रानी मुखर्जी को 30 साल के सिने करियर के लिए मेलबर्न में मिला डॉक्टरेट सम्मान

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रानी मुखर्जी: ‘मेरी फिल्में…मेरे किरदार और मेरी आवाज इतनी दूर तक पहुंचे हैं’, 30 साल का सफर, मेलबर्न में मिला सम्मान

भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी को मेलबर्न में आयोजित भारतीय फिल्म फेस्टिवल (IFFM 2026) में उनके शानदार 30 वर्षों के सिने करियर और उत्कृष्ट अभिनय के लिए विशेष प्रशस्ति पत्र (Special Citation) और ला ट्रोब यूनिवर्सिटी द्वारा प्रतिष्ठित मानद ‘डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ (Honorary Doctor of Letters) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। 13 से 23 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव के दौरान ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में यह वैश्विक सम्मान दिया गया।

मेलबर्न फिल्म फेस्टिवल में रानी मुखर्जी का डंका

भारतीय सिनेमा की ‘क्वीन’ और अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने सात समुंदर पार ऑस्ट्रेलिया की धरती पर देश का मान बढ़ाया है। ऑस्ट्रेलिया में चल रहे 17वें इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM 2026) में रानी मुखर्जी को भारतीय फिल्म उद्योग में उनके शानदार 30 साल पूरे करने, उनके उत्कृष्ट अभिनय और सिनेमा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रभाव छोड़ने के लिए विशेष प्रशस्ति पत्र (Special Citation for Excellence in Acting) देकर सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही, मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक विशेष और भव्य समारोह में ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित ला ट्रोब यूनिवर्सिटी (La Trobe University) द्वारा रानी मुखर्जी को सिनेमा और समाज में उनके अद्भुत योगदान के लिए ‘डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ (Honorary Doctor of Letters) की मानद डॉक्टरेट उपाधि से भी नवाजा गया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिले इस दोहरे बड़े सम्मान के बाद अभिनेत्री काफी भावुक नजर आईं और उन्होंने इस उपलब्धि को भारत और अपने वैश्विक प्रशंसकों को समर्पित किया।

तीन दशकों का बेमिसाल सफर और ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि

फिल्म जगत में करीब तीन दशक (30 वर्ष) का समय पूरा कर चुकीं रानी मुखर्जी ने कभी कोई ‘मास्टर प्लान’ बनाकर इस इंडस्ट्री में कदम नहीं रखा था। उन्होंने हमेशा लीक से हटकर कहानियों को चुना। ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के चांसलर माननीय जॉन ब्रम्बी एओ ने इस अवसर पर कहा, “रानी मुखर्जी का काम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उनकी फिल्मों ने सामाजिक न्याय, समानता और समावेशन (Inclusion) जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत शुरू की है। सिनेमा में उनके चिरस्थायी प्रभाव और मानवीय कारणों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए यूनिवर्सिटी उन्हें इस मानद उपाधि से सम्मानित कर बेहद गौरवान्वित है।

सम्मान पाकर भावुक हुईं रानी मुखर्जी, कहा- “भावनाओं को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती”

सम्मान स्वीकार करते हुए रानी मुखर्जी बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने वैश्विक मंच से अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा:”सिनेमा मेरे जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है। मैंने हमेशा कहानी कहने की ताकत पर भरोसा किया है जो समाज में सहानुभूति जगा सकती है और सकारात्मक बदलाव ला सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने हमेशा मेरा और भारतीय सिनेमा का खुले दिल से स्वागत किया है।  यह एक ऐसी जगह बन गई है जहां कहानियों के जरिए दो संस्कृतियां आपस में मिलती हैं। फिल्में हमें याद दिलाती हैं कि मानवीय भावनाओं को किसी पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती और प्यार, उम्मीद व हंसी एक ऐसी सार्वभौमिक भाषा बोलते हैं जिसे दुनिया का हर इंसान समझता है। “रानी मुखर्जी ने अपने प्रशंसकों का आभार जताते हुए आगे कहा, “एक एक्टर के तौर पर हम कैमरे के सामने केवल अभिनय करते हैं, लेकिन असली जादू तब होता है जब वह परफॉर्मेंस सीमाओं को लांघकर सात समुंदर पार किसी के दिल तक पहुंचती है। यह जानकर मेरा सिर सम्मान से झुक जाता है कि पिछले 30 वर्षों में मेरी फिल्में, मेरे निभाए किरदार और मेरी आवाज घर (भारत) से इतनी दूर आकर आप लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन सके।”

“निडर महिलाओं के किरदारों ने मुझे बेहतर इंसान बनाया”

अपने करियर की बेहतरीन भूमिकाओं को याद करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि वे खुद को बेहद भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें ऐसी महिलाओं के पर्दे पर जीवंत करने के मौके मिले जो खुलकर हंसीं, जिन्होंने निडर होकर लड़ाइयां लड़ीं और कभी भी खुद पर से विश्वास नहीं खोया। उन्होंने स्वीकार किया कि कई मायनों में उनके द्वारा निभाए गए हर एक मजबूत किरदार ने उन्हें थोड़ा-बहुत बदला है। इन किरदारों ने उन्हें न केवल एक बेहतर और परिपक्व अभिनेत्री बनाया, बल्कि उससे भी कहीं बढ़कर एक संवेदनशील और बेहतर इंसान बनने में मदद की।

‘ब्लैक’ से लेकर ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ तक का सफर

रानी मुखर्जी का सिनेमाई सफर बहुमुखी प्रतिभा का प्रतीक रहा है। मेलबर्न फिल्म फेस्टिवल में उनकी ऐतिहासिक फिल्मों की चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं-
ब्लैक (Black): जिसमें उन्होंने एक मूक-बधिर लड़की मिशेल मैक्नेली का किरदार निभाकर अभिनय की नई परिभाषा लिखी।
मर्दानी फ्रेंचाइजी (Mardaani): शिवानी शिवाजी रॉय जैसी निडर और जांबाज पुलिस अफसर का किरदार, जिसकी अगली कड़ी ‘मर्दानी 3’ भी हाल ही में चर्चा में रही है।
हिचकी (Hichki): टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित एक शिक्षिका नैना माथुर की कहानी, जिसने वैश्विक स्तर पर शिक्षा और समानता की अलख जगाई।
मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे (Mrs. Chatterjee vs Norway): एक मां की अपने बच्चों के लिए पूरे देश के सिस्टम से ऐतिहासिक लड़ाई, जिसके लिए रानी मुखर्जी को हाल ही में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) से भी सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा वीर-ज़ारा, युवा, हम तुम, बंटी और बबली और नो वन किल्ड जेसिका जैसी कल्ट फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा की गूंज

मेलबर्न का यह भारतीय फिल्म महोत्सव (IFFM) वैश्विक स्तर पर भारतीय कहानियों को प्रदर्शित करने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। इस साल फेस्टिवल में रानी मुखर्जी के साथ-साथ भारतीय सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री रेखा भी ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ के रूप में शामिल हुईं, वहीं ‘कांतारा’ फेम राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने भी अपनी उपस्थिति से समारोह में चार चांद लगाए।  फेस्टिवल की डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा कि रानी मुखर्जी जैसी वैश्विक आइकन को सम्मानित करना इस महोत्सव के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो यह साबित करता है कि भारतीय सिनेमा की गूंज अब पूरी दुनिया में मजबूती से सुनी जा रही है।

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