बिहार के मखाने की दुनिया में बढ़ी मांग, ऑस्ट्रेलिया रवाना हुई 18 टन की पहली खेप

The CSR Journal Magazine
बिहार के किसानों के लिए शुक्रवार का दिन खास रहा। बिहटा स्थित आधुनिक इंटीग्रेटेड इर्रेडिएशन-कम-पैकहाउस से 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग मिथिला मखाने की पहली समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना की गई। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ मखाने की एक खेप का निर्यात नहीं है, बल्कि बिहार के किसानों की मेहनत और राज्य की कृषि क्षमता को दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

अब दूसरे राज्यों के भरोसे नहीं रहेगा बिहार

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अभी तक बिहार में उत्पादित मखाने का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों के जरिए विदेशों तक पहुंचता रहा है। अब सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक मखाने का सीधा निर्यात बिहार से ही हो। इसके लिए राज्य में निर्यात से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही निर्यात की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी काम होगा, ताकि किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और कारोबारियों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

देश के 90 फीसदी मखाने का उत्पादन बिहार में

बिहार देश के मखाना उत्पादन में करीब 90 प्रतिशत योगदान देता है। मिथिला मखाना अपनी गुणवत्ता और पोषण के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से पहचान बना रहा है। मखाने में कम वसा, ग्लूटेन-फ्री गुण और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व होने के कारण इसे दुनिया भर में एक हेल्दी फूड के तौर पर पसंद किया जा रहा है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को भेजी गई नई खेप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र समेत दूसरे विदेशी बाजारों में बिहार के मखाने की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

किसानों को उत्पादन से लेकर निर्यात तक मिलेगी मदद

सरकार अब मखाना किसानों को सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें उत्पादन से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पूरी वैल्यू चेन से जोड़ने की तैयारी है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता सुधार, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और फसल के बाद प्रबंधन से जुड़ी जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरत के मुताबिक मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

निर्यात बढ़ा तो गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के मौके

मखाने के निर्यात को बढ़ावा मिलने का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ मखाने की खरीद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और मार्केटिंग से जुड़े कारोबार भी बढ़ सकते हैं। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर मखाने की खरीद-बिक्री व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाना है। इससे किसानों को बेहतर कीमत और स्थायी बाजार मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचा बिहार का मखाना

बिहार के मखाने की विदेशी बाजारों में पहुंच लगातार बढ़ रही है। सरकार के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, चीन और न्यूजीलैंड के अलावा अब ऑस्ट्रेलिया को भी जीआई-टैग और मूल्य संवर्धित मखाने का निर्यात किया जा चुका है। इससे बिहार की पहचान सिर्फ देश के सबसे बड़े मखाना उत्पादक राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों के निर्यात के क्षेत्र में भी मजबूत हो रही है।

बड़ी तस्वीर: मखाने से बदलेगी किसानों की कमाई की कहानी?

बिहार सरकार अब मखाने को सिर्फ स्थानीय बाजार का उत्पाद नहीं, बल्कि ग्लोबल ब्रांड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सीधे बिहार से निर्यात बढ़ने पर बिचौलियों की भूमिका कम करने, किसानों को बेहतर दाम दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया के लिए 18 टन की पहली समुद्री खेप इसी दिशा में एक अहम कदम है। अगर विदेशी बाजारों में बिहार के मखाने की मांग लगातार बढ़ती है, तो इसका सीधा फायदा किसानों, स्थानीय कारोबारियों और रोजगार के अवसरों को मिल सकता है।

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