Parliament Monsoon Session: शुक्रवार को एक मिनट भी क्यों नहीं चलती है संसद?

The CSR Journal Magazine
संसद की कार्यवाही अक्सर ठप रहती है, लेकिन शुक्रवार को लगभग हमेशा कार्यवाही नहीं होती है। हाल ही में मानसून सत्र में यह तीसरी बार हुआ है जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही एक मिनट के लिए भी शुरू नहीं हो पाई। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख वीकेंड की शुरुआत है। आमतौर पर संसद की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी जाती है। पिछले दो सालों के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि शुक्रवार को संसद की कार्रवाई शून्य रहती है।

पैसों का खेल, एक दिन की कार्यवाही पर 9 करोड़ खर्च

एक दिन की संसद की कार्यवाही पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। लेकिन इसके बावजूद, हर सत्र में कम से कम 3 शुक्रवार ऐसे होते हैं जब कार्यवाही नहीं चलती। यह आर्थिक दृष्टिकोण से भी एक बड़ा मुद्दा है। किसी भी सरकार के लिए यह समझना जरूरी है कि एक दिन का अनुत्पादक समय कितना भारी पड़ सकता है। यदि हंगामे के चलते कार्यवाही प्रारंभ होते ही समाप्त हो जाती है, तो यह निश्चित रूप से एक बड़ा प्रश्न उठाता है।

शुक्रवार क्यों है खास?

शुक्रवार का दिन निजी विधेयकों पर चर्चा के लिए निर्धारित है। लेकिन पिछले दशकों में अधिकांश निजी विधेयक संसद में पास नहीं हो सके हैं। आखिरी बार 1970 में किसी निजी विधेयक को पारित किया गया था। यही कारण है कि सांसद इस दिन आमतौर पर काम की बजाय अपने क्षेत्र में अकेले जाते हैं। इसके अलावा, अगर संसद में हंगामा होता है, तो सांसदों को जल्दी से अपने क्षेत्र में जाने का अवसर मिलता है।

Parliament Monsoon Session का हार्ड फैक्ट्स

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजट सत्र 2026 में तीन शुक्रवार को कार्यवाही संचालित होनी थी, लेकिन कुछ हटने वाले कारणों की वजह से ये पूरी तरह फ्लॉप रहे। शीतकालीन सत्र 2025 और पिछले साल के मानसून सत्र के दौरान भी यही स्थिति बनी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या सदन का कार्य करने का ढंग?

अब विचार करने का समय

किसी भी सांसद के लिए यह आवश्यक होता है कि वह अपने मुद्दों को उठाए, लेकिन अगर हर हफ्ते शुक्रवार को ऐसा नहीं हो पाता, तो यह परिस्थितियां चिंताजनक हैं। प्रत्येक सदस्य को एक महीने पहले नोटिस देना होता है, लेकिन क्या सच में यह प्रक्रिया प्रभावी है? अंदरूनी कारणों का इससे क्या संबंध है, यह जानना जरूरी है। शुक्रवार को संसद की कार्यवाही न चलने के पीछे केवल वीकेंड की शुरुआत नहीं है, बल्कि कई जटिल कारण भी हैं। यह विषय यदि गंभीरता से लिया जाए तो निश्चित रूप से संसद में कार्यप्रणाली में सुधार किया जा सकता है। प्राथमिक रूप से, सवाल यह है कि क्या सांसद स्वयं इस मुद्दे पर विचार करेंगे या फिर यही पुरानी बात चलती रहेगी।

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