IT विभाग का बड़ा खुलासा- ISRO के सैटेलाइट कैमरों ने पकड़ी 2,038 करोड़ की फर्जी कृषि आय

The CSR Journal Magazine

बिना जमीन के बन गए किसान, सरकार को 2038 करोड़ का चूना

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग ने डेटा विश्लेषण के जरिए 310 ऐसे बेहद अमीर ‘फर्जी किसानों‘ का पर्दाफाश किया है, जिन्होंने बिना किसी जमीन के ₹2,038 करोड़ की टैक्स चोरी की है। इन लोगों ने अपने टैक्स रिटर्न में खुद के पास ‘शून्य’ (Zero) कृषि भूमि होने की बात स्वीकार की थी, फिर भी ₹50 लाख से लेकर ₹400 करोड़ तक की टैक्स-फ्री कृषि आय (Agricultural Income) का दावा किया।

फर्जी किसान, करोड़ों की टैक्स चोरी! ISRO के सैटेलाइट ने खोला राज

इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में एक जांच में पाया है कि कई लोग जो खुद को किसान बताते हैं, उनके पास एक इंच जमीन भी नहीं है। इन अनधिकृत किसानों ने आर्टिफिशियल एग्रीकल्चर इनकम का लाभ उठाकर सरकार को 2038 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाया है। यह जानकारी डाटा एनालिसिस और सेटेलाइट मैपिंग के माध्यम से हासिल की गई है।

पैसे की बारिश का खेल

इन किसानों ने कृषि आय के तहत टैक्स छूट का अवहेलना की है। इनकम टैक्स विभाग ने यह खुलासा किया है कि इन लोगों ने अपनी आय को कृषि आय के रूप में दर्शाया है, लेकिन जमीन का कोई प्रमाण नहीं दिया। यह घटना इस बात का संकेत है कि टैक्स चोरी का एक नया तरीका उपयोग किया जा रहा है।

टैक्स चोरी के मुख्य तरीके

जांच में सामने आया है कि इन फर्जी दावों के जरिए काले धन को सफेद करने और टैक्स बचाने के लिए कई हथकंडे अपनाए गए। बिल्डरों और रियल एस्टेट डेवलपर्स को बेची गई जमीनों से मिले मुनाफे (Capital Gains) को कृषि आय बताकर टैक्स छूट का दावा किया गया। अपनी अघोषित या गुप्त आय (Undisclosed Income) को आईटीआर (ITR) में खेती की कमाई दिखाकर वैध बनाने की कोशिश की गई। अन्य व्यावसायिक गतिविधियों या संबद्ध क्षेत्रों से होने वाली आय को भी जानबूझकर कृषि आय के दायरे में डाल दिया गया। कई मामलों में कृषि कार्य से जुड़ा कोई भी दस्तावेजी सबूत या रसीदें मौजूद नहीं पाई गईं।

तथाकथित कृषि आय के तरीके

इन शख्सियतों ने अपनी आय को लेकर कई प्रकार के दावे पेश किए हैं। इसके लिए इन्होंने कृषि संबंधित दस्तावेज भी तैयार किए हैं, जिन्हें देखने पर ऐसा लगता है जैसे ये असली फसल उगाने वाले किसान हैं। मगर हकीकत यह है कि इनकी किसी खेत पर कोई संपत्ति नहीं है।

IT विभाग की कार्रवाई और तकनीक

इनकम टैक्स विभाग ने इस बड़े फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है। ‘सक्षम’ (SAKSHAM) प्रोजेक्ट डेटा एनालिटिक्स टूल की मदद से असेसमेंट ईयर 2021-22 से 2023-24 के बीच दाखिल किए गए संदिग्ध टैक्स रिटर्न की बारीकी से स्क्रूटनी की गई। जमीन पर असल में खेती हो रही है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सैटेलाइट इमेजरी और उपग्रह मानचित्रों का उपयोग किया गया है। विभाग वर्तमान में इन 310 करदाताओं को अपने रिटर्न को सही (Update) करने और नियमानुसार टैक्स चुकाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

सरकार की भूमिका और कार्यवाही

इनकम टैक्स विभाग अब इन मामलों की गहन जांच कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे अनधिकृत दावों का क्या किया जाए। कृषि आय पर टैक्स छूट के नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

बजट पर असर और आर्थिक स्थिति

इस तरह टैक्स चोरी से न केवल सरकार को बल्कि देश की आर्थिक स्थिति पर भी खतरा मंडरा रहा है। 2038 करोड़ रुपये की हानि का सामना करने के बाद सरकार को अपने बजट में कटौती करनी पड़ सकती है। इससे देश के विकास योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

लोगों की प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम पर विभिन्न फसल उत्पादकों और कृषि संगठनों में असंतोष देखा जा रहा है। ऐसे लोग जिनके पास जमीन नहीं है, वे अक्सर एक व्यवसाय के रूप में इनकम टैक्स छूट का फायदा उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को ठंडा करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इस प्रकार की टैक्स चोरी एक संगठित प्रणाली का हिस्सा हो सकती है। लोग आशंका जता रहे हैं कि ऐसे मामले किसानों की सच्ची मेहनत को छुपा देंगे और उन्हें प्रभावित करेंगे। यह बेहद जरूरी है कि सरकार ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करे।

भविष्य के कदम

संबंधित विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को रोकने और सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है। यह सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है कि ऐसे अनधिकृत दावों को रोका जाए और असली किसानों को उनका हक मिले। टैक्स कानूनों में सुधार की आवश्यकता है ताकि इसे और मजबूत बनाया जा सके। अधिकारियों ने साफ किया है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी भी वास्तविक या छोटे किसान को परेशान करना नहीं है। यह कदम केवल उन बड़े चेहरों और संस्थाओं को पकड़ने के लिए है जो कानून की आड़ में करोड़ों रुपये के टैक्स की हेराफेरी कर रहे हैं।

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