भारत की एक्सप्रेसवे क्रांति बनाम पाकिस्तान का ढहता इंफ्रास्ट्रक्चर

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भारत के शानदार एक्सप्रेसवे बनाम पाकिस्तान का खस्ताहाल इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत का एक्सप्रेसवे नेटवर्क आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचों (Infrastructure) में से एक है। एक तरफ जहां भारत आधुनिक और हाई-टेक सड़कों का जाल बिछा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय संकट और रखरखाव की कमी के कारण गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।

भारत का तेजी से बढ़ता एक्सप्रेसवे नेटवर्क

भारत में एक्सप्रेसवे का विकास तेजी से हो रहा है। केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर दिया है। नए वित्तीय वर्ष में भारत में एक्सप्रेसवे के जरिए सफर करने के लिए नए रस्ते खुलने वाले हैं, जो न केवल यातायात को सुगम बनाएंगे, बल्कि आर्थिक विकास में भी सहायक होंगे। इसका असर व्यापार, पर्यटन और रोजगार पर पड़ेगा।

भारत का एक्सप्रेसवे नेटवर्क

भारत में हर साल हजारों किलोमीटर नए एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे जोड़े जा रहे हैं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और समृद्धि महामार्ग (मुंबई-नागपुर) जैसे प्रोजेक्ट्स गेम-चेंजर साबित हुए हैं। ये एक्सप्रेसवे औद्योगिक कॉरिडोर को आपस में जोड़ते हैं, जिससे माल ढुलाई का समय और लागत आधी हो गई है। नई सड़कों पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), ऑटोमैटिक टोल कलेक्शन (Fastag) और आपातकालीन सुविधाएं मौजूद हैं।

पाकिस्तान में फंड की कमी से रुके प्रोजेक्ट

दूसरी तरफ, पाकिस्तान में हालात खासे खराब हैं। वहां के रावलपिंडी डिवीजन में विकास आवंटन में भारी कटौती की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड संकट के कारण छह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया गया है। इससे वहां के नागरिकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पाकिस्तान का वार्षिक विकास कार्यक्रम प्रभावित

रावलपिंडी, अटॉक, झेलम, चकवाल, तलगंग और मरी जैसे क्षेत्रों में वार्षिक जिला विकास कार्यक्रमों के बजट में करीब 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। यह स्थिति न केवल आर्थिक विकास को बाधित कर रही है, बल्कि नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी बुरा असर डाल रही है। कई स्कूल, अस्पताल और सड़कों का निर्माण ठप्प हो गया है।

पाकिस्तान के इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियाँ

आर्थिक तंगी और भारी विदेशी कर्ज के कारण पाकिस्तान नए बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू करने या पुराने हाईवे के रखरखाव में असमर्थ है। पाकिस्तान का ज्यादातर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत बना है, जिससे देश पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। बजट न होने के कारण मौजूदा सड़कें और मोटरवे समय के साथ जर्जर हो रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

पाक बनाम भारत

भारत और पाकिस्तान के लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट (Logistics & Transport Cost) के बीच एक बहुत बड़ा अंतर आ चुका है। भारत ने जहां इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर अपनी लागत को तेजी से घटाया है, वहीं पाकिस्तान अक्षम ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण भारी-भरकम लागत से जूझ रहा है।

मुख्य तुलनात्मक सूचकांक

विशेषता / पैरामीटर –  भारत (India) –  पाकिस्तान (Pakistan)
जीडीपी में लॉजिस्टिक्स लागत – 8% से 10% (तेजी से गिरावट जारी) -15.6% (विकसित देशों से दोगुनी)
LPI रैंकिंग (World Bank) – 38वीं रैंक (ग्लोबल लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस) – काफी पीछे (रैंकिंग में लगातार गिरावट)
मुख्य ट्रांसपोर्ट माध्यम – मल्टी-मोडल (सड़क, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्ग) – अत्यधिक निर्भरता (94% से अधिक माल ढुलाई सिर्फ सड़क से)
ट्रकों की संख्या – 12.5 मिलियन (1.25 करोड़) पंजीकृत ट्रक – 3 लाख (300,649) पंजीकृत ट्रक
डिजिटलाइजेशन – FASTag, e-Way Bill, ULIP पोर्टल – मैनुअल चेकपोस्ट, अत्यधिक कागजी कार्रवाई और देरी

भारत की बेहतर स्थिति के मुख्य कारण

लॉजिस्टिक्स लागत में ऐतिहासिक गिरावट: सरकारी आंकड़ों (DPIIT-NCAER) के अनुसार, भारत ने $360 बिलियन के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और PM Gati Shakti Master Plan के दम पर अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 13-14% से घटाकर 7.97% – 10% के दायरे में ला दिया है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC): मालगाड़ियों के लिए अलग से रेलवे ट्रैक बनाने से माल ढुलाई का समय और लागत दोनों 50% तक कम हो गए हैं।
हाई-टेक टोलिंग और डिजिटल गवर्नेंस: FASTag और डिजिटल ट्रैकिंग की वजह से चेकपोस्ट पर ट्रकों का समय बर्बाद नहीं होता, जिससे ईंधन और पैसे दोनों की बचत होती है।

भारत की ओर लोगों का आकर्षण बढ़ता

भारत में लगातार हो रहे विकास कार्यों के कारण लोग यहां रोजगार की तलाश में आ रहे हैं। विकास के नए रास्तों के चलते भारत की सड़कों पर यातायात बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे की वजह से यात्रा का समय कम हो गया है, जिससे लोग जल्दी अपनी मंजिल पर पहुंच सकते हैं। साथ ही, बाजारों में रौनक भी बढ़ी है।

एक्सप्रेसवे से होगा व्यापार में इजाफा

भारत में बनने वाले इन नए एक्सप्रेसवे का मुख्य उद्देश्य व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देना है। सड़क परिवहन के सुगम साधनों के चलते व्यापारी भी ज्यादा खुश हैं। इससे छोटे दर्जे के व्यवसायियों को भी फायदा होगा और वे अपनी सेवाएं आसानी से लोगों तक पहुंचा सकेंगे।

पाकिस्तान के सामने चुनौतियाँ बढ़ रहीं

इस आर्थिक संकट के चलते पाकिस्तान सरकार को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहां के नेता बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन फंड की कमी सीधा असर डाल रही है। इससे वहां की जनता में असंतोष भी बढ़ रहा है, जो राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।

भारत का नेतृत्व विकास की ओर

भारत में सरकार का जोर लगातार विकास पर है। नए प्रोजेक्ट्स के चलते यह देश एक्सप्रेसवे के जरिए इंटरनेशनल बिजनेस को भी आकर्षित कर रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत एक उभरते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर हब की ओर बढ़ रहा है, जो वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने में सक्षम है।

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