बदहाली का 80वां साल: कंगाली के मुहाने पर खड़ा पाकिस्तान

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आजादी मना रहा 80 साल का पाकिस्तान! कंगाली के ये निशान बयान कर रहे उसके असली हालात

आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर रहा पाकिस्तान आज अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक और नीतिगत संकट से जूझ रहा है। 14 अगस्त को इस्लामाबाद और कराची की सड़कों पर भले ही जश्न की आतिशबाजी देखी गई हो, लेकिन कंगाली, आसमान छूती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय कर्ज के बोझ ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की बैसाखियों और विदेशी इमदाद पर निर्भर हो चुका है। वित्तीय संकट के बीच शहबाज शरीफ सरकार द्वारा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करना देश के असली और बदतर हालातों को बयां करता है।

‘कागजी’ आजादी और कर्ज का कटोरा

पाकिस्तान ने ब्रिटिश हुकूमत से अलग होने की अपनी वर्षगांठ तो मना ली, लेकिन देश की संप्रभुता इस समय भारी कर्ज के नीचे दबी हुई है। कभी विकास के दावों के साथ दुनिया के सामने खड़े होने वाले पाकिस्तान का कुल केंद्रीय सरकारी कर्ज इस समय 83.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (Rs 83.64 Lakh Crore) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पिछले 4 वर्षों में इस कर्ज में 75 फीसदी से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया है, जो यह साबित करता है कि देश की हुकूमतें केवल ‘आज खर्च करो, कल कर्ज लो’ की नीति पर चल रही हैं।

कंगाली के वो 5 बड़े निशान जो बयां कर रहे हैं असली हकीकत

पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक हालात को समझने के लिए देश के बुनियादी आर्थिक संकेतकों और जमीनी सच्चाई पर नजर डालना जरूरी है, जिनकी वजह से आज आजादी के 80 साल बाद पाकिस्तान इस बदहाली के कगार पर पहुंचा है।

IMF का 25वां लाइफलाइन पैकेज और कर्ज का जाल

पाकिस्तान अपने आर्थिक इतिहास में अब तक 25 बार IMF से वित्तीय मदद ले चुका है। वर्तमान में देश 7 अरब डॉलर के IMF बेलआउट प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है। मई 2026 में ही IMF की समीक्षा के बाद 1.1 अरब डॉलर की एक और किस्त जारी की गई थी, ताकि देश को डिफॉल्ट (दिवालिया) होने से बचाया जा सके। हालत यह है कि देश का सार्वजनिक कर्ज GDP का लगभग 70% हो चुका है और राजस्व का आधा से अधिक हिस्सा केवल पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर महंगाई का एक और बड़ा झटका

आजादी के जश्न के बीच पाकिस्तानी आवाम को सरकार ने एक और आर्थिक जख्म दिया। 14 अगस्त को ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की घोषणा की गई। डेली प्राइसिंग मैकेनिज्म के तहत पाकिस्तान में पेट्रोल 320 रुपये और डीजल 380 रुपये प्रति लीटर के पार बिक रहा है। इससे आवश्यक खाद्य वस्तुओं, परिवहन और बिजली की दरों में भारी उछाल आया है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है।

गरीबी की दलदल: 9.5 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में

वर्ल्ड बैंक (विश्व बैंक) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का मौजूदा आर्थिक मॉडल अब गरीबी कम करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुका है। देश की लगभग 9.5 करोड़ (95 मिलियन) आबादी इस समय भीषण गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है। पिछले कुछ समय में ही 1.25 करोड़ से अधिक लोग मिडिल क्लास से फिसलकर इस गरीबी के जाल में फंस गए हैं। बुनियादी स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों की भारी कमी है।

बढ़ता करंट अकाउंट घाटा (Current Account Deficit)

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक देश का करंट अकाउंट फिर से घाटे में बदल गया और जून महीने में यह 649 मिलियन डॉलर का मासिक घाटा दर्ज कर चुका है। विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों द्वारा रिकॉर्ड 41.59 अरब डॉलर की प्रेषित रकम (Remittances) भेजने के बावजूद कमजोर निर्यात और बढ़ती आयात लागत के कारण बाहरी खाता दबाव में है।

भारी सैन्य खर्च बनाम बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर

एक तरफ जहां पाकिस्तान के पास विकास कार्यों (Development Expenditure) के लिए बजट की भारी कमी है, वहीं दूसरी तरफ सेना और रक्षा बजट पर खर्च लगातार बढ़ाया जा रहा है। आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद और पड़ोसी देशों के साथ जारी तनाव के कारण संसाधन जनता के कल्याण के बजाय हथियारों की खरीद और रक्षा तंत्र को बनाए रखने में झोंके जा रहे हैं।

क्यों फेल हो रही हैं आर्थिक नीतियां?

पाकिस्तान के इस बदतर आर्थिक ढर्रे के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि दशकों की खराब नीतियां शामिल हैं। पाकिस्तान में कृषि, रियल एस्टेट और खुदरा व्यापार जैसे बड़े और प्रभावशाली क्षेत्रों पर टैक्स नहीं के बराबर है। सारा बोझ केवल पंजीकृत वेतनभोगी मध्यम वर्ग और वैध व्यवसायों पर डाल दिया जाता है।

भ्रष्टाचार और खराब गवर्नेंस

नौकरशाही का पतन और संस्थागत भ्रष्टाचार पाकिस्तान के लिए एक स्थायी महामारी बन चुका है। नीतियों का क्रियान्वयन कागजों तक ही सीमित रहता है। बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लीकेज, कुप्रबंधन और सब्सिडी के कारण अरबों रुपये का आंतरिक कर्ज (Circular Debt) जमा हो चुका है, जो सरकारी खजाने को खोखला कर रहा है।

पाक के आत्मनिरीक्षण का समय

80वें साल का यह जश्न पाकिस्तान के लिए आत्मनिरीक्षण का समय है। जब तक देश कड़े प्रशासनिक सुधार नहीं करता, टैक्स का दायरा नहीं बढ़ाता और आतंकी व सैन्य प्राथमिकताओं को छोड़कर आर्थिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित नहीं करता, तब तक कर्ज और कंगाली का यह चक्रव्यूह टूटना नामुमकिन नजर आता है।

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