मुक्त व्यापार समझौतों से MSME को मिले बड़े मौके: PM मोदी का संदेश

The CSR Journal Magazine

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं MSME, वैश्विक बाजारों पर कब्जा करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का उठाएं लाभ- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए घरेलू उद्यमियों से वैश्विक स्तर पर सोचने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और नवाचार (Innovation) की रफ्तार को बनाए रखने में MSME क्षेत्र की भूमिका सबसे केंद्रीय है। उन्होंने देश के छोटे व्यवसायों को सरकार द्वारा हस्ताक्षरित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements – FTAs) का अधिकतम लाभ उठाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।

अर्थव्यवस्था के मुख्य इंजन के रूप में MSME

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि MSME केवल आर्थिक इकाइयां नहीं हैं, बल्कि वे भारत के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 45 से 48 प्रतिशत का योगदान देने वाला यह क्षेत्र करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। पीएम मोदी ने कहा, “जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं, तो उसकी नींव हमारे लघु उद्योगों पर ही टिकी होती है। ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता की कहानी इन उद्यमों के पसीने और कौशल के बिना अधूरी है।”उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इन उद्योगों को जीवित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना और वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) का एक अटूट हिस्सा बनाना है।

मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का रणनीतिक लाभ उठाने की आवश्यकता

भाषण का एक मुख्य बिंदु भारत द्वारा हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ किए गए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कई छोटे उद्यमी अब भी इन समझौतों के फायदों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, और कई अन्य विकसित देशों के साथ बातचीत उन्नत चरणों में है। ये समझौते हमारे MSME के लिए विदेशी बाजारों के दरवाजे बिना किसी भारी सीमा शुल्क (Tariffs) के खोलते हैं। हमारे उद्यमियों को इन नीतिगत लाभों का अध्ययन करना चाहिए और अपनी निर्यात रणनीतियों को उसी के अनुसार ढालना चाहिए।”उन्होंने उद्योग संघों और वाणिज्य मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे देश भर में जिला स्तर पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करें, ताकि छोटे से छोटे व्यवसायी को भी यह समझ आ सके कि वे इन अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत अपने उत्पादों को विदेशों में कैसे आसानी से बेच सकते हैं।

‘ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफ़ेक्ट’ का मंत्र

वैश्विक बाजारों में टिके रहने के लिए प्रधानमंत्री ने एक बार फिर अपने प्रसिद्ध मंत्र ‘ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफ़ेक्ट’ (Zero Defect, Zero Effect) को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार गुणवत्ता और पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। MSME द्वारा निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। वे वैश्विक मानकों पर खरे उतरने चाहिए ताकि कोई भी देश गुणवत्ता के आधार पर उन्हें खारिज न कर सके। उत्पादन प्रक्रियाओं का पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। हरित और संधारणीय (Sustainable) विनिर्माण पद्धतियों को अपनाना अब एक विकल्प नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की एक अनिवार्य शर्त बन चुका है।

सरकारी योजनाओं का लाभ

MSME के विकास के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जैसे की वित्तीय सहायता, तकनीकी सहायता और मार्केटिंग में मदद। इन योजनाओं का उपयोग करके MSME अपनी पहचान बना सकते हैं और विश्व स्तर पर अपने उत्पादों को बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी उद्यमियों से अपील की कि वे इन योजनाओं का उपयोग करें और अपनी कंपनी को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाएं।

उद्यमियों के लिए नई राहें

PM मोदी ने उद्यमियों को प्रेरित किया कि वे नई तकनीकों का उपयोग करें और अपने व्यवसाय को डिजिटल बनाएं। यह डिजिटलाइजेशन न केवल उत्पादकता को बढ़ाता है, बल्कि बाजार के प्रतिस्पर्धा में भी मदद करता है। MSME को चाहिए कि वे सूचना तकनीक को अपनाएं और वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करें।

डिजिटल क्रांति और सरकारी समर्थन की नीतियां

लघु उद्योगों को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने डिजिटल समावेशन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाकर छोटे उद्योगों को सीधे सरकार से जुड़ने का मौका दिया है। इसके साथ ही, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) जैसी पहल देश के सुदूर कोनों में बैठे छोटे व्यापारियों को बड़े ई-कॉमर्स दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की शक्ति दे रही है। प्रधानमंत्री ने मुद्रा योजना, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) और एमएसएमई प्रदर्शन को बेहतर बनाने वाली रैम्प (RAMP) योजना जैसी वित्तीय पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋण की उपलब्धता को आसान बनाया गया है ताकि पूंजी के अभाव में कोई भी अभिनव विचार रुकने न पाए।

भविष्य का रोडमैप-‘लोकल से ग्लोबल

अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय एमएसएमई के लिए एक महत्वाकांक्षी विज़न प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की पहचान उनकी अद्वितीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता से होनी चाहिए। उन्होंने उद्योगपतियों और युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “आज दुनिया भारत को एक भरोसेमंद विनिर्माण भागीदार (Trusted Manufacturing Partner) के रूप में देख रही है। यह हमारे एमएसएमई के लिए ‘लोकल से ग्लोबल’ बनने का स्वर्णिम अवसर है। जब हमारे गांव और छोटे शहरों के उत्पाद वैश्विक बाजारों की शोभा बढ़ाएंगे, तभी आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरी तरह साकार होगा।”

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