भारतीय सौर मिशन को वर्ल्ड बैंक का बड़ा समर्थन, खुलेगा लाखों नौकरियों का रास्ता

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सौर ऊर्जा अभियान में आएगी तेजी, वर्ल्ड बैंक का मिला अहम समर्थन, रोजगार के अवसर का वादा

भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। सोलर रूफटॉप प्रोग्राम के तहत लाखों घरों तक साफ ऊर्जा पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 1.7 मिलियन रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। भारत ने 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है, और इस दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुफ्त बिजली योजना के तहत भी सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब, इस अभियान को वर्ल्ड बैंक का समर्थन मिल गया है, जिससे इसकी गति तेज होने की उम्मीद है।

आर्थिक मदद से सौर ऊर्जा का विस्तार

वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स ने भारत के नेशनल सोलर रूफटॉप प्रोग्राम को तेज करने के लिए आर्थिक सहायता का अनुमोदन दिया है। यह सहायता सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई दिशा देने के अलावा घरों में बिजली के खर्च को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में नॉन-फॉसिल-फ्यूल-बेस्ड ऊर्जा को बढ़ाने का वादा किया है, जिसमें सौर ऊर्जा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विश्व बैंक (World Bank) द्वारा भारत के सौर ऊर्जा अभियान (Solar Energy Mission) को वित्तीय और तकनीकी समर्थन मिलने से देश के ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को गति मिलेगी।

सरकारी योजनाओं से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

सरकार ने दो साल पहले पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य घरों में सौर पैनल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन देना है। यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों प्रकार के एक करोड़ घरों को लक्ष्य बनाकर बनाई गई है। इसके तहत घरों में सौर ऊर्जा सिस्टम लगवाने के लिए स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

वर्ल्ड बैंक की मदद का महत्व

वर्ल्ड बैंक में भारत के एक्टिंग कंट्री डायरेक्टर, पॉल प्रोसी ने कहा कि वर्ल्ड बैंक पिछले एक दशक से भारत के सोलर रूफटॉप सेक्टर में समर्थन प्रदान कर रहा है। इस समर्थन के जरिए देश में सौर ऊर्जा की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 500 MW से बढ़कर 27 GW तक पहुंची है। वर्ल्ड बैंक की नई वित्तीय मदद से घरेलू सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा, और साथ ही रोजगार के नए विकल्प भी उत्पन्न होंगे।

सौर ऊर्जा के लिए विशाल निवेश

इस प्रोग्राम के तहत कुल 2 अरब डॉलर की वित्तीय मदद प्राप्त हुई है, जिसमें इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट से 820 मिलियन डॉलर का लोन, क्लींट टेक्नोलॉजी फंड से 60 मिलियन डॉलर का रियायती लोन और 10 मिलियन डॉलर की ग्रांट शामिल है। इसके अतिरिक्त, वर्ल्ड बैंक द्वारा 4.2 अरब डॉलर की प्राइवेट फाइनेंसिंग जुटाई जाएगी।

रोजगार सृजन का बड़ा मौका

रोजगार सृजन के क्षेत्र में यह परियोजना एक गेम-चेंजर साबित होगी। सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना, सौर पैनलों के निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन और प्रणालियों के दैनिक रखरखाव के लिए बड़े पैमाने पर कार्यबल की आवश्यकता होगी। इसके कारण इंजीनियरिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और निर्माण से लेकर स्थानीय स्तर पर तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षेत्रों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से युवाओं के लिए कौशल विकास के नए मार्ग खुलेंगे, जिससे हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) में रोजगार की स्थिरता बढ़ेगी।

वैश्विक तकनीकी मंच पर भारत

तकनीकी विकास के मामले में विश्व बैंक का यह सहयोग भारत को वैश्विक मंच पर अग्रणी बनाएगा। इस वित्तीय और तकनीकी सहायता से देश में उच्च दक्षता वाले सौर सेल (Solar Cells), अगली पीढ़ी के फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल और अत्याधुनिक ग्रिड एकीकरण प्रणालियों का विकास संभव हो सकेगा। इसके अलावा, सौर ऊर्जा की निरंतरता बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर उन्नत बैटरी स्टोरेज समाधानों (Battery Storage Solutions) पर काम किया जाएगा, जिससे बिजली की बर्बादी कम होगी और राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता में अभूतपूर्व सुधार होगा।

नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन

कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उद्देश्य है। जीवाश्म ईंधनों (विशेषकर कोयले) पर निर्भरता को कम करके और स्वच्छ सौर ऊर्जा को अपनाकर भारत अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कटौती करने में सक्षम होगा। यह कदम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा और देश को साल 2070 तक तय किए गए अपने नेट-जीरो (Net-Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य को समय पर या उससे पहले हासिल करने के लिए आवश्यक गति प्रदान करेगा।

हर गांव में उजाला

ग्रामीण विद्युतीकरण के जरिए यह परियोजना भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक असमानता को दूर करेगी। ऑफ-ग्रिड सौर प्रणालियों (Off-grid Solar Systems) और मिनी-ग्रिड के माध्यम से उन गांवों तक भी निर्बाध बिजली पहुंचाई जा सकेगी जहां पारंपरिक ग्रिड पहुंचाना कठिन था। ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे बिजली मिलने से न केवल घरेलू जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि कृषि के लिए आधुनिक सिंचाई, स्वास्थ्य केंद्रों में जीवन रक्षक उपकरणों का संचालन और स्थानीय कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनेगी।

भारत सरकार की महत्त्वकांक्षी योजनाएं

भारत सरकार ने देश में सौर ऊर्जा को जन-आंदोलन बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं, जिन्हें विश्व बैंक के सहयोग से और अधिक विस्तार मिल रहा है। इनमें सबसे प्रमुख योजनाएं पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) और पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (रूफटॉप सोलर) हैं।

पीएम-कुसुम योजना

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को डीजल-मुक्त बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इस योजना को तीन प्रमुख घटकों (Components) में विभाजित किया गया है।

सौर ऊर्जा संयंत्र

किसान अपनी बंजर या कम उपजाऊ भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के छोटे ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। इससे उत्पन्न बिजली को वे स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

स्वतंत्र सौर पंप

ग्रिड कनेक्टिविटी से दूर वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सरकार द्वारा ऑफ-ग्रिड सौर कृषि पंपों की स्थापना की जाती है। इस पर सरकार की तरफ से 60% तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है।

पंपों का सौरकरण

पहले से मौजूद ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाता है, ताकि किसान जरूरत भर बिजली का उपयोग करें और बची हुई बिजली ग्रिड को बेच सकें।

पीएम-कुसुम 2.0

सरकार अब पीएम-कुसुम 2.0 के तहत एग्री-पीवी (Agri-PV) मॉडल को बढ़ावा दे रही है, जिससे किसान एक ही जमीन पर फसल भी उगा सकेंगे और बिजली भी बना सकेंगे।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (रूफटॉप सोलर)

फरवरी 2024 में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य देश के 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है। इसके तहत आवासीय उपभोक्ताओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुफ्त बिजली: इस योजना के तहत घरों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने से परिवारों को प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल सकती है।
आकर्षक सब्सिडी: सरकार द्वारा 1 किलोवाट सिस्टम पर ₹30,000, 2 किलोवाट पर ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे अधिक के सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 की वित्तीय सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाती है।
आवेदन प्रक्रिया: इसके लिए उपभोक्ता पीएम सूर्य घर पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और डिस्कॉम द्वारा स्वीकृत वेंडर्स से ही पैनल लगवाकर सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।

नयापन लाएगी पीएम सूर्य घर योजना

भारत सरकार ने 15 फरवरी, 2024 को पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत घरों को अपनी छतों पर सौर पैनल लगवाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है, जो सौर पैनलों की लागत का 40% तक कवर करेगी। इस योजना से एक करोड़ घरों को लाभ मिलने की उम्मीद है और सरकार को हर साल 75 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी।

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