नितेश राणे का उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला, कहा-पाकिस्तान के एजेंट, उद्धव उल-हक की भाषा बोल रहे ठाकरे

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BJP नेता नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना, कहा ‘पाकिस्तान का एजेंट’

महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘पाकिस्तान का एजेंट’ और ‘उद्धव उल-हक’ कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे बिल्कुल वैसी ही भाषा बोल रहे हैं जैसी पाकिस्तान भारत और हिंदू राष्ट्र के खिलाफ साजिश रचने के लिए इस्तेमाल करता है।

नितेश राणे की तीखी टिप्पणियाँ

महाराष्ट्र के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें ‘पाकिस्तान का एजेंट’ बताया। राणे ने कहा कि जो लोग राम मंदिर के कोष की लूट का आरोप लगाते हैं, उनका भगवान श्री राम और हिंदू धर्म से कोई संबंध नहीं है। उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला करते हुए राणे ने कहा कि उनकी बातें पाकिस्तान की भाषा के समान हैं।

राजनीतिक आरोपों की बौछार

राणे ने उद्धव ठाकरे को ‘उद्धव उल हक’ कहकर उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे का राम मंदिर आंदोलन में कोई योगदान नहीं है। उद्धव की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए राणे ने कहा कि ठाकरे का दिल ‘अल्लाह’ के लिए धड़कता है और वे सिर्फ राजनीति के लिए राम मंदिर की बातें कर रहे हैं। राणे ने निशाना साधते हुए कहा कि जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अज़ान के लिए लाउडस्पीकर की अनुमति दी थी और कभी मंदिरों या हिंदू देवी-देवताओं को याद नहीं किया।

राम रक्षा आंदोलन की तैयारी

इस बीच, उद्धव ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर में दान की धनराशि के कथित दुरुपयोग का मामला उठाते हुए ‘राम रक्षा’ आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने यह आंदोलन दादर स्थित हनुमान मंदिर के पास आयोजित करने की योजना बनाई है। इस पर पलटवार करते हुए नितेश राणे ने कहा कि उद्धव ठाकरे का राम मंदिर आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा है और उन्हें अब राजनीतिक फायदे के लिए राम भगवान याद आ रहे हैं। नितेश राणे ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है कि ठाकरे अब राजनीति कर रहे हैं।

मंदिरों का गौमूत्र से शुद्धिकरण

राणे ने कहा कि उद्धव ठाकरे जिस किसी मंदिर में जाएं, उस मंदिर का गौमूत्र से शुद्धिकरण किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ठाकरे बीजेपी पर आरोप लगाकर केवल अपनी राजनीतिक चालें चल रहे हैं। राणे ने कहा कि हिंदू समाज को अब सोचना चाहिए कि देश के खिलाफ कथित तौर पर जहर उगलने वाले ऐसे नेताओं को कितना महत्व दिया जाना चाहिए।

कोरोना काल और त्योहारों पर नियम

राणे ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने कोरोना काल के दौरान हिंदू त्योहारों और मंदिरों को बंद रखा, लेकिन मस्जिदों को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं बनाया। उनकी यह मंशा हिंदुओं को बदनाम करना है। राणे ने इसे ‘जिहाद’ का नाम दिया है और कहा है कि हिंदू समाज ने इस तरह के कई हमलों का सामना किया है।

नितेश राणे- उद्धव ठाकरे का पुराना बैर

नितेश राणे और उद्धव ठाकरे के बीच का बैर महज़ राजनीतिक नहीं, बल्कि दशकों पुरानी राणे बनाम ठाकरे पारिवारिक और व्यक्तिगत दुश्मनी का हिस्सा है। नितेश राणे के पिता नारायण राणे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच 1990 के दशक से ही वर्चस्व की जंग चल रही है।

शिवसेना में नेतृत्व की जंग-उद्धव का उभार

जब शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने साल 2003 के महाबलेश्वर अधिवेशन में उद्धव ठाकरे को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया, तो नारायण राणे ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया था। राणे ने आरोप लगाया कि पार्टी में पद और टिकट बेचे जा रहे हैं। इसके बाद साल 2005 में बालासाहेब ठाकरे ने नारायण राणे को पार्टी से निष्कासित कर दिया, जिसका जिम्मेदार राणे परिवार हमेशा उद्धव ठाकरे को मानता रहा।

कोंकण क्षेत्र पर वर्चस्व की लड़ाई

नारायण राणे और उनके दोनों बेटों (निलेश और नितेश) का राजनीतिक आधार महाराष्ट्र का कोंकण क्षेत्र (विशेषकर सिंधुदुर्ग) है। शिवसेना छोड़ने के बाद जब नारायण राणे कांग्रेस में गए, तो उन्होंने शिवसेना को कोंकण से खत्म करने की कसम खाई थी। वहीं उद्धव ठाकरे ने कोंकण में राणे परिवार के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी, जिससे दोनों परिवारों में कटुता और बढ़ गई।

अगली पीढ़ी का टकराव (नितेश बनाम आदित्य)

यह विवाद केवल पिताओं तक सीमित नहीं रहा। साल 2011 में मुंबई के वर्ली इलाके में नितेश राणे और आदित्य ठाकरे की कारों के बीच टक्कर और विवाद हुआ था, जिसके बाद मामला पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया था। नितेश राणे लगातार सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे पर सीधे और बेहद तीखे व्यक्तिगत हमले करते रहे हैं।

थप्पड़ विवाद और गिरफ्तारी (2021)

यह दुश्मनी तब चरम पर पहुंच गई जब 2021 में नितेश राणे के पिता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने एक बयान में कहा कि यदि वह वहां होते, तो स्वतंत्रता दिवस के साल भूलने पर उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मार देते। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने नारायण राणे को गिरफ्तार कर लिया था। इस घटना के बाद से नितेश राणे, उद्धव ठाकरे और उनके परिवार पर राजनीतिक बदला लेने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं।

आगे की चुनौतियाँ

भविष्य में राजनीति में और भी कई दाव-पेंच देखने को मिलेंगे, खासकर जब ठाकरे और राणे जैसे नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहेंगे। उद्धव ठाकरे का ‘राम रक्षा’ आंदोलन और राणे की तीखी टिप्पणियाँ इस राजनीतिक गतिरोध को और भी मजबूत करेंगी।

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