Indian Railways Fire Safety: भारतीय रेलवे का बड़ा सुरक्षा कवच, हर कोच में अग्निशामक, 139 हेल्पलाइन और 177 राहत ट्रेनें रहेंगी हर वक्त तैयार

The CSR Journal Magazine
Indian Railways Fire Safety: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे कई स्तरों पर अग्नि सुरक्षा उपाय कर रहा है। हर रेलवे कोच में कम से कम दो अग्निशामक यंत्र, पैंट्री कारों में वॉटर मिस्ट फायर एक्सटिंग्विशर, फायर डिटेक्शन सिस्टम और आपातकालीन संचार सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही ‘रेल मदद’ हेल्पलाइन 139 के जरिए यात्रियों को किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी।

Indian Railways Fire Safety: स्टेशनों पर भी मजबूत की गई सुरक्षा व्यवस्था

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र, रेत और पानी से भरी बाल्टियां, ऑटोमैटिक फायर अलार्म सिस्टम, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और स्पष्ट रूप से चिन्हित आपातकालीन निकास द्वार उपलब्ध कराए गए हैं। बड़े स्टेशनों पर यात्रियों के सामान की स्कैनिंग की जा रही है और ज्वलनशील वस्तुएं ले जाने से रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं। रेलवे अपने स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, टिकट निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों को फायर फाइटिंग, फर्स्ट एड, ट्रॉमा मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन का नियमित प्रशिक्षण भी देता है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

कोचों में आधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली

भारतीय रेलवे ने सभी कोचों में अग्नि सुरक्षा के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। कोचों में फायर-रिटार्डेंट सामग्री, फायर और स्मोक डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी विंडो, एयरोसोल आधारित फायर सप्रेशन सिस्टम और सुरक्षित इलेक्ट्रिकल सर्किट लगाए गए हैं। वंदे भारत ट्रेनों में प्रत्येक कोच में इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट और पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म बटन भी लगाए गए हैं, जिससे यात्री सीधे ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से संपर्क कर सकते हैं।

आपदा में सबसे पहले यात्रियों की जान बचाना प्राथमिकता

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि किसी भी दुर्घटना या आग की घटना में भारतीय रेलवे की पहली प्राथमिकता यात्रियों की जान बचाना, घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराना और फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित निकालना होती है। इसके लिए रेलवे राज्य सरकार, जिला प्रशासन, दमकल विभाग, पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ जैसी एजेंसियों के साथ समन्वय कर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करता है।

177 राहत ट्रेनें और 170 मेडिकल यूनिट हमेशा तैयार

देशभर में आपात स्थितियों से निपटने के लिए भारतीय रेलवे ने 177 दुर्घटना राहत ट्रेनें (ART), 100 उच्च क्षमता वाली ब्रेकडाउन क्रेन और 170 एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल इकाइयां (ARME) तैनात की हैं। ये मेडिकल यूनिट चलते-फिरते अस्पताल की तरह काम करती हैं और दुर्घटना स्थल पर तुरंत पहुंचकर घायलों का इलाज शुरू करती हैं। रेलवे ने बताया कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए नियमित रूप से मॉक ड्रिल भी आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2025-26 में देशभर में 71 फुल-स्केल मॉक ड्रिल आयोजित की गईं, जिनमें रेलवे के साथ दमकल विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने भी भाग लिया।

यात्रियों से भी की गई अपील

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन में किसी भी प्रकार की ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री लेकर यात्रा न करें, कोच के भीतर धूम्रपान न करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत रेल मदद हेल्पलाइन 139 या रेलवे कर्मचारियों को सूचना दें। रेलवे का कहना है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित कर्मचारियों और मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली के जरिए यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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