कूरियर से लेकर सेफ हाउस तक: CBI जांच में खुली NEET पेपर लीक के गहरे रहस्य की परतें

The CSR Journal Magazine

नीट पेपर लीक: CBI ने खुलासा किया, महीनों पहले बनी थी साजिश, पेपर लीक का रहस्य

देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) में हुई धांधली को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है। CBI की जांच में यह साफ हो गया है कि मेडिकल परीक्षा के पेपर को लीक करने की यह साजिश कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि इसके पीछे महीनों लंबी एक सुनियोजित प्लानिंग और देशव्यापी नेटवर्क काम कर रहा था। इस लीक कांड ने न केवल लाखों छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया, बल्कि देश की शीर्ष परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा प्रणाली की पोल भी खोल कर रख दी है। जांच एजेंसी द्वारा हाल ही में दायर की गई चार्जशीट और आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल का ताना-बाना परीक्षा आयोजित होने से कई महीने पहले ही बुन लिया गया था।

महीनों पहले रखी गई थी साजिश की नींव

CBI के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, नीट परीक्षा के आयोजन से करीब तीन से चार महीने पहले यानी साल के शुरुआती महीनों में ही इस साजिश की रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई शातिर सॉल्वर गैंग और शिक्षा माफियाओं ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया था। इस सिंडिकेट का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र को हासिल करना और उसे चुनिंदा मोटी रकम देने वाले उम्मीदवारों तक पहुंचाना था। जांच में सामने आया है कि इस साजिश के लिए बकायदा एडवांस बुकिंग की गई थी। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे बिचौलियों को जोड़ा गया था, जिनका सीधा संपर्क मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों से था।

कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?

इस पूरे रैकेट का संचालन किसी कॉरपोरेट कंपनी की तरह किया जा रहा था। इसमें काम का बंटवारा बेहद पेशेवर तरीके से किया गया था-
फंड मैनेजर: जिनका काम अभिभावकों से एडवांस रकम वसूलना और आगे लीक करने वालों को एडवांस पहुंचाना था।
सॉल्वर गैंग: देश के नामी मेडिकल कॉलेजों के मेधावी छात्रों को इस गैंग में शामिल किया गया था, जिनका काम लीक पेपर को चंद मिनटों में हल करना था।
लॉजिस्टिक्स टीम: इस टीम की जिम्मेदारी छात्रों को सुरक्षित ठिकानों (जैसे पटना का प्ले एंड लर्न स्कूल या झारखंड के गेस्ट हाउस) तक पहुंचाना और वहां मोबाइल नेटवर्क जैमर के बीच पेपर रटवाना था। गैंग ने इसके लिए कई कोडवर्ड्स का इस्तेमाल किया था ताकि पुलिस या खुफिया एजेंसियों को भनक न लग सके।

कूरियर और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में सेंध

CBI के खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पेपर लीक परीक्षा के दिन सुबह नहीं, बल्कि उससे पहले ही ट्रंक (बक्से) से उड़ाया जा चुका था। जांच के अनुसार, झारखंड के हजारीबाग में एक कूरियर कंपनी के कार्यालय या बैंक के स्ट्रांग रूम में रखे प्रश्नपत्रों के बक्शों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। साजिशकर्ताओं ने बेहद शातिराना अंदाज में बक्से के डिजिटल लॉक और सील को इस तरह से तोड़ा कि पहली नजर में किसी को शक न हो। वहां से प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींचकर तुरंत मुख्य सरगना को भेजी गईं। इसके बाद, आधुनिक मैसेजिंग ऐप्स के जरिए इस गोपनीय सामग्री को सॉल्वर गैंग तक फॉरवर्ड किया गया।

पटना और रांची के ‘सेफ हाउस’ का रहस्य

जांच एजेंसी ने बिहार की राजधानी पटना और झारखंड के रांची व हजारीबाग में कई ऐसे ‘सेफ हाउस’ (गुप्त ठिकानों) की पहचान की है, जिन्हें परीक्षा से एक महीने पहले ही किराए पर लिया गया था। परीक्षा से ठीक एक रात पहले यानी कइयों को 4 मई की रात को ही इन ठिकानों पर लाया गया था। इन सेफ हाउसेज में लगभग 20 से 25 छात्रों को एक साथ रखा गया था। उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे ताकि कोई जानकारी बाहर न जा सके। सॉल्वर गैंग द्वारा तैयार किए गए उत्तरों (आंसर की) को छात्रों को पूरी रात रटवाया गया। सुबह होते ही इन छात्रों को सीधे परीक्षा केंद्रों पर छोड़ दिया गया।

करोड़ों का टर्नओवर और डिजिटल ट्रांजैक्शन

सीबीआई की वित्तीय जांच शाखा ने इस मामले में भारी-भरकम रकम के लेन-देन का भी पर्दाफाश किया है। प्रत्येक छात्र से नीट का पेपर और आंसर की उपलब्ध कराने के बदले 30 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक का सौदा तय हुआ था। इस अवैध कमाई को खपाने के लिए साजिशकर्ताओं ने फर्जी नामों से बनाई गई कंपनियों के खातों का इस्तेमाल किया। नकदी के बड़े हिस्से को एक राज्य से दूसरे राज्य भेजने के लिए हवाला का सहारा लिया। कुछ मुख्य आरोपियों द्वारा विदेशों में बैठे अपने सहयोगियों को डिजिटल करेंसी के रूप में भुगतान करने के सुराग भी मिले हैं।

तकनीक का दुरुपयोग और प्रिविलेज्ड एक्सेस

इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। आरोपियों ने ऐसे कम्यूनिकेशन ऐप्स का उपयोग किया जो ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ थे और जिनमें मैसेज अपने आप डिलीट (Disappearing Messages) हो जाते थे। इसके अलावा, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या NTA या कूरियर एजेंसी के किसी अंदरूनी सूत्र ने इन अपराधियों को ‘प्रिविलेज्ड एक्सेस’ यानी गोपनीय जानकारी तक पहुंच प्रदान की थी। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर कूरियर और लॉजिस्टिक्स चेन को भेदना नामुमकिन था।

अब तक की कार्रवाई और आगे की राह

सीबीआई ने इस मामले में देश भर के अलग-अलग राज्यों से मुख्य सरगना संजीव मुखिया गैंग के सदस्यों, रॉकी, चिंटू और हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल सहित दर्जनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जो इस साजिश के अंतरराष्ट्रीय या अंतर-राज्यीय कनेक्शन को साबित करती हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और सरकार के कड़े रुख के बाद, सीबीआई इस मामले में एक ऐसी पुख्ता चार्जशीट तैयार कर रही है जिससे अदालतों में दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

पेपर लीक माफिया का जाल

NEET पेपर लीक का यह रहस्य केवल कुछ लोगों की धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की रीढ़ यानी हमारी शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर एक बड़ा आघात है। महीनों पहले रची गई यह साजिश दर्शाती है कि शिक्षा माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं। सीबीआई की इस विस्तृत और परत-दर-परत जांच से उम्मीद जगी है कि भविष्य में ऐसी परीक्षाओं की शुचिता बरकरार रहेगी और लाखों ईमानदार छात्रों के साथ न्याय हो सकेगा।

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