FSSAI बनाम डाबर: दिल्ली हाई कोर्ट ने दी डाबर को अंतरिम राहत, बिना पक्ष सुने बैन को बताया गलत

The CSR Journal Magazine

डाबर के ‘100% प्योर’ क्लेम वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: कोर्ट बोली- सेफ्टी पर कोई सवाल नहीं; प्रोडक्ट्स की बिक्री जारी रहेगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री को तुरंत रुकवाने के लिए कहा गया था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने इस मामले में केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी किया है और उनका जवाब मांगा है। अगली सुनवाई तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा।

FSSAI के आदेश की प्रकृति

FSSAI ने डाबर के उन प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई की थी, जिनके लेबल पर “100% प्योर”, “100% नेचुरल” और “100% ऑर्गेनिक” लिखा होता है। इनमें डाबर हनी, डाबर हिमालयन एपल साइडर विनेगर और डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल जैसे प्रोडक्ट्स शामिल थे। इस कार्रवाई के पीछे FSSAI का तर्क था कि “100%” का उपयोग ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है।

डाबर की प्रतिक्रिया

डाबर ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी। कंपनी का कहना था कि FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस, 2018 का पालन नहीं किया। डाबर ने आरोप लगाया कि कंपनी को बिना किसी कारण बताओ नोटिस के सीधे बिक्री रोकने का आदेश दिया गया।

कमियां और कोर्ट में बहस

डाबर ने दावा किया कि FSSAI की कार्रवाई में कई कानूनी और तकनीकी कमियां थीं। कंपनी ने कहा कि “100% प्योर” कहना गलत नहीं है और यह उपभोक्ताओं को धोखा नहीं देता। FSSAI का आदेश केवल लेबलिंग के मुद्दे पर केंद्रित है, न कि उत्पाद की गुणवत्ता पर।

प्रोडक्ट्स की क्वालिटी की स्थिति

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्पादों की गुणवत्ता या सुरक्षा पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है। डाबर ने कहा कि FSSAI ने यह यह प्रमाणित नहीं किया है कि उनके प्रोडक्ट्स मिलावटी या असुरक्षित हैं।

बिजनेस पर असर

डाबर ने कोर्ट में बताया कि इस अचानक से लगे बैन से उन्हें व्यापार में भारी नुकसान हो रहा था। स्टॉक को वापस मंगाने या रिपैकेजिंग की जरूरत पड़ रही थी। इस आदेश के सार्वजनिक होने से कंपनी की साख पर भी बुरा असर पड़ा।

बाजार की स्थिति

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब डाबर अपने सभी प्रभावित प्रोडक्ट्स की बिक्री पहले की तरह कर सकेगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेलर्स भी इन उत्पादों को रोक नहीं पाएंगे।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

अब FSSAI और केंद्र सरकार को उच्च न्यायालय के नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद कोर्ट अगली सुनवाई करेगी और यह देखेगी कि FSSAI का आदेश कानूनी रूप से सही था या उसे रद्द करना चाहिए।

FMCG सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मामला

यह मामला FMCG कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, खासकर रेगुलेटरी कंप्लायंस और ब्रांडिंग के मामले में। FSSAI पिछले समय से ‘100%’ जैसे दावों पर कड़ी नजर रख रहा है। हाईकोर्ट के आदेश से कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

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