CSR News: पार्कों में लग रहे ‘सोलर ट्री’, अब हरियाली के साथ होगी बिजली की भी पैदावार

The CSR Journal Magazine
मुंबई में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के जरिए शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल देखने को मिल रही है। Mumbai BMC और Nayara Energy के CSR सहयोग से शहर के सार्वजनिक उद्यानों को स्वच्छ ऊर्जा केंद्रों में बदलने की शुरुआत हुई है। मुंबई के मुलुंड (पूर्व) स्थित डॉ. चिंतामणराव देशमुख उद्यान में ‘सोलर ट्री’ परियोजना का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर मुंबई की महापौर Ritu Tawde ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक पार्कों को केवल मनोरंजन स्थलों तक सीमित न रखते हुए उन्हें ऊर्जा उत्पादन करने वाले स्मार्ट ग्रीन हब के रूप में विकसित करना है।

Mumbai CSR के जरिए ग्रीन मुंबई का सपना

यह परियोजना Nayara Energy की CSR पहल के तहत लागू की गई है। इसके अंतर्गत मुलुंड के डॉ. चिंतामणराव देशमुख उद्यान, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मनोरंजन मैदान और जोगेश्वरी के शिल्पग्राम उद्यान में आधुनिक सोलर ट्री स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा शिल्पग्राम उद्यान में सोलर गज़ेबो भी बनाया गया है। इन सभी संरचनाओं की कुल क्षमता लगभग 69.3 किलोवाट है, जिससे हर वर्ष करीब 1.24 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा।

पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना से सालाना लगभग 82 हजार किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। ऐसे समय में जब मुंबई जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों का सामना कर रही है, यह परियोजना Sustainable Urban Development का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है। CSR क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं में निवेश भविष्य के शहरों के विकास का महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।

कम जगह में ज्यादा बिजली

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी Space Efficient Technology है। पारंपरिक सोलर प्लांट्स की तुलना में सोलर ट्री तकनीक 95 से 98 प्रतिशत तक कम जगह घेरती है। मुंबई जैसे महानगर में जहां जमीन सबसे महंगी और सीमित संसाधनों में से एक है, वहां यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

सुंदरता और ऊर्जा का अनोखा संगम

पेड़ के आकार में तैयार किए गए सोलर ट्री न केवल बिजली पैदा करते हैं बल्कि पार्कों की सुंदरता भी बढ़ाते हैं। वहीं सोलर गज़ेबो लोगों को बैठने और आराम करने की सुविधा देने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा भी उत्पन्न करता है। यानी यह परियोजना केवल Renewable Energy तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और सार्वजनिक स्थलों को अधिक उपयोगी बनाने का भी प्रयास है।

CSR का बदलता स्वरूप

पिछले कुछ वर्षों में CSR गतिविधियां केवल स्कूल, अस्पताल और जल संरक्षण तक सीमित नहीं रही हैं। अब कंपनियां Smart Cities, Renewable Energy, Climate Action और Sustainable Infrastructure जैसे क्षेत्रों में भी निवेश कर रही हैं। मुंबई का यह सोलर ट्री प्रोजेक्ट इसी बदलाव का उदाहरण माना जा रहा है, जहां CSR फंडिंग सीधे पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में इस्तेमाल हो रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में मुंबई के कई अन्य उद्यानों और सार्वजनिक स्थलों पर भी ऐसी परियोजनाएं देखने को मिल सकती हैं। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा बल्कि शहर के Carbon Neutral Future की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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