महालक्ष्मी में रेलवे ट्रैक के ऊपर बनेगा मुंबई का पहला BMC केबल-स्टेड ब्रिज, हाजी अली से कोस्टल रोड तक सफर होगा आसान
मुंबई में सड़क यातायात को सुगम बनाने और पुराने बुनियादी ढांचे को आधुनिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन के पास सात रास्ता और महालक्ष्मी मैदान को जोड़ने वाला नया केबल-स्टेड पुल 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पुल कई मायनों में खास है, क्योंकि रेलवे ट्रैक के ऊपर बनने वाला यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का पहला केबल-स्टेड पुल होगा। यह पुल न केवल महालक्ष्मी क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही यातायात की समस्या को कम करने में मदद करेगा, बल्कि हाजी अली, महालक्ष्मी और कोस्टल रोड की ओर आने-जाने वाले वाहनों के लिए भी एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराएगा। परियोजना पूरी होने के बाद पुराने पुल पर निर्भरता कम होगी और क्षेत्र में यातायात का दबाव घटने की उम्मीद है।
31 दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
BMC ने इस परियोजना को अब निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया है। 13 अगस्त 2026 को अतिरिक्त नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बंगर ने केशवराव खाड्ये मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को काम में तेजी लाने तथा लंबित अनुमतियों और तकनीकी अड़चनों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए। परियोजना का काम पहले मार्च 2024 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन कई कारणों से इसकी समयसीमा आगे बढ़ती गई। अतिक्रमण हटाने, पेड़ों से संबंधित प्रक्रिया, डिजाइन में बदलाव और रेलवे क्षेत्र में निर्माण के लिए आवश्यक समन्वय के कारण परियोजना में देरी हुई। अब बीएमसी का लक्ष्य बचा हुआ काम तेजी से पूरा करके दिसंबर के अंत तक पुल को यातायात के लिए तैयार करना है।
क्यों जरूरी है यह पुल?
महालक्ष्मी स्टेशन और उसके आसपास का इलाका मुंबई के व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। यहां रेलवे लाइन, प्रमुख सड़क मार्ग, व्यावसायिक गतिविधियां और दक्षिण मुंबई की ओर जाने वाले यातायात का दबाव एक साथ दिखाई देता है। पुराने पुल और आसपास के सड़क नेटवर्क पर वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण कई बार यातायात धीमा हो जाता है। नया पुल सात रास्ता और महालक्ष्मी मैदान के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगा। इसका सीधा लाभ स्थानीय निवासियों, कार्यालय जाने वाले लोगों, सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहन चालकों को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा हाजी अली और कोस्टल रोड की दिशा में जाने वाले वाहनों के लिए भी यह पुल महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। इससे वाहन चालकों को आसपास की सड़कों पर अनावश्यक चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है और यातायात का प्रवाह अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
165 मीटर का रेलवे हिस्सा बना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरने वाला हिस्सा है। रेलवे लाइनों के ऊपर लगभग 165 मीटर लंबे स्पैन के कारण सामान्य पिलर आधारित पुल का निर्माण व्यावहारिक नहीं था। रेलवे परिचालन को प्रभावित किए बिना इतने लंबे हिस्से को पार करने के लिए विशेष संरचनात्मक डिजाइन की आवश्यकता थी। इसी वजह से पुल को केबल-स्टेड डिजाइन में तैयार किया जा रहा है। इस तकनीक में पुल के मुख्य हिस्से को ऊंचे पायलोन और केबलों के सहारे मजबूती दी जाती है। इससे बीच में बड़ी संख्या में पिलर खड़े करने की आवश्यकता कम हो जाती है, जो रेलवे ट्रैक के ऊपर निर्माण के मामले में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस तरह का डिजाइन पुल के भार को केबल और पायलोन के माध्यम से नियंत्रित तरीके से स्थानांतरित करता है। मुंबई जैसे घनी आबादी और सीमित जगह वाले शहर में ऐसे इंजीनियरिंग समाधान महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
78.5 मीटर ऊंचा पायलोन तैयार
