जंतर-मंतर पर जब गोली चली ही नहीं, तो आदेश किसने दिया- विपक्ष के दावों पर रिजिजू के तीखे सवाल

The CSR Journal Magazine

जंतर-मंतर पर गोलीबारी बवाल: रिजिजू ने विपक्ष पर उठाए सवाल, क्या सच में हुई गोलीबारी?

देश की राजधानी के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान गोलीबारी (फायरिंग) और पैलेट गन चलने की खबरें पूरी तरह से भ्रामक और निराधार पाई गई हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद से लेकर सड़क तक झूठ और भ्रम फैलाने का सीधा आरोप लगाया है। रिजिजू ने स्पष्ट कहा कि जब जंतर-मंतर पर कोई गोली चली ही नहीं, तो यह सवाल ही पैदा नहीं होता कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया था। सरकार ने इस पूरे बवाल को विपक्ष द्वारा संसद की कार्यवाही बाधित करने और देश के युवाओं को गुमराह करने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है।

जंतर-मंतर बवाल का पूरा सच- क्या सच में हुई गोलीबारी?

जंतर-मंतर पर बीते दिनों NEET पेपर लीक और शिक्षा सुधारों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) व विभिन्न छात्र संगठनों का एक विशाल प्रदर्शन आयोजित हुआ था। इस आंदोलन ने उस समय हिंसक मोड़ ले लिया जब प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च के दौरान पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ दिया और सुरक्षाबलों पर पथराव किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया और विपक्षी गलियारों में यह दावा आग की तरह फैल गया कि दिल्ली पुलिस ने निहत्थे छात्रों पर सीधे तौर पर गोलियां और पैलेट गन चलाई हैं।

दिल्ली पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट्स का फैक्ट चेक

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर फैक्ट चेक जारी कर स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर या उसके आसपास सुरक्षाबलों द्वारा कोई गोलीबारी नहीं की गई। अस्पतालों के मेडिकल लीगल केस (MLC) रिकॉर्ड के अनुसार, किसी भी घायल छात्र या प्रदर्शनकारी के शरीर पर गोली का कोई घाव नहीं मिला है। पुलिस और डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को जो भी चोटें आईं, वे बैरिकेड्स से टकराने, कुंद वस्तुओं (ब्लंट ऑब्जेक्ट) के लगने या अफरा-तफरी में गिरने के कारण आई थीं।

पैलेट गन का सच

किरेन रिजिजू ने तर्क दिया कि यदि हजारों की भीड़ पर सच में पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता, तो सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल होते, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। जंतर-मंतर पर पैलेट गन के आरोपों को खारिज करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे राजनीतिक प्रोपेगंडा बताया।

विपक्ष का आरोप: राहुल गांधी ने खड़े किए तीखे सवाल

इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घायल छात्रों को मीडिया के सामने पेश किया और दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन, शॉक बैटन और कील लगी लाठियों से हमला किया गया। राहुल गांधी ने सीधा सवाल दागा, “जंतर-मंतर पर फायरिंग करने का आदेश आखिर गृह मंत्रालय में बैठे किस व्यक्ति ने दिया था?” उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों पर हुई इस कथित बर्बरता के लिए माफी की मांग भी की।

किरेन रिजिजू का पलटवार: ‘चर्चा से भाग रहा है विपक्ष’

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘सस्ता राजनीतिक स्टंट’ बताया। रिजिजू ने कहा कि सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद के दोनों सदनों में छात्र आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार थे। रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा:”विपक्ष केवल झूठी अफवाहें उड़ाकर सदन में हंगामा करना चाहता है। जब गृह मंत्री जवाब देने के लिए खड़े होते हैं, तो विपक्ष चर्चा से पीठ दिखाकर भाग जाता है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में सुरक्षा उपकरणों को तोड़ना, पुलिसकर्मियों को घायल करना और देश में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश करना कतई स्वीकार्य नहीं है।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लगातार भ्रामक जानकारियां फैलाकर देश के युवाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं।

विदेशी साजिश और AI-जनरेटेड प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश

जंतर-मंतर आंदोलन की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल विंग ने इस पूरे बवाल में एक बड़ा खुलासा किया है। जांच के दौरान पाया गया कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे अधिकांश वीडियो और तस्वीरें या तो पुरानी थीं या फिर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के जरिए तैयार किया गया था। इतना ही नहीं, दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से संचालित होने वाले 400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान की है, जो भारत में अशांति और भ्रम फैलाने के इरादे से जंतर-मंतर पर गोलीबारी और मौतों की झूठी खबरें पोस्ट कर रहे थे। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने देश की जनता और छात्रों से अपील की है कि वे इस तरह की किसी भी असत्यापित और भ्रामक डिजिटल सामग्री पर विश्वास न करें।

झूठ साबित हुआ विपक्ष का दावा

कुल मिलाकर, जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन निश्चित रूप से उग्र था, जिसमें 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और भारी मात्रा में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। लेकिन जहां तक गोलीबारी या पुलिस द्वारा अंधाधुंध पैलेट गन चलाने की बात है, तो यह दावा पूरी तरह झूठ साबित हुआ है। इस मुद्दे पर हो रही राजनीति केवल संसद के मानसून सत्र को बाधित करने और राजनीतिक लाभ उठाने का जरिया बनकर रह गई है।

ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos