संकट के समय गौतम गंभीर के साथ खड़े हुए उनके विश्व विजेता गुरु गैरी कर्स्टन

The CSR Journal Magazine

व्हाइट-बॉल क्रिकेट में गंभीर का ऐतिहासिक दबदबा, टेस्ट की चुनौतियों के बीच गैरी कर्स्टन का मिला मजबूत समर्थन

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में गौतम गंभीर का कार्यकाल इस समय वैश्विक क्रिकेट गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। जुलाई 2024 में राहुल द्रविड़ के विदाई के बाद टीम इंडिया की कमान संभालने वाले पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने सीमित ओवरों (व्हाइट-बॉल) के प्रारूप में भारतीय क्रिकेट को सफलता के एक अभूतपूर्व शिखर पर पहुंचा दिया है। उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने लगातार दो बड़े ICC खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया है, जिसमें ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और हाल ही में आयोजित ICC पुरुष टी20 विश्व कप 2026 शामिल हैं। इसके साथ ही टीम ने एशिया कप में भी जीत का परचम लहराया है।

टेस्ट क्रिकेट मे आलोचना

हालांकि, पारंपरिक रेड-बॉल (टेस्ट) क्रिकेट में टीम के हालिया उतार-चढ़ाव और घरेलू मैदान पर मिली कुछ हार के बाद क्रिकेट पंडितों और प्रशंसकों के एक वर्ग द्वारा गंभीर की कोचिंग शैली की आलोचना भी की जा रही है। इस नाजुक मोड़ पर, भारत को साल 2011 में वनडे विश्व कप जिताने वाले दक्षिण अफ्रीका के महान पूर्व कोच और वर्तमान में श्रीलंका टीम के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन गंभीर के समर्थन में मजबूती से आगे आए हैं। श्रीलंका के खिलाफ गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में आज (15 अगस्त, 2026) से शुरू हो रहे पहले टेस्ट मैच से ठीक पहले एक वर्चुअल मीडिया इंटरेक्शन में कर्स्टन ने गंभीर की रणनीतिक सूझबूझ की जमकर तारीफ की और उन्हें समय दिए जाने की वकालत की है।

व्हाइट-बॉल प्रारूप में सफलता का स्वर्णिम अध्याय

गौतम गंभीर की कोचिंग में भारत ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में जो हासिल किया है, वह किसी भी कोच के शुरुआती 16-18 महीनों के लिए एक सपने जैसा हो सकता है। मार्च 2026 में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी20 विश्व कप 2026 के खिताबी मुकाबले में भारत ने न्यू जीलैंड को 96 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त देकर लगातार दूसरा टी20 विश्व कप खिताब अपने नाम किया था। इस जीत के साथ ही गंभीर क्रिकेट इतिहास के ऐसे पहले व्यक्ति बन गए जिन्होंने एक खिलाड़ी (2007) और एक मुख्य कोच (2026) दोनों के रूप में पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब जीता है।

साउथ अफ्रीका-इंग्लैंड को करारी शिकस्त

सिर्फ ICC टूर्नामेंट ही नहीं, बल्कि द्विपक्षीय सीरीज में भी गंभीर की देखरेख में भारत का व्हाइट-बॉल प्रदर्शन शानदार रहा है। साल 2025 और उसके आस-पास के दौर में टीम इंडिया ने विदेशी सरजमीं पर भी अपनी ताकत का लोहा मनवाया। नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनके घर में 3-1 से टी20 सीरीज जीतने के बाद, भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उसकी धरती पर 4-1 से शिकस्त दी। इसके अतिरिक्त, भारत ने अपनी घरेलू परिस्थितियों में न्यू जीलैंड पर 4-1 से बड़ी जीत दर्ज की और ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भी 2-1 से टी20 सीरीज अपने नाम की। गंभीर की कोचिंग में भारतीय बल्लेबाजों ने टी20 विश्व कप के नॉकआउट इतिहास के कुछ सबसे बड़े स्कोर खड़े किए, जो उनकी आक्रामक और निडर क्रिकेट नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

“गंभीर का रिकॉर्ड खुद बोलता है” – गैरी कर्स्टन का बड़ा बयान

लगातार मिल रही वाइट-बॉल सफलताओं के बावजूद, टेस्ट प्रारूप में न्यू जीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर 0-3 की शिकस्त और ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में मिली हार के बाद गंभीर आलोचकों के निशाने पर आ गए थे। ऐसे समय में गैरी कर्स्टन ने गंभीर का बचाव करते हुए कहा, “वह एक शानदार कोच हैं। उन्होंने बेहद कम समय में अविश्वसनीय सफलता हासिल की है, जिसमें टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी शामिल हैं। वे एक चतुर क्रिकेटर रहे हैं और मैं हमेशा से जानता था कि वे बतौर कोच भी सफल होंगे”।कर्स्टन और गंभीर का रिश्ता बहुत पुराना और गहरा है। जब 2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद वनडे विश्व कप जीता था, तब कर्स्टन ही भारतीय टीम के मुख्य कोच थे और गंभीर उस टीम के सबसे बड़े संकटमोचक बनकर उभरे थे, जिन्होंने फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ ऐतिहासिक 97 रनों की पारी खेली थी। कर्स्टन ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि गंभीर के अंदर एक खास तरह की मानसिक मजबूती (टफनेस) है और उनका खेल को समझने का नजरिया बेहद अनूठा है।

स्टार कल्चर बनाम स्क्वाड डेप्थ: गंभीर की नई सोच

गैरी कर्स्टन ने गंभीर द्वारा भारतीय क्रिकेट टीम की संस्कृति में किए जा रहे बदलावों की भी सराहना की। कर्स्टन का मानना है कि गंभीर ने भारतीय टीम को केवल 3-4 बड़े सुपरस्टार खिलाड़ियों पर निर्भर रहने की पुरानी आदत से बाहर निकाला है और टीम की असली ताकत यानी ‘स्क्वाड डेप्थ’ (बेंच स्ट्रेंथ) पर भरोसा करना शुरू किया है। गंभीर की रणनीति के तहत टीम में वरुण चक्रवर्ती जैसे मिस्ट्री स्पिनरों की वापसी हुई और अक्षर पटेल को नंबर 5 पर प्रमोट करने जैसे साहसिक फैसले लिए गए। कर्स्टन ने कहा, “पिछले 15 वर्षों में भारतीय क्रिकेट का ढांचा बहुत मजबूत हुआ है। गंभीर ने बिल्कुल सही पहचान की है कि टीम को किस दिशा में जाना चाहिए। आज भारत के पास इतनी प्रतिभा है कि वे आसानी से तीन अलग-अलग मजबूत टीमें तैयार कर सकते हैं। तंत्र में इतनी गहराई होने के बाद किसी एक या दो खिलाड़ी पर निर्भरता खत्म होना टीम के भविष्य के लिए बेहतरीन संकेत है”।

टेस्ट क्रिकेट में बदलाव का दौर, धैर्य की आवश्यकता

इस समय भारतीय टीम ICC विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 की अंक तालिका में 9 मैचों में 4 जीत, 4 हार और 1 ड्रॉ के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गई है, जिससे लॉर्ड्स में होने वाले फाइनल की राह कठिन हो गई है। इस गिरावट को लेकर उठ रहे सवालों पर कर्स्टन ने प्रशंसकों और आलोचकों से धैर्य रखने की अपील की है। कर्स्टन के अनुसार, भारतीय क्रिकेट इस समय एक बड़े ‘ट्रांजिशन पीरियड’ (बदलाव के दौर) से गुजर रहा है। जब एक स्थापित पीढ़ी टीम छोड़ रही होती है और नए खिलाड़ियों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा होता है, तो ऐसे संक्रमण काल में नतीजे हमेशा मनमुताबिक नहीं आते।

खेल में भावुक होना ठीक नहीं

कर्स्टन ने डंकन फ्लेचर, अनिल कुंबले और स्वयं अपने शुरुआती दौर का उदाहरण देते हुए कहा, “भारतीय क्रिकेट में लोग बहुत जल्दी भावुक हो जाते हैं और तुरंत ‘इसको निकालो’ जैसी मांग करने लगते हैं। लेकिन कोचिंग ऐसे काम नहीं करती। किसी भी मुख्य कोच को अपनी रणनीतियों को लागू करने और टीम को पूरी तरह स्थापित करने के लिए कम से कम 3 से 5 साल का समय चाहिए होता है। पिछले 6-8 महीनों के प्रदर्शन के आधार पर गौतम गंभीर जैसी प्रतिबद्ध शख्सियत का आकलन करना पूरी तरह से अनुचित होगा”।

भविष्य की राह और गंभीर के सामने चुनौतियाँ

हालांकि गंभीर ने सफेद गेंद के क्रिकेट में खुद को एक असाधारण रणनीतिकार साबित कर दिया है, लेकिन उनके सामने असली चुनौती अब टेस्ट प्रारूप में टीम इंडिया के प्रभुत्व को वापस दिलाने की है। श्रीलंका के खिलाफ आज से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज को गंभीर और उनके सहयोगी स्टाफ के लिए एक बड़े ‘एसिड टेस्ट’ के रूप में देखा जा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर की आक्रामक सोच और स्पिन के अनुकूल पिचों पर खेलने की रणनीति को टेस्ट में कुछ तकनीकी सुधारों की जरूरत है।

गंभीर को BCCI का सपोर्ट

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सूत्रों के हवाले से यह भी साफ हुआ है कि बोर्ड फिलहाल गंभीर की भूमिका और उनके दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह खड़ा है, क्योंकि वे समझते हैं कि टेस्ट टीम इस समय बड़े बदलावों से जूझ रही है। गंभीर के सामने अब अगला बड़ा लक्ष्य 2027 में होने वाला वनडे विश्व कप है, लेकिन उससे पहले उन्हें अपनी टेस्ट रणनीति को भी उसी मुकाम पर ले जाना होगा जहां उनका वाइट-बॉल रिकॉर्ड खड़ा है। गैरी कर्स्टन जैसे विश्व विजेता गुरु का यह खुला समर्थन निश्चित रूप से गंभीर के मनोबल को बढ़ाएगा और उन्हें अपनी योजनाओं को बिना किसी बाहरी दबाव के लागू करने की ताकत देगा।

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