अमेरिका में नागरिकता के नए नियम: राष्ट्रपति ट्रंप ने साइन किए दो ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश

The CSR Journal Magazine

अमेरिका में नागरिकता के नए नियम! ट्रंप ने साइन किए बड़े आदेश, नागरिकता पर नया फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अगस्त 2026 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को सीमित करने और ‘बर्थ टूरिज्म’ (Birth Tourism) पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए दो बेहद कड़े और नए कार्यकारी आदेशों (Executive Orders) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह ऐतिहासिक कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 30 जून 2026 को ट्रंप प्रशासन के पिछले नागरिकता संबंधी व्यापक आदेश को 6-3 के बहुमत से खारिज किए जाने के महज पांच हफ्ते बाद उठाया गया है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गलत” बताते हुए स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन नए कानूनी रास्तों के जरिए देश के नागरिकता नियमों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इन नए आदेशों का सीधा असर अवैध प्रवासियों, विदेशी एजेंटों, अस्थायी वीजा धारकों और विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों व छात्रों के भविष्य पर पड़ने की संभावना है।

ट्रंप का बड़ा प्रहार: जन्मसिद्ध नागरिकता पर नए प्रतिबंध

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत (20 जनवरी 2025) में ही एक व्यापक कार्यकारी आदेश जारी कर अवैध प्रवासियों के बच्चों को मिलने वाली स्वचालित नागरिकता को समाप्त करने का प्रयास किया था। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 14वें संशोधन का हवाला देते हुए उस आदेश को असंवैधानिक करार दे दिया था। सर्वोच्च अदालत के इस बड़े झटके के बाद, ट्रंप प्रशासन ने अपनी रणनीति बदलते हुए इस बार अधिक ‘टारगेटेड’ यानी सटीक निशाना साधने वाले दो अलग-अलग कार्यकारी आदेश तैयार किए हैं। व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस और ओवल ऑफिस में हस्ताक्षर के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में जन्म के अधिकार को लेकर हमारे खिलाफ एक बहुत ही करीबी लेकिन बुरा फैसला आया। हमारा देश इसके कारण नुकसान उठा रहा है, और लोग नागरिकता के नियम का मजाक बना रहे हैं। इसलिए हम व्यवस्था में आवश्यक कानूनी बदलाव कर रहे हैं।”

पहला आदेश: ‘बर्थ टूरिज्म’ पर पूर्ण प्रतिबंध

व्हाइट हाउस के अनुसार, पहला कार्यकारी आदेश मुख्य रूप से “बर्थ टूरिज्म” (Birth Tourism) के फलते-फूलते कारोबार और प्रथा को समाप्त करने के लिए लागू किया गया है। बर्थ टूरिज्म का तात्पर्य यह है कि कोई विदेशी नागरिक (विशेषकर गर्भवती महिलाएं) गैर-आप्रवासी या टूरिस्ट वीजा पर केवल इस मुख्य उद्देश्य से अमेरिका में प्रवेश करती है ताकि वह अमेरिकी धरती पर बच्चे को जन्म दे सके। अमेरिकी कानून के अनुसार, वहां पैदा होने वाले बच्चे को स्वतः ही वहां की नागरिकता और पासपोर्ट मिल जाता है। इस नए आदेश के तहत बर्थ टूरिज्म के उद्देश्य से आने वाले लोगों को देश में प्रवेश से वंचित करने का प्रावधान है। साथ ही, यह आदेश उन सभी वाणिज्यिक ऑपरेटरों और एजेंसियों को लक्षित करता है जो विदेशों में पैसे लेकर प्रसव के लिए अमेरिका यात्रा का आयोजन और प्रबंधन करती हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि कई लोग इसके इर्द-गिर्द बाकायदा व्यापार चला रहे हैं और पैसे के दम पर नागरिकता खरीद रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दूसरा आदेश: नागरिकता के लिए अयोग्य लोगों की नई परिभाषा

दूसरा कार्यकारी आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार से बाहर रखे जाने वाले लोगों के दायरे को व्यापक बनाता है। ट्रंप के मुख्य आव्रजन नीति सलाहकार स्टीफन मिलर (Stephen Miller) ने इस आदेश की व्याख्या करते हुए कुछ बड़ी श्रेणियों को रेखांकित किया है। विदेशी सरकारों के लिए अमेरिका में पैरवी (Lobbying) करने वाले या उनके एजेंट के रूप में काम करने वाले लोगों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को अब जन्मसिद्ध नागरिकता नहीं मिलेगी।

आतंकी संगठनों के सदस्य

“विदेशी आतंकवादी संगठनों” (Foreign Terrorist Organizations) के सदस्यों के बच्चों को भी इस अधिकार से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। पहले केवल विदेशी राजदूतों के बच्चों को ही इस छूट से बाहर रखा जाता था, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाते हुए अन्य विदेशी सरकारी कर्मचारियों और वाणिज्य दूतावास के कर्मियों को भी शामिल किया गया है।

