पूरी दाल काली है: E20 ईंधन नीति पर मोदी सरकार पर बरसे राहुल गांधी

The CSR Journal Magazine

राहुल गांधी ने E20 ईंधन के मुद्दे पर उठाए सवाल, ‘दाल पूरी काली है’, वीडियो में दिखी ईंधन की हकीकत

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया (X) पर एक वीडियो जारी कर मोदी सरकार की E20 (E20) ईंधन नीति पर बड़ा हमला बोला है और कहा है कि “इस मामले में दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है”। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (गन्ने का रस/अर्क) मिलाकर बेचा जाने वाला यह ईंधन आम जनता की गाड़ियों के इंजन को तबाह कर रहा है और सीधे तौर पर उनकी जेब से डकैती डाल रहा है। संसद के आगामी सत्र से ठीक पहले जारी किए गए इस वीडियो के बाद देश में पेट्रोल के दामों और उसकी गुणवत्ता को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

E20 फ्यूल नीति पर बरसे राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को देश का एक बहुत बड़ा ‘भ्रष्टाचार और घोटाला’ करार दिया है। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी ने कार की पेट्रोल टंकी का ढक्कन खोलकर लाइव प्रदर्शन किया और ईंधन की कथित हकीकत देश के सामने रखी। वीडियो में सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “नॉर्मली हम कहते हैं कि दाल में कुछ काला है, मगर यह ई20 का मामला इतना बड़ा इश्यू है कि इसमें पूरी दाल ही काली है।” उन्होंने साफ किया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर एक बड़े आंदोलन के रूप में उठाने जा रहा है।

वीडियो में क्या दिखी ईंधन की हकीकत-इंजन हो रहे बर्बाद

राहुल गांधी द्वारा जारी किए गए वीडियो और कांग्रेस के अन्य नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों में E20 ईंधन के व्यावहारिक नुकसानों को उजागर किया गया है। वीडियो और जन शिकायतों के हवाले से दावा किया गया है कि E20 पेट्रोल के कारण गाड़ियों, खासकर पुरानी कारों और स्कूटरों के इंजन खराब हो रहे हैं। एथेनॉल की संक्षारक (corrosive) प्रकृति के कारण ईंधन प्रणाली, होज पाइप और गास्केट गल रहे हैं और इंजनों में जंग लग रही है।

माइलेज में भारी गिरावट

सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में अनिवार्य किए गए इस E20 फ्यूल की वजह से वाहनों का माइलेज 3 से 5 प्रतिशत (कुछ मामलों में इससे भी ज्यादा) कम हो गया है। यानी जनता पैसा पूरे पेट्रोल का दे रही है, लेकिन गाड़ी कम चल रही है।

वाहनों में चींटियां और तकनीकी खराबी

विपक्षी नेताओं ने वीडियो क्लिप्स के जरिए दिखाया कि एथेनॉल की मीठी प्रकृति (गन्ने से बनने के कारण) की वजह से कई वाहनों की पेट्रोल टंकियों और पाइपलाइनों में चींटियां लगने की अजीबोगरीब समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता, फिर भी 102 रुपये क्यों?

राहुल गांधी ने E20 की कीमतों और गणित पर भी गंभीर आर्थिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, ” अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ चुकी है।” इस गणित के हिसाब से देश में पेट्रोल की कीमत कम से कम 82 रुपये प्रति लीटर या उससे भी नीचे आ जानी चाहिए थी।

मिलावटी तेल पर प्रीमियम वसूली

सरकार देश में अभी भी 102 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल बेच रही है, वह भी 100% शुद्ध पेट्रोल नहीं बल्कि 20% एथेनॉल मिला हुआ E20 फ्यूल है। राहुल ने आरोप लगाया कि पहले जो सरकारें मिलावटी तेल बेचने वालों को जेल भेजती थीं, आज वह खुद जनता को मिलावटी ईंधन महंगे दामों पर बेच रही हैं।

जनता पर दोहरी मार और चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार की इस नीति के पीछे एक सोची-समझी ‘साठगांठ’ काम कर रही है। एक तरफ एथेनॉल लॉबी (विशेषकर चीनी मिल मालिकों और गन्ने से एथेनॉल बनाने वाले चुनिंदा बड़े व्यापारिक समूहों) को फायदा पहुंचाया जा रहा है। दूसरी तरफ, जब E20 फ्यूल के कारण देश की 80% पुरानी गाड़ियां कबाड़ (condemned) हो जाएंगी, तो आम जनता को मजबूरन भारी टैक्स चुकाकर नई गाड़ियां खरीदनी पड़ेंगी, जिससे सरकार के खजाने में लाखों-करोड़ों का टैक्स जाएगा। कांग्रेस ने इसे “जनता की जेब पर सीधी डकैती” करार दिया है। इसके साथ ही, विपक्ष ने इसके पर्यावरणीय दावों को भी चुनौती देते हुए कहा कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में लगभग 3500 लीटर पीने के पानी की खपत होती है, जो पर्यावरण के लिए एक दूसरा बड़ा संकट है।

सरकार का रुख: संसद में दी सफाई

E20 को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सरकार और केंद्रीय मंत्रियों (नितिन गडकरी) का कहना है कि E20 पेट्रोल नीति को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि नीति आयोग और सियाम (SIAM) की रिपोर्ट्स के अनुसार इससे वाहनों में कोई असामान्य खराबी नहीं आती। सरकार ने यह जरूर माना कि इससे माइलेज में 3 से 5 फीसदी की कमी आती है, लेकिन यह पर्यावरण के अनुकूल है और इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। सरकार का तर्क है कि जिन्हें शुद्ध पेट्रोल चाहिए, वे अधिक पैसे देकर ‘प्रीमियम 100% पेट्रोल’ का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन भविष्य एथेनॉल और स्वच्छ ईंधन का ही है।

आगामी संसद सत्र में मचेगा घमासान

राहुल गांधी के इस आक्रामक रुख और वीडियो के बाद साफ है कि विपक्ष इस मुद्दे को दबाने के मूड में नहीं है। दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक में भी E20 ईंधन से आम जनता को हो रहे नुकसान और तेल की कीमतों को एक प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दा बनाने पर सहमति बनी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के पटल पर सरकार की घेराबंदी का सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है।

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