवाल और आरोप विपक्षी दलों के लिए बढ़ती ताकत साबित हो रहे हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करना बड़ी चुनौती बन गया है। बंगाल के लोगों के बीच पार्टी की विश्वसनीयता भी दांव पर लगी हुई है।

I-PAC विवाद: क्या है इसकी असली सचाई?

I-PAC यानि ‘Indian Political Action Committee’ का नाम अब TMC के समक्ष एक बड़ी चुनौती बन गया है। पार्टी ने मतदान से पहले इस संगठन के साथ साझेदारी की थी, लेकिन चुनाव के परिणामों के बाद अनेक नेताओं ने इस पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। I-PAC से जुड़े लोग अब पार्टी के अंदर के बुनियादी मुद्दों पर भी खुलकर बोलने लगे हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष की लहर

तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठ रहे असंतोष के चलते पार्टी के कई वफादार सदस्यों ने अब अपने विचार साझा करने की ठानी है। जिन कार्यकर्ताओं ने कभी ममता बनर्जी का बचाव किया, वे अब पार्टी के निर्णयों पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। यह बदलाव पार्टी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। अब देखना होगा कि क्या TMC अपनी लाइन को सुधार पाएगी या नहीं।

भविष्य की रणनीति पर सवाल

इस कठिन समय में TMC के लिए अपनी रणनीतियों पर दोबारा ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। पार्टी की स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। कार्यकर्ताओं का मौजूदा असंतोष भविष्य में पार्टी के लिए संकट का कारण बन सकता है। 2011 में सत्ता संभालने के बाद पहली बार टीएमसी इतने बड़े अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। चूंकि पार्टी पूरी तरह से ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रही है, इसलिए वर्तमान में उनके कद का कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण पार्टी में दूसरी कतार का नेतृत्व पूरी तरह विफल नजर आ रहा है।

पार्टी के अंदरूनी विवाद और उनकी स्वीकार्यता

भ्रष्टाचार के आरोप, I-PAC का विवाद और पार्टी में बढ़ता असंतोष, ये सभी बातें TMC के लिए एक गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। अब पार्टी को निर्णय लेने में सावधानी बरतनी होगी। यदि नहीं, तो यह कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी और उनका दल आने वाले समय में और भी अधिक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos