चमत्कारी इलाज के झांसे से रहें सावधान: भ्रामक विज्ञापनों पर लगेगी लगाम, आयुष सुरक्षा पोर्टल पर करें शिकायत
भारत में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। इसी बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठाकर कई असामाजिक तत्व और कंपनियां ऐसे उत्पादों एवं उपचारों का प्रचार-प्रसार करती हैं जो बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण के “हर बीमारी का इलाज”, “100 प्रतिशत गारंटी”, “कुछ ही दिनों में चमत्कारी परिणाम” या “बिना किसी दुष्प्रभाव के पूर्ण उपचार” जैसे बड़े-बड़े दावे करते हैं। ऐसे भ्रामक विज्ञापन न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं।
आयुष सुरक्षा पोर्टल बनेगा उपभोक्ताओं की ढाल
इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए आयुष मंत्रालय ने आयुष सुरक्षा (Ayush Suraksha) पोर्टल की शुरुआत की है। यह डिजिटल मंच नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करता है। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना, फर्जी दावों पर रोक लगाना और लोगों को सुरक्षित एवं प्रमाणिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
भ्रामक विज्ञापन क्या होते हैं?
भ्रामक विज्ञापन वे होते हैं जिनमें किसी औषधि, उपचार या स्वास्थ्य उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाते हैं जो सत्यापित नहीं होते या जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता। अक्सर इनमें दावा किया जाता है कि दवा कैंसर, मधुमेह, मोटापा, गठिया, यौन रोग, बाल झड़ना, त्वचा रोग या अन्य गंभीर बीमारियों को कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक कर देगी। कई विज्ञापनों में नकली डॉक्टरों, विशेषज्ञों या प्रसिद्ध व्यक्तियों की तस्वीरों का उपयोग कर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की जाती है। कुछ मामलों में दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों को पूरी तरह छिपा दिया जाता है।
ऐसे विज्ञापनों की पहचान कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी विज्ञापन में “100 प्रतिशत गारंटी”, “चमत्कारी इलाज”, “एक ही दवा से सभी रोगों का समाधान”, “बिना किसी परीक्षण के उपचार”, “जीवनभर के लिए बीमारी खत्म” या “तुरंत असर” जैसे दावे किए जाएं, तो सतर्क हो जाना चाहिए। यदि विज्ञापन में वैज्ञानिक प्रमाण, वैध लाइसेंस, चिकित्सकीय सलाह या उत्पाद की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो उसकी सत्यता पर प्रश्न उठाना आवश्यक है।
आयुष सुरक्षा पोर्टल कैसे करेगा मदद?
आयुष सुरक्षा पोर्टल नागरिकों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने का सरल माध्यम उपलब्ध कराता है। यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया, समाचार पत्र, टीवी, रेडियो, वेबसाइट, मोबाइल संदेश या अन्य किसी माध्यम से ऐसा विज्ञापन दिखाई देता है जो भ्रामक प्रतीत होता है, तो वह उसका स्क्रीनशॉट, फोटो, वीडियो या संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर शिकायत दर्ज करा सकता है।
कानूनी कारवाई
शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा उसकी जांच की जाती है। यदि विज्ञापन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो संबंधित कंपनी, निर्माता या विज्ञापनदाता के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे बाजार में फर्जी और झूठे दावों पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।
उपभोक्ताओं की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
सरकार का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक नागरिक स्वयं जागरूक नहीं होंगे और संदिग्ध विज्ञापनों की रिपोर्ट नहीं करेंगे, तब तक भ्रामक प्रचार पर पूरी तरह रोक लगाना कठिन होगा। प्रत्येक नागरिक की सतर्कता लाखों लोगों को गलत इलाज और आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।
स्वास्थ्य के साथ न करें समझौता
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी दवा, सप्लीमेंट या उपचार को केवल विज्ञापन देखकर खरीदने से बचें। हमेशा योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक से सलाह लें। इंटरनेट या सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों की सत्यता की जांच करें और बिना प्रमाण वाले चमत्कारी इलाज पर भरोसा न करें। यदि कोई उत्पाद असामान्य रूप से तेज परिणाम देने का दावा करता है, तो उसके प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सरकार का उद्देश्य
आयुष मंत्रालय का लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई से न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आयुष चिकित्सा पद्धतियों की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। सरकार चाहती है कि लोग प्रमाणित उपचार अपनाएं, गलत दावों से बचें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी संदिग्ध विज्ञापन की जानकारी तुरंत आयुष सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।
सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए जागरूक बनें
स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी है। चमत्कारी इलाज के आकर्षक दावे अक्सर लोगों की मजबूरी और उम्मीदों का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी दवा या उपचार पर विश्वास करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना, विशेषज्ञ की सलाह लेना और भ्रामक विज्ञापनों की रिपोर्ट करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। जागरूक नागरिक, जिम्मेदार विज्ञापन और प्रभावी सरकारी निगरानी मिलकर ही एक सुरक्षित, स्वस्थ और विश्वसनीय स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं।
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