कश्मीर में टारगेट किलिंग रोकने का नया उपाय: बाहरी मजदूरों के लिए बनेंगे क्लस्टर

The CSR Journal Magazine
कश्मीर के कुलगाम जिले में हाल ही में दो बाहरी मजदूरों की हत्या से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस मामले के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बडे पैमाने पर नई सुरक्षा रणनीति तैयार करने की आवश्यकता महसूस की है। कश्मीर में करीब चार लाख प्रवासी मजदूर रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। LG मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में इस विषय पर महत्वपूर्ण बैठक की गई है।

ग्रामीण इलाकों पर फोकस

बैठक में खासतौर पर बडगाम और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इन इलाकों में सैकड़ों ईंट-भट्ठे हैं, जिनमें अकेले 199 रजिस्टर्ड भट्ठे शामिल हैं। मजदूरों को व्यक्तिगत सुरक्षा देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, इसीलिए प्रशासन ने ‘नामित सुरक्षित क्लस्टर’ बनाने का निर्णय लिया है। यह कदम ईंट-भट्ठों और बागानों में काम करने वाले यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ के श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगा।

बिहार, यूपी और छत्तीसगढ़ के श्रमिकों का ध्यान

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का यह कदम काफी महत्वपूर्ण है। कश्मीर में बाहरी मजदूरों पर हमले बढ़ने के कारण ही यह निर्णय लिया गया है। सुरक्षा बलों का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों में फैले झोपड़ियों में रहने के बजाय, श्रमिकों को केंद्रित स्थानों पर रखा जाएगा। ऐसा करने से उनकी सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें सुरक्षित महसूस होगा।

अनुच्छेद 370 के बाद की स्थिति

रिपोर्टों के अनुसार, 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीर घाटी में बाहरी प्रवासियों पर हमले बढ़े हैं। पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादियों ने करीब 23 प्रवासियों की टारगेट किलिंग की है। यह स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इन हमलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

प्रशासन का सक्रिय प्रयास

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाल की घटनाओं से सबक लेते हुए सुरक्षा उपायों को और सख्त करने का फैसला किया है। अब मजदूरों को आने पर पहले स्थानीय थाने में जाकर अपनी जानकारी देनी होगी। यह सुरक्षा प्रणाली उन्हें पहचानने और सुरक्षित रखने में मदद करेगी। प्रशासन का यह उपाय प्रवासी मजदूरों की जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

क्लस्टर सिस्टम का प्रभाव

इस क्लस्टर सिस्टम के जरिए प्रशासन आशा कर रहा है कि हर प्रवासी मजदूर की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे न केवल मजदूरों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक संतोष मिलेगा। प्रशासन की कोशिश है कि इस तरह के उपायों से कश्मीर घाटी में तनाव को कम किया जा सके।

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