परियोजना के पश्चिमी हिस्से में महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है। लगभग 95 मीटर लंबा पश्चिमी हिस्सा पूराकिया जा चुका है। इसके अलावा पुल का करीब 78.5 मीटर ऊंचा पायलोन भी खड़ा किया जा चुका है। पायलोन इस केबल-स्टेड पुल का प्रमुख संरचनात्मक हिस्सा होगा। इससे जुड़े केबल पुल के डेक को सहारा देंगे और रेलवे लाइन के ऊपर लंबे स्पैन को सुरक्षित तरीके से पार करने में मदद करेंगे। अब परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण रेलवे परिसर के भीतर आने वाले हिस्से का निर्माण है।
रेलवे की अनुमति का इंतजार
पुल का लगभग 165 मीटर लंबा पूर्वी हिस्सा रेलवे परिसर के अंदर आता है। इस हिस्से में काम शुरू करने के लिए पश्चिम रेलवे से आवश्यक ‘ब्लॉक’ या निर्माण के लिए निर्धारित अनुमति की जरूरत है। रेलवे लाइन के ऊपर या उसके आसपास किसी भी बड़े निर्माण कार्य के लिए रेलवे परिचालन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसलिए निर्माण एजेंसी और बीएमसी को रेलवे के साथ समन्वय करके ऐसे समय और तरीके का निर्धारण करना होता है, जिससे ट्रेन सेवाओं पर न्यूनतम प्रभाव पड़े और निर्माण कार्य सुरक्षित ढंग से किया जा सके।यही कारण है कि रेलवे ब्लॉक मिलने की प्रक्रिया इस परियोजना के समय पर पूरा होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पश्चिमी हिस्से में भी ट्रैफिक पुलिस की मंजूरी जरूरी
परियोजना से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा पश्चिमी हिस्से के पांच पिलरों का निर्माण है। इन पिलरों के लिए सड़क क्षेत्र में काम करना होगा, जिसके लिए ट्रैफिक पुलिस की अनुमति आवश्यक है। निर्माण के दौरान यातायात को बाधित होने से बचाने के लिए बीएमसी एक कंक्रीट सर्विस रोड भी तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों और मौजूदा यातायात को अलग-अलग रखना तथा वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है। मुंबई जैसे अत्यधिक व्यस्त शहर में बड़े पुल का निर्माण केवल इंजीनियरिंग चुनौती नहीं होता, बल्कि यातायात प्रबंधन भी उतनी ही बड़ी चुनौती होती है। इसलिए परियोजना के प्रत्येक चरण में ट्रैफिक पुलिस, रेलवे और महानगरपालिका के बीच समन्वय आवश्यक है।
एक सदी पुराने पुल की जगह लेगा नया ढांचा
नया केबल-स्टेड पुल जिस पुराने पुल की जगह लेगा, वह करीब एक सदी पुराना बताया जाता है। लंबे समय से उपयोग में रहे इस पुल की जगह आधुनिक संरचना तैयार करना इलाके की परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम है। पुराने पुलों की क्षमता, चौड़ाई और वर्तमान यातायात की जरूरतों के बीच अंतर समय के साथ बढ़ता गया है। मुंबई की आबादी और वाहनों की संख्या में वृद्धि के कारण पुराने सड़क ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नए पुल का निर्माण केवल एक सड़क संपर्क परियोजना नहीं, बल्कि शहर के पुराने परिवहन ढांचे के आधुनिकीकरण का हिस्सा भी है।
हाजी अली और कोस्टल रोड कनेक्टिविटी को मिलेगा फायदा
महालक्ष्मी क्षेत्र दक्षिण मुंबई के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने वाली सड़क व्यवस्था का हिस्सा है। हाजी अली से आने वाला यातायात, महालक्ष्मी स्टेशन के आसपास की आवाजाही और कोस्टल रोड की ओर बढ़ता वाहन प्रवाह इस पूरे क्षेत्र को व्यस्त बनाता है। नए पुल के शुरू होने के बाद सात रास्ता और महालक्ष्मी मैदान के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे आसपास के मार्गों पर वाहनों का दबाव वितरित किया जा सकता है।विशेष रूप से उन वाहन चालकों को राहत मिलने की संभावना है जिन्हें वर्तमान सड़क नेटवर्क में सीमित विकल्पों के कारण व्यस्त मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। हालांकि वास्तविक यातायात राहत पुल शुरू होने के बाद वाहन प्रवाह, सिग्नल व्यवस्था और आसपास के सड़क नेटवर्क के इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।
परियोजना का ठेका संयुक्त उद्यम को
इस पुल के निर्माण का ठेका Apco Infrateck और China Railway First Group की संयुक्त उद्यम कंपनी को दिया गया है। परियोजना में आधुनिक पुल निर्माण तकनीक के साथ-साथ रेलवे क्षेत्र में सुरक्षित निर्माण की विशेष व्यवस्था की जा रही है। रेलवे ट्रैक के ऊपर बड़े स्पैन वाले पुल का निर्माण तकनीकी रूप से जटिल होता है। इसमें डिजाइन, निर्माण सामग्री, भार क्षमता, केबल प्रणाली, पायलोन, रेलवे सुरक्षा और निर्माण के दौरान ट्रेनों की आवाजाही जैसे कई पहलुओं का ध्यान रखना पड़ता है।
