ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को मिला कानूनी संरक्षण, तय समय से देरी होने पर भी मिल सकती है राहत
देश में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स कारोबार के साथ ऑनलाइन खरीदारी अब आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। कपड़े, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाइयों से लेकर किराने तक लगभग हर वस्तु अब ऑनलाइन उपलब्ध है। लेकिन इसके साथ ही ग्राहकों को नकली सामान, खराब उत्पाद, गलत वस्तु की डिलीवरी, विज्ञापन से अलग गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी न होने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम से मिलेगी राहत
ऐसी परिस्थितियों में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन नियमों के अनुसार यदि किसी ऑनलाइन मार्केटप्लेस के माध्यम से खरीदा गया उत्पाद दोषपूर्ण, सेवा में कमी, नकली विज्ञापन या विवरण के अनुरूप नहीं है अथवा घोषित समय से देर से पहुंचता है, तो विक्रेता वस्तु वापस लेने, सेवा वापस लेने या धनवापसी देने से इनकार नहीं कर सकता। हालांकि यदि देरी प्राकृतिक आपदा, युद्ध, भारी वर्षा, परिवहन अवरोध जैसी फोर्स मेज्योर (Force Majeure) परिस्थितियों के कारण हुई हो, तो यह प्रावधान लागू नहीं होगा।
उपभोक्ताओं को क्या-क्या अधिकार प्राप्त हैं?
ऑनलाइन खरीदारी करने वाला प्रत्येक उपभोक्ता निम्न अधिकारों का लाभ उठा सकता है—
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यदि उत्पाद टूटा-फूटा, खराब या उपयोग योग्य नहीं है तो उसे बदलने या वापस करने का अधिकार।
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यदि नकली या डुप्लीकेट वस्तु भेजी गई है तो पूर्ण धनवापसी की मांग।
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यदि विज्ञापन में दिखाई गई विशेषताओं से अलग उत्पाद भेजा गया है तो रिटर्न या रिफंड का अधिकार।
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यदि तय समय पर डिलीवरी नहीं होती तो परिस्थितियों के अनुसार शिकायत और रिफंड की मांग।
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सेवा में कमी होने पर मुआवजे की मांग करने का अधिकार।
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शिकायत दर्ज कराने और उसका समयबद्ध निस्तारण पाने का अधिकार।
विक्रेताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी
ई-कॉमर्स नियमों के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विक्रेताओं पर कई कानूनी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। उन्हें वस्तुओं और सेवाओं के बारे में सही एवं पारदर्शी जानकारी देनी होगी। उत्पाद के संबंध में झूठे दावे, नकली ग्राहक समीक्षा (Fake Reviews) या गुणवत्ता के बारे में गलत जानकारी देना अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाएगा। यदि शिकायत दर्ज होती है तो उसका निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार करना होगा। नियमों के तहत शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) की नियुक्ति भी अनिवार्य है, जिसे शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर उसकी पुष्टि करनी होती है और एक महीने के भीतर उसका समाधान करना होता है।
कब नहीं मिलेगा रिफंड?
यदि डिलीवरी में देरी ऐसी परिस्थितियों के कारण हुई हो जो विक्रेता या प्लेटफॉर्म के नियंत्रण से बाहर हों, जैसे बाढ़ या चक्रवात, भूकंप, युद्ध, सरकारी प्रतिबंध, अत्यधिक खराब मौसम और परिवहन व्यवस्था का ठप होना,तो ऐसी स्थिति में विक्रेता को नियमों के तहत छूट मिल सकती है।
शिकायत कैसे करें?
यदि ऑनलाइन कंपनी या विक्रेता आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता तो सबसे पहले कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र और शिकायत अधिकारी से संपर्क करें। यदि वहां समाधान नहीं मिलता तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) में भी मामला दायर किया जा सकता है। उपभोक्ताओं के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां
ऑनलाइन खरीदारी करते समय हमेशा विश्वसनीय विक्रेता से सामान खरीदें। उत्पाद का विवरण, रेटिंग, रिव्यू और रिटर्न पॉलिसी अवश्य पढ़ें। भुगतान और ऑर्डर से जुड़े सभी ई-मेल, बिल और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। महंगे सामान की डिलीवरी के समय संभव हो तो अनबॉक्सिंग का वीडियो रिकॉर्ड करें, ताकि विवाद की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध हो सके।
उपभोक्ता आयोग भी दे रहा है सख्त संदेश
हाल के वर्षों में विभिन्न उपभोक्ता आयोगों ने ऐसे कई मामलों में ई-कॉमर्स कंपनियों और विक्रेताओं को ग्राहकों को रिफंड देने तथा मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। गलत उत्पाद, नकली सामान या धनवापसी से इनकार करने के मामलों में आयोगों ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ई-कॉमर्स ग्राहकों के लिए बड़ी राहत
डिजिटल युग में ऑनलाइन खरीदारी जितनी सुविधाजनक हुई है, उतना ही आवश्यक है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा ई-कॉमर्स नियम, 2020 का उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष ऑनलाइन खरीदारी का अनुभव मिले। यदि कोई विक्रेता खराब, नकली, विज्ञापन से अलग या दोषपूर्ण उत्पाद भेजता है अथवा नियमों का उल्लंघन करता है, तो उपभोक्ता कानूनी रूप से रिटर्न, रिप्लेसमेंट, रिफंड और उचित मुआवजे का दावा कर सकता है।
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