दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP संसद मार्च में पुलिस बलप्रयोग पर सुनवाई से किया इनकार

The CSR Journal Magazine

दिल्ली हाई कोर्ट का CJP संसद मार्च मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार, कहा- ‘अदालत को इन सब में मत घसीटो’

दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद मार्च के दौरान पुलिस बल के अत्यधिक उपयोग के आरोपों वाली जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने मामले को अगले दिन सुनने का निर्णय लिया है। इस मामले में, दिल्ली पुलिस ने हिंसा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के संदर्भ में 5 FIR दर्ज की हैं और आरोपियों की पहचान के लिए 250 से अधिक वीडियो फुटेज की जांच कर रही है। यह याचिका दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को अनुपातहीन बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग करने पर पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “अदालत को इन सब में मत घसीटो। नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई।” हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले को आपातकालीन सूची में नहीं रखा जाएगा, बल्कि इस जनहित याचिका (PIL) पर 22 जुलाई (बुधवार) को नियमित प्रक्रिया के तहत ही विचार किया जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

पेपर लीक मामलों को लेकर और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP कार्यकर्ताओं और छात्रों ने 20 जुलाई को संसद मार्च का प्रयास किया था। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और संसद के मानसून सत्र का हवाला देकर धारा 163 BNSS (पूर्व में धारा 144) लागू की थी और इस मार्च की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद आगे बढ़ने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के कारण कई लोगों को चोटें आईं। इसी पुलिसिया कार्रवाई और अधिकारों के उल्लंघन को लेकर अदालत में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

पुलिस ने दर्ज की 5 FIR

दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के संसद चलो मार्च के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के सिलसिले में अब तक 5 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इन FIR में ने कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट और अन्य स्थानों पर उग्र प्रदर्शन के बारे में शिकायतें शामिल हैं। अधिकारी इन क्षेत्रों के वीडियो फुटेज का उपयोग करके आरोपियों की पहचान कर रहे हैं और लगभग 250 से अधिक वीडियो की जांच की जा रही है।

प्रदर्शन में घायल हुए लोग

संसद मार्च के दौरान भड़की हिंसा ने कई लोगों को घायल कर दिया। इस दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान भी गंभीर चोटें आईं। कई प्रदर्शनकारियों के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबरें आई हैं। अभूतपूर्व परिस्थिति ने पुलिस के बल प्रयोग की जरूरत को बढ़ा दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में कोई भी तात्कालिक सुनवाई करने से मना कर दिया है।

बुधवार को होगी सुनवाई

हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई बुधवार (22 जुलाई) को निर्धारित की है। इस दिन, जनहित याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगी गई राहतों पर गहन चर्चा की जाएगी। देखने वाली बात होगी कि क्या जिन स्थलों पर हिंसा हुई, वहां की CCTV फुटेज या अन्य साक्ष्य प्रभावित प्रदर्शनकारियों की पहचान में मदद करेगा।

कोर्ट का स्पष्ट संदेश: मत घसीटो

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि “कोर्ट को इस सब में मत घसीटो।” यह संदेश दर्शाता है कि अदालत ने जटिल और संवेदनशील मामलों में अपनी सीमाओं को पहचान लिया है। इससे पता चलता है कि समान स्थिति में अन्य मामलों में भी कोर्ट का क्या रुख हो सकता है।

आंदोलन और प्रशासन का टकराव

CJP के इस मार्च से उत्पन्न तनाव ने न केवल प्रदर्शनकारियों के लिए, बल्कि पुलिस विभाग के लिए भी एक चुनौती पेश की है। इस स्थिति का प्रभाव सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर भी पड़ेगा, अगर इस प्रकार के आंदोलनों का संचालन प्रशासन के लिए कठिन बना दिया जाए। CJP का यह संसद मार्च देखते-देखते एक बड़ी घटना में बदल गया, जिससे चारों तरफ चर्चाएँ हो रही हैं।

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