परियोजना में देरी की वजहें
महालक्ष्मी केबल-स्टेड पुल परियोजना को पहले मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन निर्धारित समयसीमा में काम पूरा नहीं हो सका। इसके पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण बताए गए हैं। सबसे पहले अतिक्रमण से संबंधित प्रक्रिया ने काम की गति को प्रभावित किया। इसके बाद पेड़ों को हटाने और उससे जुड़ी आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया भी परियोजना के लिए चुनौती बनी। परियोजना के डिजाइन में बदलाव किए जाने के कारण भी निर्माण कार्यक्रम प्रभावित हुआ। इसके अतिरिक्त रेलवे परिसर के भीतर निर्माण कार्य के लिए पश्चिम रेलवे से समन्वय और अनुमति की आवश्यकता है। रेलवे परिचालन को सुरक्षित रखते हुए बड़े हिस्से का निर्माण करना अपने आप में जटिल प्रक्रिया है। अब बीएमसी इन सभी बाधाओं को दूर करके परियोजना को अंतिम चरण में ले जाने की कोशिश कर रही है।
मुंबई के लिए क्यों खास है केबल-स्टेड तकनीक?
केबल-स्टेड पुलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें लंबे स्पैन को अपेक्षाकृत कम संख्या में सहारे के साथ पार किया जा सकता है। रेलवे ट्रैक, नदी या किसी अत्यधिक व्यस्त सड़क के ऊपर पुल बनाते समय यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी होती है। महालक्ष्मी परियोजना में रेलवे ट्रैक के ऊपर 165 मीटर लंबे हिस्से को पार करना है। यदि इस पूरे हिस्से के बीच में सामान्य पिलर बनाए जाते, तो रेलवे परिचालन और सुरक्षा दोनों के लिहाज से बड़ी चुनौती पैदा हो सकती थी। इसलिए केबल-स्टेड समाधान अपनाया गया है। यह परियोजना मुंबई में महानगरपालिका की पुल निर्माण क्षमता और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के इस्तेमाल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकती है।
दिसंबर तक पूरा होने पर क्या बदलेगा?
यदि पुल 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होकर यातायात के लिए खोल दिया जाता है, तो महालक्ष्मी और सात रास्ता के बीच सड़क संपर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पुराने पुल पर यातायात का दबाव कम होने के साथ आसपास के मार्गों पर भी वाहनों का बेहतर वितरण संभव है।महालक्ष्मी स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों और रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि पुल के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके शुरू होने के बाद ही किया जा सकेगा। मुंबई में सड़क और रेलवे दोनों का यातायात एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में रेलवे लाइन के ऊपर बनने वाला यह पुल सड़क संपर्क को मजबूत करने के साथ शहर के परिवहन ढांचे के दो महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकता है।
अब निगाहें अंतिम चरण पर
फिलहाल परियोजना के पश्चिमी हिस्से का महत्वपूर्ण काम पूरा हो चुका है और 78.5 मीटर ऊंचा पायलोन भी तैयार है। लेकिन रेलवे परिसर के अंदर आने वाले 165 मीटर हिस्से का निर्माण इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण लंबित चरण है। पश्चिम रेलवे से ब्लॉक की अनुमति, ट्रैफिक पुलिस की मंजूरी और निर्माण गतिविधियों के दौरान यातायात प्रबंधन जैसे मुद्दों को समय पर हल करना अब बीएमसी के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।अगर आवश्यक मंजूरियां समय पर मिलती हैं और निर्माण कार्य तय गति से आगे बढ़ता है, तो 31 दिसंबर 2026 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने की राह आसान हो सकती है।
मुंबई यातायात में महत्वपूर्ण सुधार
महालक्ष्मी का यह नया केबल-स्टेड पुल केवल एक पुराने पुल का विकल्प नहीं होगा। यह मुंबई के तेजी से बदलते परिवहन ढांचे में आधुनिक इंजीनियरिंग, बेहतर कनेक्टिविटी और यातायात प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में जब मुंबई में सड़क, मेट्रो, रेलवे और कोस्टल रोड जैसी परिवहन परियोजनाएं एक-दूसरे से जुड़ेंगी, तब इस तरह के संपर्क पुलों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
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