धोखाधड़ी का मामला

यदि किसी माता-पिता ने अमेरिका में प्रवेश या वीजा हासिल करने के लिए किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी (Fraud) की है, तो उनके बच्चों को जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता से वंचित कर दिया जाएगा।

भारतीय प्रवासियों और पेशेवरों पर इसका प्रभाव

ट्रंप प्रशासन के इस नए फैसले का वैश्विक स्तर पर और विशेषकर भारत से आने वाले नागरिकों पर गहरा और बहुआयामी प्रभाव पड़ सकता है-
पहले से जन्मे बच्चों पर कोई असर नहीं: रिपोर्ट के अनुसार, इस नए आदेश का उन बच्चों पर कोई असर नहीं पड़ेगा जो पहले ही अमेरिका में जन्म ले चुके हैं और जिन्हें जन्मसिद्ध नागरिकता मिल चुकी है। कानूनन उनकी नागरिकता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
वीजा साक्षात्कारों में कड़ी जांच: भविष्य में अमेरिका की यात्रा करने वाली भारतीय महिलाओं, विशेष रूप से जो गर्भवती हैं या जिनके आव्रजन इतिहास से यह संदेह पैदा होता है कि वे प्रसव के लिए अमेरिका जा सकती हैं, उन्हें अमेरिकी दूतावासों में कड़ी पूछताछ का सामना करना पड़ेगा।
वीजा खारिज होने का बढ़ता खतरा: यदि अमेरिकी कांसुलर अधिकारियों को जरा सा भी संदेह हुआ कि आवेदक का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी धरती पर बच्चे को जन्म देना है, तो वीजा सीधे तौर पर खारिज (Denial) कर दिया जाएगा।

H-1B और छात्रों में अनिश्चितता

यद्यपि यह आदेश मुख्य रूप से बर्थ टूरिज्म और अवैध घुसपैठ को लक्षित करता है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा नियमों में इस तरह की कड़ाई से वैध रूप से रह रहे भारतीय H-1B पेशेवरों और छात्रों के मन में भी कानूनी अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि: 14वां संशोधन और सुप्रीम कोर्ट

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) से आता है, जिसे गृहयुद्ध के बाद 1868 में मुख्य रूप से गुलामी से मुक्त हुए अश्वेतों को नागरिकता देने के लिए लागू किया गया था। इस संशोधन के अनुसार, “संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे या वहां की नागरिकता पाने वाले सभी व्यक्ति, और जो इसके कानूनों के क्षेत्राधिकार के अधीन हैं, वे अमेरिका के नागरिक होंगे।” ट्रंप प्रशासन का तर्क रहा है कि इस संशोधन की व्याख्या गलत तरीके से की जाती रही है और यह उन लोगों पर लागू नहीं होना चाहिए जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं या केवल अस्थायी पर्यटक वीजा पर आए हैं। हालांकि, जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स (Chief Justice John Roberts) ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए साफ कहा था कि 14वें संशोधन का वादा देश की धरती पर पैदा होने वाले हर बच्चे के लिए है और इसे राष्ट्रपति के किसी प्रशासनिक आदेश से बदला नहीं जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों की राय और आगामी अदालती लड़ाई

ट्रंप के इन नए आदेशों पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका के कानूनी और मानवाधिकार हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।  आव्रजन मामलों के प्रसिद्ध विशेषज्ञों और अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) जैसी संस्थाओं ने इस कदम को पूरी तरह से असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की अवमानना करने का प्रयास बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही राष्ट्रपति के पास देश की सीमाओं की सुरक्षा और वीजा नीति को नियंत्रित करने के कुछ अधिकार हैं, लेकिन एक बार जब बच्चा अमेरिकी धरती पर जन्म ले लेता है, तो राष्ट्रपति के पास उसकी नागरिकता छीनने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं रह जाता। ‘मैग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ (Migration Policy Institute) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में सालाना होने वाले लाखों जन्मों में से ‘बर्थ टूरिज्म’ के मामले बेहद कम (लगभग 22,000 से 26,000) होते हैं, जो कुल जन्मों का 1 प्रतिशत से भी कम हैं।

कोर्ट के अगले फैसले पर नजर

नागरिकता के इन नए नियमों को लेकर ट्रंप प्रशासन और न्यायपालिका के बीच एक बार फिर बड़ा टकराव तय माना जा रहा है।  आव्रजन वकीलों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इन आदेशों को निचली अदालतों में चुनौती दी जाएगी, जिसके कारण इनके वास्तविक कार्यान्वयन पर फिलहाल रोक लग सकती है।  तब तक के लिए अमेरिका यात्रा करने वाले विदेशी नागरिकों और प्रवासियों के लिए आव्रजन नियम बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण बने रहेंगे।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos