बांकीपुर में BJP की हार, प्रशांत किशोर ने कम वोटरों के साथ 30 साल से सत्ता में रही पार्टी को हराया

The CSR Journal Magazine
पटना का बांकीपुर अब भाजपा का अभेद्य किला नहीं रहा। 3 अगस्त को हुए चुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा के नीरज सिन्हा को 19,324 वोटों से हराकर यह साबित कर दिया कि 30 साल से सत्ता में रहने वाली पार्टी को अब नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछली बार भाजपा ने 51,936 वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि इस बार वह 51 हजार वोटों तक नहीं पहुँच सकी। इस हार के पीछे कई कारण हैं, जिनके बारे में हम विस्तार से जानेंगे।

कैसे जेन-Z ने बदला चुनाव का नज़रिया

बांकीपुर विधानसभा में 3.79 लाख वोटरों में से लगभग 53,419 यानी 14% वोटर 29 साल से कम उम्र के हैं। इन्हें हम जेन-Z कह सकते हैं। हाल ही में लाठीचार्ज की घटनाओं का वीडियो इन युवा वोटरों के बीच तेजी से वायरल हुआ। इसने उनका मनोबल बढ़ाया और मतदान में उनकी भागीदारी बढ़ी। युवा वोटरों ने बटन दबाते समय अपनी नाराजगी का प्रदर्शन किया।

सवर्णों की नाराजगी का असर

नए UGC नियमों से सवर्ण समाज काफी नाराज़ था। हाल ही में हुई घटनाओं, जैसे जहानाबाद NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर केस, ने सवर्णों का गुस्सा और बढ़ा दिया। भाजपा ने यह समझते हुए कि यह नाराजगी उनके लिए खतरा बन सकती है, अपने सवर्ण नेताओं को सक्रिय किया। लेकिन क्या यह रणनीति काम आई? यही सवाल आज हर किसी के मन में है।

‘कुत्ता-बिल्ली’ वाले बयान से उठा हंगामा

प्रशांत किशोर ने भाजपा नेताओं के एक बयान का बार-बार जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि “कुत्ता-बिल्ली को भी खड़ा करेंगे तो लोग हमें जीता देंगे।” इस बयान ने लोगों को भड़का दिया। कई मतदाता इस बयान से नाराज हुए और मतदान के दिन अपना गुस्सा निकाला। इससे भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

नीरज सिन्हा की कमजोर पहचान

भाजपा के नीरज सिन्हा, जो कि प्रशांत किशोर की तुलना में कमजोर प्रत्याशी रहे, चुनावी प्रचार में इंप्रेस करने में असफल रहे। उनकी पहचान और मुद्दों पर स्पष्ट राय की कमी ने भाजपा की मुश्किलें और बढ़ा दीं। कई मौकों पर भाजपा के बड़े नेता उन्हें माइक से दूर रखते रहे।

भाजपा की आंतरिक कलह का नतीजा

भाजपा की इस हार को पार्टी की आंतरिक कलह से भी जोड़ा जा रहा है। सम्राट चौधरी और नितिन नवीन की स्थिति अब सवालों में है। पटना और दिल्ली की अंदरूनी राजनीति का असर इस हार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

सम्राट चौधरी बन सकते हैं नए सवालों का सामना

सम्राट चौधरी के लिए यह हार एक बड़ा झटका है। प्रशांत किशोर ने इसे केवल एक सीट का चुनाव नहीं माना, बल्कि इसे सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर जनमत टेस्ट बताया। हार के बाद प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि भाजपा को सक्षम मुख्यमंत्री चुनना चाहिए, जिसका आपराधिक चरित्र ना हो।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos