जीरो टॉलरेंस नीति: मोदी सरकार ने विदेशों से दबोचे 274 अपराधी

The CSR Journal Magazine

भारत ने 7 साल में 274 भगोड़ों को वापस लाया: ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच

भारत ने पिछले 7 वर्षों (2019 से जुलाई 2026 तक) में 36 विभिन्न देशों से रिकॉर्ड 274 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक वापस लाया है, जबकि इस अवधि के दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ₹17,874 करोड़ की अवैध संपत्ति कुर्क की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक मार्गदर्शन में देश के कानून से भागकर विदेशों में शरण लेने वाले अपराधियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक वैश्विक अभियान चलाया गया है। सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को एक ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित करते हुए स्पष्ट किया है कि अब दुनिया का कोई भी कोना भारतीय अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहेगा।

मुख्य सांख्यिकी और श्रेणीबद्ध आंकड़े (2019–2026)

गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रत्यर्पण और निर्वासन (Deportation) की रफ्तार में पिछली सरकारों की तुलना में 10 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। जहां वर्ष 2004 से 2013 के बीच (UPA शासनकाल में) प्रतिवर्ष औसतन केवल 4 भगोड़ों को भारत लाया जा पाता था, वहीं पिछले 7 वर्षों में यह औसत बढ़कर लगभग 40 भगोड़े प्रतिवर्ष हो गया है।

वापस लाए गए 274 भगोड़ों का श्रेणीवार वर्गीकरण

आर्थिक वित्तीय अपराध: 09 (बैंक धोखाधड़ी और बड़े वित्तीय घोटालेबाज)
आतंकवादी मामले: 17 (देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल)
संगठित अपराध व गैंगस्टर्स: 42 (जबरन वसूली, मर्डर सिंडिकेट)
हत्या, डकैती व हिंसक अपराध: 62
यौन अपराध व पॉक्सो (POCSO) एक्ट: 53 (बच्चों और महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध)
मादक पदार्थों की तस्करी (Drugs Smuggling): 16
तस्करी एवं जाली भारतीय मुद्रा (FICN): 12
मानव तस्करी (Human Trafficking): 18
अन्य गंभीर अपराध: 45

वर्ष-वार प्रत्यर्पण की स्थिति (गृह मंत्रालय के अनुसार)

2019: 09 भगोड़े
2020: 07 भगोड़े
2021: 23 भगोड़े
2022: 40 भगोड़े
2023: 37 भगोड़े
2024: 43 भगोड़े
2025: 70 भगोड़े
(अब तक का सबसे सफल वर्ष)2026 (जुलाई तक): 45 भगोड़े

वित्तीय चोट: ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच और ₹18,762 करोड़ की बहाली

मोदी सरकार ने अपराधियों को केवल शारीरिक रूप से वापस लाने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ने की रणनीति पर भी काम किया है। PMLA के कड़े नियमों के तहत विदेशों और देश में मौजूद भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया। इसके साथ ही, विभिन्न बैंकों, पीड़ितों और सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने वाले अपराधियों से ₹18,762 करोड़ की रिकॉर्ड राशि वसूल कर पुनर्स्थापित (Restore) की गई है।

कानूनी सुधार और ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (Trial in Absentia)

2014 से पहले भारत का प्रत्यर्पण ढांचा पुराना हो चुका था और तत्कालीन समय में केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां क्रियाशील थीं। दस्तावेज़ीकरण और कानूनी जटिलताओं (जैसे दोहरे अभियोजन और डबल क्रिमिनैलिटी का सिद्धांत) के चलते विदेशी अदालतें भारत के अनुरोध खारिज कर देती थीं। इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए सरकार ने सिलसिलेवार विधायी बदलाव किए।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA)-  इसके तहत ₹100 करोड़ या उससे अधिक के घोटालेबाजों की अनुपस्थिति में भी उनकी देश-विदेश की संपत्ति कुर्क करने का कड़ा अधिकार मिला।
NIA और UAPA संशोधन (2019)- आतंकवाद विरोधी और जांच एजेंसियों को सीमा पार जाकर कार्रवाई करने और व्यक्तिगत आतंकियों को नामित करने की असीमित शक्तियां दी गईं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) – 2024- नए आपराधिक कानूनों के तहत पहली बार धारा 355 और 356 को जोड़ा गया।
इसके तहत ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा) चलाने का ऐतिहासिक प्रावधान है। अब यदि कोई अपराधी देश छोड़कर भाग भी जाता है, तो भारतीय अदालतें उसके बिना भी पूरी सुनवाई कर उसे सजा सुना सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रत्यर्पण का कानूनी दावा बेहद मजबूत हो जाता है।

