Delhi High Court ने मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटाए

The CSR Journal Magazine
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2015 में हुए मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी क्रिमिनल केस रद्द कर दिए हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए, जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा। यह फैसला दुकानदारों के लिए एक बड़े राहत की बात है।

सुप्रीम कोर्ट के आंकड़ों ने बदल दी कहानी

ज़ाहिर है, यह मामला तब शुरू हुआ था जब मई 2015 में देशभर में मैगी के सैंपल लिए गए थे। फूड एनालिस्ट की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि मैगी के मसाले में लेड की मात्रा सीमा से ज्यादा थी। हालाँकि, जांच में यह साबित हुआ कि मैगी में हानिकारक तत्व नहीं पाए गए। यह खबर अब दुकानदारों को एक नई आशा प्रदान कर रही है।

दुकानदारों पर लगे आरोपों की कहानी

फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने तफ्तीश के दौरान मैगी की सप्लाई चेन को ध्यान में रखते हुए, दुकानदारों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इस मामले में चुनिंदा सप्लायर फर्मों और मैन्युफैक्चरर कंपनी पर भी कार्रवाई की गई थी। परंतु, कोर्ट के इस नए निर्णय से साफ हुआ कि यह केस अब और नहीं चल सकते।

जज ने दिए महत्वपूर्ण तर्क

जस्टिस मधु जैन ने कहा कि जब जांच का मूल आधार ही वैज्ञानिक रूप से खत्म हो गया है, तब लंबा आपराधिक ट्रायल उचित नहीं है। उन्होंने जोड़ते हुए कहा कि फूड सेफ्टी एनालिस्ट की शुरुआती रिपोर्ट के अतिरिक्त, मिलावट का कोई स्थायी सबूत नहीं है। यह निर्णय एक बड़ी जीत है उनके लिए जो पहले से ही कानूनी लड़ाइयों में उलझे थे।

क्या कहता है फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट?

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील दिगम सिंह डागर ने तर्क दिया कि सैंपल लेने की प्रक्रिया FSS एक्ट के नियमों के अनुसार की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। इससे स्पष्ट होता है कि अदालत ने उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए निर्णय लिया है।

दुकानदारों को मिली राहत

इस फैसले से उन छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले लगभग 9 वर्षों से अदालती चक्करों में फंसे थे। अब उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में और सुगमता से काम करने का मौका मिलेगा। यह निर्णय न केवल दुकानदारों के लिए, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्यूँकि इससे बाजार में खाद्य सुरक्षा का सही एहसास होता है।

कैसे हुआ यह सब?

जैसे ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, शीर्ष अदालत ने CFTRI को मैगी के नए सैंपल की जांच का आदेश दिया। उनके द्वारा मिलने वाली रिपोर्ट से यह बात साबित हुई कि मैगी में लीड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की मात्रा असुरक्षित नहीं है। इस रिपोर्ट ने विवाद की दिशा को बदल दिया और अब सभी क्रिमिनल केस रद्द किए जा चुके हैं।

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