Kanpur-Lucknow Expressway: ‘निर्माण में खामी नहीं, भारी बारिश वजह’, कंपनी की सफाई

The CSR Journal Magazine
कानपुर-लखनऊ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त होने की खबरों ने इस बड़े प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था। इसके कुछ ही समय बाद बारिश के दौरान कई जगह सड़क की सतह खराब होने, दरारें आने और सड़क के हिस्से धंसने की शिकायतें सामने आईं। मामला सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण और इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर भी सड़क की हालत की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया।

PNC इंफ्राटेक ने कहा- निर्माण मानकों का हुआ पालन

विवाद बढ़ने के बाद एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक ने अपनी सफाई दी है। कंपनी के मुताबिक, निर्माण के दौरान NHAI की ओर से तय तकनीकी मानकों और गुणवत्ता से जुड़े नियमों का पालन किया गया था। कंपनी ने निर्माण में किसी तकनीकी खामी से इनकार करते हुए कहा कि सड़क के कुछ हिस्सों में नुकसान का मुख्य कारण लगातार हुई भारी बारिश और पानी का जमा होना है। कंपनी के अनुसार, पानी भरने से सड़क के नीचे की मिट्टी बैठ गई और इसके चलते कुछ स्थानों पर सड़क प्रभावित हुई।

मरम्मत का खर्च खुद उठाएगी कंपनी

PNC इंफ्राटेक ने यह भी कहा है कि वह एक्सप्रेसवे की मरम्मत का खर्च खुद उठाएगी। कंपनी ने सड़क की मजबूती, सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हालांकि कंपनी की सफाई के बाद भी बड़ा सवाल यही है कि अगर निर्माण में सभी मानकों का पालन किया गया था, तो नई बनी सड़क मानसून की पहली बड़ी बारिश के दौरान इतनी जल्दी कैसे प्रभावित हुई। इस सवाल का स्पष्ट जवाब जांच और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा।

80 से ज्यादा जगहों पर परेशानी की रिपोर्ट

एक्सप्रेसवे पर सामने आई खराबी को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अलग-अलग रिपोर्टों में कई स्थानों पर सड़क में खराबी की बात सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक NHAI के रिकॉर्ड में 84 डिस्टे्रस पॉइंट चिन्हित किए गए थे, जिनमें दोनों दिशाओं के हिस्से शामिल थे। कुछ जगहों पर पैचवर्क किया गया, जबकि कुछ हिस्सों को दोबारा बनाने की जरूरत पड़ी। मरम्मत के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सों को सुखाने के लिए बड़े इलेक्ट्रिक पंखों के इस्तेमाल की तस्वीरें भी सामने आईं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई और एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर बहस तेज हो गई।

NHAI की कार्रवाई से भी बढ़े सवाल

मामले में NHAI की ओर से भी कार्रवाई की गई है। वहीं, एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटनाओं के बाद टोल वसूली रोकने की खबर भी सामने आई है। इसका मकसद यात्रियों की सुरक्षा और मरम्मत का काम पूरा होने तक स्थिति को नियंत्रित करना बताया गया है। इस पूरे मामले में अब सबसे अहम यह है कि सड़क को नुकसान पहुंचने की वास्तविक वजह क्या थी। अगर भारी बारिश ही मुख्य कारण है तो तकनीकी जांच में इसका आधार सामने आना चाहिए और अगर निर्माण या जल निकासी व्यवस्था में कमी पाई जाती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

करोड़ों की परियोजना, इसलिए जवाबदेही भी जरूरी

कानपुर और लखनऊ के बीच सफर को तेज और आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स में शामिल है। ऐसे में इसके निर्माण और रखरखाव को लेकर उठे सवालों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। बारिश हर साल होती है और बड़े राजमार्गों को मानसून की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही तैयार किया जाता है। इसलिए कंपनी की सफाई के साथ-साथ तकनीकी जांच के नतीजे भी महत्वपूर्ण होंगे। इससे यह साफ होगा कि सड़क को नुकसान केवल असामान्य बारिश की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई निर्माण अथवा ड्रेनेज संबंधी समस्या भी थी।

बड़ी तस्वीर: बारिश जिम्मेदार या निर्माण में कमी?

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का मामला अब सिर्फ सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनी भारी बारिश को नुकसान की वजह बता रही है, जबकि सड़क के कम समय में खराब होने से निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।अब सबकी नजर तकनीकी जांच और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट पर है। अगर जांच कंपनी के दावे की पुष्टि करती है तो बारिश से हुए नुकसान की तस्वीर साफ होगी। वहीं, यदि निर्माण में कोई कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना जरूरी होगा। फिलहाल कंपनी ने मरम्मत की जिम्मेदारी लेने की बात कही है, लेकिन करोड़ों रुपये की इस परियोजना को लेकर जनता का सबसे बड़ा सवाल यही है—नई सड़क पहली ही बड़ी बारिश में क्यों धंसी?

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