दिल्ली सरकार राजधानी में एक ऐसा नया सचिवालय परिसर विकसित करने की तैयारी में है, जहां कई सरकारी विभागों के कार्यालय एक ही जगह पर होंगे। इसके लिए ITO क्षेत्र को प्रमुख स्थान के तौर पर चुना गया है। प्रस्तावित योजना के मुताबिक यहां करीब 50 मंजिल का हाईराइज टावर बनाया जा सकता है। इस इमारत की ऊंचाई करीब 150 मीटर रखने पर विचार हो रहा है। अगर योजना इसी रूप में आगे बढ़ती है तो यह कुतुबमीनार की 72.5 मीटर ऊंचाई से करीब दोगुनी होगी और दिल्ली की प्रमुख ऊंची सरकारी इमारतों में शामिल हो सकती है। हालांकि, अभी 50 मंजिल और 150 मीटर की ऊंचाई को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। तकनीकी जांच और जरूरी मंजूरियों के बाद ही अंतिम डिजाइन तय किया जाएगा।
एक जगह आएंगे कई सरकारी विभाग
नए सचिवालय का सबसे बड़ा उद्देश्य दिल्ली सरकार के अलग-अलग विभागों को एक ही प्रशासनिक परिसर में लाना है। अभी राजस्व, श्रम, जीएसटी, शिक्षा, परिवहन, आबकारी और खाद्य एवं आपूर्ति जैसे कई विभाग अलग-अलग जगहों से काम करते हैं। नई इमारत बनने के बाद मुख्यमंत्री, मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों के कार्यालयों को एक साथ रखने की योजना है। इससे विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और सरकारी कामकाज को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
करीब 10 एकड़ में बनेगा आधुनिक परिसर
प्रस्ताव के तहत ITO क्षेत्र में मौजूदा सरकारी परिसरों का पुनर्विकास किया जाएगा। नई योजना में पहले चर्चा में रहे दो टावरों को स्काईवॉक से जोड़ने के बजाय सड़क के दोनों ओर अलग-अलग भवन विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। करीब 10 एकड़ जमीन में सचिवालय परिसर तैयार करने की योजना बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक संशोधित योजना में मौजूदा PWD मुख्यालय और GST भवन वाले हिस्से को नए सचिवालय परिसर के रूप में विकसित करने पर विचार है। दूसरी ओर आयकर विभाग की जमीन समेत दिल्ली सरकार की जमीन को मिलाकर दूसरा हिस्सा विकसित करने की योजना है।
इतनी ऊंची इमारत के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
करीब 150 मीटर ऊंचे सरकारी भवन को तैयार करना आसान काम नहीं होगा। सरकार ने प्रस्ताव से जुड़े तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में इमारत की संरचनात्मक मजबूती, आग से सुरक्षा, भूकंपरोधी डिजाइन, लिफ्ट और आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है। दिल्ली में इमारतों की ऊंचाई से जुड़ी पाबंदियों को देखते हुए विशेषज्ञों की रिपोर्ट और संबंधित मंजूरियां भी महत्वपूर्ण होंगी।
पुराने प्लान से कितना बदला प्रस्ताव?
नए सचिवालय को लेकर पहले दो करीब 30 मंजिला ट्विन टावर और स्काईवॉक की योजना सामने आई थी। उस समय करीब 17.5 एकड़ जमीन पर दोनों टावर विकसित करने की बात कही गई थी। अब सामने आई संशोधित योजना में एक बड़े हाईराइज टावर पर ज्यादा जोर दिखाई दे रहा है। यानी परियोजना का डिजाइन और जमीन के इस्तेमाल की योजना में बदलाव किया जा रहा है। इसी वजह से फिलहाल इसे अंतिम निर्माण योजना मानना जल्दबाजी होगी।
सरकारी कामकाज से आम लोगों को भी फायदा
सरकार का उद्देश्य सिर्फ ऊंची इमारत बनाना नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों को एक जगह लाकर प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाना है। अभी किसी काम के लिए लोगों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में जाना पड़ सकता है। एकीकृत सचिवालय बनने के बाद कई विभाग एक ही परिसर में होंगे। इससे अधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर होने और फाइलों से जुड़े काम में तेजी आने की उम्मीद है।
दिल्ली को मिलेगा नया प्रशासनिक केंद्र
अगर प्रस्तावित योजना को मंजूरी मिलती है और इमारत करीब 150 मीटर ऊंची बनती है, तो यह दिल्ली की प्रमुख सरकारी इमारतों में एक नया मानक स्थापित कर सकती है। लेकिन अभी इसके डिजाइन, मंजिलों की संख्या और ऊंचाई को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।फिलहाल सबसे बड़ी बात यही है कि ITO में दिल्ली सरकार के नए सचिवालय की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है और इसमें कई विभागों को एक छत के नीचे लाने की तैयारी है।
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