तकनीकी और संस्थागत ग्रिड: ऑपरेशन त्रिशूल और भारतपोल

गृह मंत्री अमित शाह के विजन के अनुसार, जांच प्रक्रियाओं को इंटेलिजेंस-लेड (खुफिया आधारित) और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन (प्रौद्योगिकी संचालित) बनाया गया है।

ऑपरेशन त्रिशूल (Operation Trishul)

CBI ने इंटरपोल की मदद से एक विशेष जिओ-लोकेशन अभियान चलाया है। इसके तहत सैटेलाइट डेटा, उन्नत डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण और प्रोफाइल मैपिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यदि कोई अपराधी विदेश में अपना नाम, पासपोर्ट या हुलिया बदल लेता है, तब भी बायोमेट्रिक और डिजिटल मैपिंग के जरिए उसकी वास्तविक पहचान सुनिश्चित कर ली जाती है।

CBI का स्पेशल ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर

यह सेंटर वैश्विक स्तर पर पुलिस एजेंसियों के साथ रियल-टाइम (तुल्यकालिक) समन्वय स्थापित करता है। राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच त्वरित सूचना के लिए विशेष ‘इंटरपोल कॉन्टैक्ट ऑफिसर’ तैनात किए गए हैं।

भारतपोल (BHARATPOL) प्लेटफॉर्म

जनवरी 2025 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘भारतपोल’ की शुरुआत की थी। इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालयों और जिला स्तर के पुलिस थानों को एक एकीकृत नेटवर्क में पिरो दिया है। वर्तमान में 1,400 से अधिक सरकारी इकाइयां इस पोर्टल से जुड़ी हुई हैं। इसके कारण विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का रिस्पॉन्स टाइम जो पहले महीनों का होता था, वह अब घटकर मात्र 3 से 10 दिन रह गया है।

इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस में भारी उछाल

वैश्विक दबाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत की सक्रियता के कारण रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की दर अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है-
वर्ष 2022: 40 नोटिस
वर्ष 2023: 100 नोटिस
वर्ष 2024: 107 नोटिस
वर्ष 2025: 112 नोटिस
वर्ष 2026 (अब तक): 182 नोटिस (पिछले 3 वर्षों में कुल 401 मोस्ट वांटेड अपराधियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं)

बहु-एजेंसी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach)

इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि ‘पूरी सरकार’ का समन्वित प्रयास काम कर रहा है। गृह मंत्रालय के तहत एक स्टैंडिंग फोकस ग्रुप (Multi Agency Centre – MAC) का गठन जनवरी 2026 में किया गया ताकि अपराधियों के खिलाफ सामूहिक प्रहार किया जा सके। इसमें देश की शीर्ष खुफिया और जांच एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI)
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW)
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA)
प्रवर्तन निदेशालय (ED)
विदेश मंत्रालय (MEA)
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI)

विभिन्न राज्यों के पुलिस बल

हालिया उदाहरणों में अमेरिका से मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना और हीरा कारोबारी नीरव मोदी के यूरोपीय मानवाधिकार अदालत में अंतिम कानूनी केस हारने के बाद प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होना भारतीय कूटनीति और कानूनी तैयारी की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। मोदी सरकार की इस “जीरो टॉलरेंस” नीति और मजबूत कानून-प्रौद्योगिकी के गठजोड़ ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों को कानून के कटघरे में आना ही होगा।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos